25 लाख की आबादी वाले जिले में संक्रमण का स्तर खतरनाक, फिर भी न बॉर्डर सील न स्क्रीनिंग का पता

14 लाख की जनसंख्या वाले नगर निगम के साठ वार्डों सहित जिले की 256 पंचायत, नगर पालिका और नगर परिषद क्षेत्रों में संक्रमण का स्तर लगातार बढ़ रहा...

ग्वालियर. 14 लाख की जनसंख्या वाले नगर निगम के साठ वार्डों सहित जिले की 256 पंचायत, नगर पालिका और नगर परिषद क्षेत्रों में संक्रमण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। बीते कुछ दिनों से संक्रमित मरीजों का आंकड़ा प्रतिदिन 1 हजार से अधिक सामने आ रहा है। कोविड संक्रमण की वजह से हुई डेथ की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। इसके बाद भी न तो बॉर्डर पर सही तरीके से चैकिंग की जा रही है और न ही बस्तियों में स्क्रीनिंग पर ध्यान दिया गया है।
होम क्वांटाइन किए गए मरीजों का डाटा भी डेली हैल्थ बुलेटिन से गायब है। रेमडेसिविर इंजेक्शन का पता लगाने की कोशिश कर रहे मरीजों के परिजन रिस्पॉन्स न मिलने से दुखी हैं, आक्रोश व्यक्त कर रहे हैं, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं है। इंजेक्शन के लिए जिनको जिम्मेदारी दी गई है, उनका कॉल या तो स्विच ऑफ आ रहा है या फिर रिसीव नहीं हो रहा है। ऑक्सीजन का संकट भी अब सामने आ रहा है, शुक्रवार की शाम को शहर के कुछ नर्सिंग होम में मरीजों को ऑक्सीजन न मिलने की शिकायतें सामने आई हैं। व्यवस्थाओं के गड़बड़ाने के बाद भी न तो जिले के लिए नियुक्त कोविड प्रभारी मंत्री, सांसद सहित अन्य नेता आम जन में फैल रहे पैनिक और दवाओं की समस्या का समाधान करने में लगभग विफल साबित हुए हैं।


यह हैं बॉर्डर के हाल
शहर के चारों प्रवेश एंट्री पॉइंट पर चेक पोस्ट बनाए गए हैं। इन चारों जगहों पर कर्मचारियों की तैनाती तो की गई है, लेकिन चेकिंग के नाम पर सिर्फ औपचारिकता हो रही है। शुक्रवार को जब इन पोस्ट में मोहना और निरावली पर जाकर देखा गया गया तो पता चला कि एक मिनट में 25 से अधिक चार पहिया वाहन निकल रहे हैं। इनमें से औसतन दो वाहन ही चेक किए जा रहे थे। मोहना में तो बिना मास्क की भीड़ बाजारों में थी, फल-सब्जी के ठेलों पर खरीदार बिना किसी डर के खरीदारी करते मिले।

पिछली साल इसलिए मिली थी सफलता
मिशन शक्ति
शहर और गांव में बाहर से आए 6 हजार से अधिक लोगों को होम क्वारंटीन किया गया। संक्रमण का फैलाव कम होने के बाद भी सख्ती ज्यादा रही और हर दिन इंसीडेंट कमांडरों द्वारा निर्देशों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की थीं।
सोशल इंटेलीजेंस
शहर में संक्रमण की स्थिति जानने के लिए प्रत्येक वार्ड में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ताओं के अलावा समाज के लोगों ने सूचना देने में अहम भूमिका निभाई। बुखार, जुकाम, खांसी, गले में दर्द जैसे लक्षण वाले लोगों की सूचनाएं तेजी से अधिकारियों तक पहुंचती रहीं।
चेकपोस्ट
जिले की सीमा पर बने चैकपोस्ट पर पुलिस बल की मौजूदगी में आने-जाने वालों की सघन चैकिंग जारी रही। चैकपोस्ट पर मौजूद स्वास्थ्य विभाग का अमला लगातार तापमान की जांच करता रहा। इससे जिले की सीमा में आने वाले संभावित मरीजों की पहचान आसान हुई।
स्क्रीनिंग
वार्ड,ग्राम, रेलवे स्टेशन सहित अन्य स्थानों पर लोगों का तापमान जानने के लिए सघन तरीके से स्क्रीनिंग के लिए टीमें तैनात रहीं। बाहर से आने वाले लोगों पर विशेष नजर रखी गई, जिसके परिणाम स्वरूप क्वारंटीन करने में अधिकारियों को ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ी।


ऐसी है शहर की स्थिति
शहर में कोरोना कफ्र्यू लगने के बाद भी लोगों में संक्रमण को लेकर किसी तरह का खौफ नहीं दिख रहा है। तीनों उपनगरों की प्रत्येक सड़क पर लोगों की आवाजाही बनी हुई है। मोहल्लों में कोविड संक्रमण की बातें भी हुजूम लगाकर ही लोग कर रहे हैं। चोरी छिपे दुकानें खोलने वाले सख्ती के बाद भी नहीं मान रहे हैं।

नेताओं का हस्तक्षेप बढ़ा रहा दिक्कत
रेमडेसिविर इंजेक्शन हो या फिर लोगों पर कार्रवाई को लेकर प्रशासन द्वारा सख्ती दिखाने की कोशिश हो, राजनीतिक दल प्रशासनिक अधिकारियों पर हावी हैं। गुरुवार की शाम कलेक्ट्रेट में हुई वीसी के दौरान इंजेक्शन की मांग कर रहे लोगों ने जब भाजपा सांसद, जिलाध्यक्ष सहित अन्य को घेरा तो उन्होंने आमजन के सामने इंजेक्शन की उपलब्धता को लेकर सही स्थिति स्पष्ट ही नहीं की और सभी को इंजेक्शन दिलाने का आश्वासन देकर चले गए। जनप्रतिनिधियों द्वारा इंजेक्शन दिलाने का आश्वासन दिए जाने के बाद लोग अधिकारियों पर जानबूझकर इंजेक्शन न देने का आरोप लगाते रहे।

रिज़वान खान Desk
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