बिलौआ से इटावा तक की दूरी 130 किमी, गिट्टी की ITP में दिखा रहे 1450 किमी

बिलौआ से दूसरे शहर जा रहे हाइवा, डंपर और ट्रकों के जरिए लगभग 2 करोड़ रुपए का काला पत्थर और 35 से 40 लाख रुपए की रेत

By: Gaurav Sen

Published: 12 Mar 2018, 11:12 AM IST

ग्वालियर। बिलौआ से दूसरे शहर जा रहे हाइवा, डंपर और ट्रकों के जरिए लगभग 2 करोड़ रुपए का काला पत्थर और 35 से 40 लाख रुपए की रेत निकलने से हर दिन लगभग 25 लाख रुपए की क्षति सरकार के खजाने को हो रही है।

पत्थर की खदानों से 800 वाहन और रेत की खदानों से लगभग 650 डंपर और ट्रॉली शहर में आ रहे हैं। 700 वाहन गिट्टी और 150 वाहन रेत लेकर शहर से बाहर जा रहे हैं। इन वाहनों को ले जाने के लिए सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज होने वाली ईटीपी में रूट की दूरी और समय सीमा बढ़ाकर एक ही शहर में खनिज की डिलेवरी देकर 24 घंटे में तीन से चार चक्कर लगाए जा रहे हैं। इससे राजस्व की सीधे तौर पर हानि हो रही है, साथ ही खदानों से निकलने वाले बेशकीमती खनिज का कोष भी खाली होता जा रहा है।

 

 

 

 

 

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स्थिति यह है कि ग्वालियर से बिलौआ के बीच की अधिकतम ३० किलोमीटर की दूरी को 100 किलोमीटर लिखा जा रहा है। भिंड-इटावा होकर गोपालपुरा तक की अधिकतम दूरी 150 किलोमीटर है, जिसे 1450 किलोमीटर लिखा जा रहा है। प्रशासन, पुलिस और माइनिंग विभाग के अधिकारी इसकी अनदेखी कर पत्थर और रेत माफिया को लाभ पहुंचा रहे हैं।

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ये जिम्मेदारी निभाएं तो बने बात

1. कलेक्टर राहुल जैन


"डबरा, मुरार, भितरवार, घाटीगांव और लश्कर एसडीएम के क्षेत्र में लगभग ३०० वैध-अवैध खदानें"

  • नियमों का पालन कराने के लिए नियुक्त कार्यपालिक दंडाधिकारी इन लीगल माइनिंग रोकते नहीं हैं।
  • कार्रवाई के नाम पर साल में पांच या सात बार नदी में पनडुब्बी डुबाई जाती हैं और पत्थर की खदानों का निरीक्षण भर किया जाता है।
  • एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार सहित अन्य अधिकारियों पर पत्थर माफिया के प्रैशर में काम करने का आरोप लगता रहा है।

एसपी डॉ. आशीष

  • हाईवे पर ओवरलोड 8 पहिया से लेकर 16 पहिया वाले भारी वाहन लगातार करते नियमों की अनदेखी
  • पुलिस अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाती और माइनिंग माफिया से मिलीभगत के आरोप लगते रहे हैं।
  • डबरा, डबरा देहात, भितरवार, घाटीगांव,बिलौआ, सिरोल, झांसी रोड, मुरार और महाराजपुरा सहित
    पुरानी छावनी थाना पुलिस की सीमा से गिट्टी और रेत के ओवरलोड वाहन निकलते हैं।


माइनिंग अधिकारी मनीष पालेवार

  • माइनिंग विभाग व स्टेट माइनिंग कार्पोरेशन के माध्यम से चल रहीं रेत और सफेद-काले पत्थर की खदानें
  • 99 प्रतिशत खदानों में पत्थर और रेत अवैध तरीके से निकाला जा रहा है
  • एक साल का कोटा एक दिन में ही निकाल रहे हैं।
  • खनिज विभाग में कार्रवाई के लिए माइनिंग ऑफिसर, दो इंस्पेक्टर सहित 8 कर्मचारियों का स्टाफ है। इसमें से एक इंस्पेक्टर रिश्वत के आरोप में निलंबित हैं और एक का पिछले वर्ष स्थानांतरण हो गया था। अब पूरे जिले की जिम्मेदारी माइनिंग ऑफिसर के पास है।

यह है गड़बड़ का तरीका


वाहन क्रमांक- एमपी07 -एचबी 9057 , एमपी 07 एचबी 4557
- 9 मार्च : शाम 6.16
- पीतांबरा स्टोन, बिलौआ
- वाहन में 8 क्यूबिक मीटर गिट्टी भरी गई, इसकी वैधता 11 मार्च शाम 8.19 बजे तक रखी

रूट : ईटपी में बिलौआ से भिंड- इटावा होकर गोपालपुरा लिखा गया
इन स्थानों के बीच की दूरी अधिकतम 130 से 150 किलोमीटर है। जबकि रॉयल्टी रसीद पर डिस्टेंस के कॉलम में 1450 किलोमीटर लिखा गया, और पहुंचने के लिए समय सीमा 48.20 घंटे रखी गई।

गड़बड़
1. 8 क्यूबिक की जगह ३५ क्यूबिक मीटर गिट्टी भरी गई।
2. रॉयल्टी रसीद में दूरी जानबूझकर 10 गुना ज्यादा लिखी गई।

वाहन क्रमांक: एमपी 07 जीए 4699, 10 मार्च : रात 2.40
- सर्वोदय मैन्यूफैक्चरर्स एंड कांन्ट्रैक्टर, बिलौआ
- वाहन में 10 क्यूबिक मीटर गिट्टी भरी गई, इसकी वैधता 11 मार्च शाम 7.00 बजे तक रखी

रूट : ईटपी में बिलौआ से ग्वालियर तक लिखा गया
- बिलौआ से ग्वालियर की दूरी 30 से 35 किलोमीटर है, जबकि रॉयल्टी रसीद पर डिस्टेंस के कॉलम में 100

- किलोमीटर लिखा गया, और पहुंचने के लिए समय सीमा 3.20 घंटे रखी गई।


गड़बड़ : १० की जगह २० क्यूबिक मी. गिट्टी भरी गई। दूरी भी ३० की जगह १०० किलोमीटर लिखा गया...
पुलिस, प्रशासन और माइनिंग के किसी भी अधिकारी ने वाहनों की रॉयल्टी में बढ़े हुए समय और ओवरलोड गिट्टी ले जाने का कारण नहीं पूछा है।

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