किसी के छूने से असहज हों, तो पैरेंट्स या टीचर को जरूर बताएं

आइटीएम ग्लोबल स्कूल के स्टूडेंट्स ने सीखा 'गुड टचÓ व 'बैड टचÓ

By: Mahesh Gupta

Published: 27 Jun 2021, 09:51 AM IST

टीचर्स ने वीडियो प्रजेंटेशन, एनीमेशन और कलरफुल प्रजेंटेशन के माध्यम से सिखाया रिस्की सिचुएशन पहचानना और अपनी सुरक्षा करना

ग्वालियर.

जब कोई आपको इस तरह से टच करें कि आपको उससे बैड फील हो या आप अन्कम्फर्ट महसूस करें तो ये बैड टच हो सकता है। साथ ही अगर कोई अनजान व्यक्ति आपके प्राइवेट पाट्र्स या कई अन्य जगह आपको गलत तरीके से टच की कोशिश करता है, तो यह बैड टच होता है। अगर कोई आपके साथ गलत हरकत करे और बोले कि किसी को बताना मत, तो ये बैड टच होता है। वहीं अगर कोई आपको टच करे और उससे आपको अच्छा लगे तो ये गुड टच होता है, कोई आपको प्यार करने के लिए, मदद करने के लिए आपको टच करता है तो आप इसे गुड टच कहेंगे। ये दोनों टच अगर आप पहचानना सीख जाएंगे तो आप कभी डेंजर में नहीं आएंगे। आइटीएम ग्लोबल स्कूल के ग्रेड 1 से लेकर ग्रेड 5 तक के स्टूडेंट्स को कुछ ऐसी ही जरूरी सीख दे रहीं थीं स्कूल टीचर्स। जिन्हें गुड टच और बैड टच के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से एक विशेष वर्कशॉप का आयोजन किया गया।


बच्चों को समझाया गया कि बैड टच या अन्य अनकम्फर्टेबल बिहेवियर में अंतर कैसे करें व उनकी पहचान कैसे करें। स्टूडेंट्स को इंस्ट्रक्शन्स भी दिए गए कि उन्हें अन्कम्फर्टेबल सिचुएशन में कैसे रिएक्ट या रिस्पांड करना है। वर्कशॉप में स्टूडेंट्स ने सेफ और अनसेफ टच के बारे में भी समझा। इसके लिए उन्हें एनीमेटेड वीडियो और कलरफुल प्रजेंटेशन की मदद से सरल तरीके से समझाया। इस सेशन का समापन एक विशेष एक्टिविटी के साथ हुआ, जिसमें स्टूडेंट्स को अपना 'सेफ सर्कलÓ बनाने के लिए कहा गया। उन्हें कहा कि जब भी उन्हें कुछ भी अन्कम्फर्टेबल महसूस होता हो तो अपने 'बॉडीगाड्र्सÓ उनके सेफ सर्कल के व्यक्ति को सब कुछ बताएं। उन्हें उस नाम या उस व्यक्ति को बताने के लिए भी कहा गया जिस पर उन्हें सबसे ज्यादा भरोसा है।

स्टूडेंट्स को सिखाया बैड टच को हैंडल करना
वर्कशॉप में नन्हे-मुन्नों को डेंजर शब्द से परिचित करवाया। इस दौरान खासकर 'नो टचÓ एरिया की पहचान कैसे करें, यह बताया गया। उन्हें बताया गया कि समझें 'सेफ एडल्टÓ कौन-कौन है। जिसमें सबसे पहले हमारे मम्मी, पापा, टीचर्स शामिल हैं। अगर कोई भी बुरा एक्सपीरियंस होता है, तो सबसे पहले इन्हें जरूर बताएं। वर्कशॉप में यह भी समझाया गया कि किसी भी रिस्की या अनकम्फर्टेबल सिचुएशन में जोर से 'नहींÓ चिल्लाकर, व्यक्ति से दूर भागकर और उसके बारे में किसी भी सेफ एडल्ट को सूचित करके एक बैड टच को कैसे हैंडल करना है।

वर्जन
वर्कशॉप से बच्चे कम उम्र में ही कर सकेंगे अपनी रक्षा
हम बच्चों को सही तरीके से खाना खाना, कपड़े पहनना, बड़ों की रिस्पेक्ट करना जैसी कई जरूरी बातें सिखाते हैं, लेकिन उसे गुड टच और बैड टच के बारे में बताना भूल जाते हैं, जो आज के जमाने में बहुत जरूरी है। ऐसी वर्कशॉप से बच्चे कम उम्र से ही ऐसे खतरों को पहचानने और उनसे अपनी रक्षा करने में सक्षम होंगे।
अनीता मित्तल, प्राइमरी कॉर्डिनेटर, आइटीएम ग्लोबल स्कूल

Mahesh Gupta
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