पानी सहेजने में पहाड़ पर बसे नीडम और सिंधिया स्कूल बने आइडियल

पानी सहेजने में पहाड़ पर बसे नीडम और सिंधिया स्कूल बने आइडियल

| Publish: Apr, 10 2019 06:03:03 AM (IST) Gwalior, Gwalior, Madhya Pradesh, India

पानी को रिसाइकल कर पौधों को पानी देने के काम में लाया जाता है

ग्वालियर. हमारे शहर में पानी की सबसे विकराल समस्या है, जबकि हमारे पास वाटर बॉडीज काफी संख्या में है। शहर में 2500 कुएं , बावड़ी, 10 डैम और 7 तालाब हैं। इनमें से काफी संख्या में कुएं और बावड़ी सूख चुके हैं। यदि इन्हें फिर से रिचार्ज कर लिया जाए, तो ग्वालियर में पानी की समस्या से निजात मिल सकती है। हालांकि पानी संरक्षित करने की दिशा में शहर के शैक्षणिक संस्थानों ने पहल की है। आज वाटर रिसोर्सेज डे है। हम आपको ऐसे ही कुछ संस्थानों से परिचित करा रहे हैं, जिन्होंने पानी को न केवल संरक्षित कर वाटर लेवल बढ़ाया, बल्कि पानी को रिसाइकल कर उपयोग में भी ला रहे हैं।

हर बिल्डिंग के नीचे रिचार्जिंग किट
एबीवी ट्रिपल आईटीएम में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट है, जिससे पानी को रिसाइकल कर पौधों को पानी देने के काम में लाया जाता है। हर बिल्डिंग के नीचे रिचार्जिंग किट है, जो पानी को वेस्ट नहीं जाने देती। वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से पानी साफ कर सप्लाई किया जाता है। इसके लिए 3 लाख लीटर की टंकी बनाई गई है। इसके अलावा 4 टंकियां डेढ़-डेढ़ लाख की भी हैं।
15 साल की बोरिंग में पानी नहीं हुआ कम
225 एकड़ में फैली जीवाजी यूनिवर्सिटी में वाटर हार्वेस्टिंग का पूरा इंतजाम है। यहां वाटर लेवल को पूरी तरह से मेनटेन किया गया है। 15 साल पहले हुईं बोरिंग का पानी आज भी उसी लेबल पर है। परिसर का एक भी पानी वेस्ट नहीं जाता। यहां सैकड़ों की संख्या में पेड़ लगे हुए हैं। समय-समय पर जल बचाने के लिए प्रोग्राम से स्टूडेंट्स को अवेयर किया जाता है।
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से हर बूंद का यूज
विवेकानंद नीडम शहर से काफी ऊंचाई पर पहाड़ में बसा है। फिर भी यहां का वाटर लेवल 125 फीट है। नीडम में वाटर हार्वेस्टिंग के इंतजाम हैं। 82 बायो टायलेट हैं। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट है, जिसके पानी का यूज पेड़-पौधों में पानी डालने के काम आता है। बारिश के पानी को रोकने के लिए पहाड़ पर ही कई बैरीकेड बनाए गए हैं, जिससे पानी बाहर नहीं जा पाता।
स्कूल में धोबी, रानी, कटोरा और चेरी ताल
सिंधिया स्कूल फोर्ट में धोबी ताल, रानी ताल, कटोरा ताल और चेरी ताल हैं, जहां सभी हाउसेज के पानी को स्टोर किया जाता है। बाथरूम के पानी को भी वाटर प्लांट के माध्यम से रिसाइकल कर पेड़-पौधों में डालने के काम लाया जाता है। कई एकड़ में बने स्कूल का एक बूंद पानी भी बाहर नहीं जा पाता। पानी बचाने की प्रक्रिया में स्टूडेंट्स का भी योगदान है।
हर माह साढ़े 7 लाख लीटर पानी रिसाइकल
एमिटी यूनिवर्सिटी के वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को दो साल पहले मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने नगर निगम की एक दलील पर आइडल बताया था। एमिटी में हर माह साढ़े 7 लाख लीटर पानी रिसाइकल किया जाता है, जिसे पीने से लेकर गार्डनिंग करने तक यूज किया जाता है। इसके लिए एक प्लांट तैयार किया गया है। बारिश से लेकर बाथरूम तक के पानी को स्टोर कर यूज में लाया जाता है।

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