रहने के लिए मकान बनवा रहे हैं तो देना पड़ेगा 12 फीसदी जीएसटी

रहने के लिए मकान बनवा रहे हैं तो देना पड़ेगा 12 फीसदी जीएसटी

monu sahu | Publish: Jun, 23 2018 08:40:17 PM (IST) Gwalior, Madhya Pradesh, India

मकान बनवा रहे हैं तो उस पर 12 फीसदी की दर से जीएसटी चुकाना होगा। वहीं यदि एक रहवासी मकान पर सिर्फ लेबर वर्क कराया गया है तो वह जीएसटी से मुक्त रहेगा

ग्वालियर . मकान बनवा रहे हैं तो उस पर 12 फीसदी की दर से जीएसटी चुकाना होगा। वहीं यदि एक रहवासी मकान पर सिर्फ लेबर वर्क कराया गया है तो वह जीएसटी से मुक्त रहेगा। यह बात इंदौर के सीए सुनील पी.जैन ने कही, वे यहां एमएलबी रोड स्थित निजी होटल में राष्ट्रीय अकादमी सीमा शुल्क, अप्रत्यक्ष कर एवं नारकोटिक्स विभाग भोपाल और मप्र टैक्स लॉ बार ऐसोसिएशन की ओर से आयोजित कार्यशाला में बोल रहे थे। कार्यशाला का विषय वक्र्स कॉन्ट्रेक्ट्स रियल एस्टेट व जीटीए का वैधानिक परिदृश्य रखा गया था। मुख्य अतिथि के रूप में राज्य कर जीएसटी के संयुक्त आयुक्त एसके श्रीवास्तव और विशेष अतिथि के रूप में सेंट्रल टैक्स एमपी के असिसेटेंट कमिश्नर कांतिप्रभात सिंह उपस्थित थे।
अपने उद्बोधन में आगे बोलते हुए कहा सीए सुनील पी.जैन ने कहा कि अभी भी कर सलाहकार और बिल्डर इस संशय में हैं कि बिल्डर के द्वारा मकान या फ्लैट बनाकर बेचने पर 12 फीसदी की दर से जीएसटी देना होगा, जबकि ऐसा नहीं है जीएसटी में कुल जमीन के हिस्से के लिए एक तिहाई हिस्से की छूट दी गई है। जो कि जमीन का एक तिहाई हिस्सा घटाने के बाद 12 फीसदी ही होता है। पर इसे जीएसटी की दर 12 फीसदी नहीं कह सकते। हमें इसके लिए फ्लैट की कुल कीमत में से एक तिहाई हिस्सा घटाकर दो तिहाई हिस्से पर 18 फीसदी की दर लगाना है। जीएसटी में बिल्डर को रिफंड लेने का अधिकार भी नहीं है।
मुख्य अतिथि राज्य कर जीएसटी के संयुक्त आयुक्त एसके श्रीवास्तव ने कहा कि जीएसटी अभी नया कानून है। अभी तक यह अपनी प्रारंभिक व बाल्यावस्था में था, लेकिन अब धीरे-धीरे यह नवागत कानून देश की अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोण से स्टेबल होता जा रहा है।
विशेष अतिथि कांति प्रभात सिंह अस्सिस्टेंट कमिश्नर सेंट्रल टैक्स ने कहा कि सभी कर सलाहकार अपने-अपने पक्षकारों द्वारा जीएसटी पोर्टल पर रिफंड के लिए किए गए आवेदनों के संदर्भ में वांछित दस्तावेज हार्ड कॉपी में आवश्यरूप से प्रस्तुत करें जो नियमानुसार एक अनिर्वायता है, जिससे शीघ्र ही व्यवसायी को उसके द्वारा चाहा गया रिफंड सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर किया जा सके। ऑडिट राष्ट्रीय अकादमी सीमा शुल्क भोपाल के प्रभात खन्ना ने इनपुट टैक्स क्रेडिट के प्रावधानों का विश्लेषण किया।
इस मौके पर एमपी टैक्स लॉ बार ऐसोसिएशन के अध्यक्ष अश्विन लखोटिया, जेसी गोयल, व्हीबी त्यागी, पंकज गोयल आदि मौजूद थे। संचालन संस्था उपाध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने एवं आभार प्रदर्शन अमित बंसल ने किया।

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