scriptIn the market getting more prices than the purchase centers | मंडियों में मिल रहा अधिक मोल इसलिए खरीदी केन्द्रों में नहीं हो रही तौल | Patrika News

मंडियों में मिल रहा अधिक मोल इसलिए खरीदी केन्द्रों में नहीं हो रही तौल

- मंडियों में समर्थन मूल्य से ज्यादा भाव होने से खरीदी केंद्रों पर सन्नाटा


- गेहूं और सरसों बेचने नहीं आ रहे किसान


-श्योपुर के 35 केंद्रों पर अब तक पहुंचे हैं मात्र पांच किसान

ग्वालियर

Published: May 10, 2022 11:34:52 pm

ऋ षि कुमार जायसवाल
ग्वालियर. शासन-प्रशासन द्वारा भले ही गेहूं और सरसों की समर्थन मूल्य पर खरीदी की जा रही है, लेकिन इस बार किसानों ने खरीद केंद्रों से दूरी बना ली है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस बार गेहूं और सरसों का भाव खुली मंडी में समर्थन मूल्य से कहीं ज्यादा है। इस कारण समर्थन मूल्य के केंद्रों पर आने के बजाय मंडी में अपनी उपज बेच रहे हैं।
मंडियों में मिल रहा अधिक मोल इसलिए खरीदी केन्द्रों में नहीं हो रही तौल
मंडियों में मिल रहा अधिक मोल इसलिए खरीदी केन्द्रों में नहीं हो रही तौल

यही वजह है कि श्योपुर जिले में गेंहू की खरीदी के लिए बनाए 35 समर्थन मूल्य के केंद्रों पर अभी तक महज 5 किसानों ने 220 क्ंिवटल गेहूं बेचा है। सरसों के लिए बनाए गए 16 केंद्रों पर तो एक भी किसान सरसों बेचने नहीं आया है। इसके विपरीत कृषि मंडी में खुली बिक्री के लिए प्रतिदिन 25 हजार क्ंिवटल गेहूं आ रहा है। सरसों भी 5 हजार क्ंिवटल से ज्यादा आ रही है। यही वजह है कि इस बार समर्थन मूल्य के खरीद केंद्र सूने पड़े हैं, जबकि बंपर आवक से मंडियां गुलजार है।

सरसों का समर्थन मूल्य से 30 फीसदी ज्यादा भाव
इस बार मंडियों में गेहूं और सरसों का भाव समर्थन मूल्य से कहीं ज्यादा है। सरसोंं तो समर्थन मूल्य से 30 फीसदी तक के ज्यादा भाव में बिक रही है। सरसों का समर्थन मूल्य 5050 रुपए प्रति क्ंिवटल है, जबकि खुली मंडी में भाव 6400 से 6800 रुपए प्रति क्ंिवटल तक बिक रही है। वहीं गेहूं का समर्थन मूल्य जहां 2015 रुपए प्रति क्ंिवटल है, जबकि खुली मंडी में ये 2100 से 2300 रुपए प्रति क्ंिवटल तक बिक रहा है।

दो हजार करोड़ रुपए से ज्यादा मिलेंगे सरसों से
बीते साल सरसों का भाव 8500 रुपए क्विंटल तक पहुंच गया था। इसलिए इस बार किसानों ने 1.76 लाख हेक्टेयर में रिकॉर्ड सरसों की बोवनी की। 35 लाख क्विंटल से ज्यादा उत्पादन का अनुमान है, इससे मुरैना जिले के किसानों को दो हजार करोड़ रुपए से ज्यादा रुपए प्राप्त होंगे। किसान इस समय जरूरतें पूरी करने के लिए आवश्यक सरसों ही बेच रहे हैं, बाकी रोककर रख रहे हैं। माना जा रहा है कि बरसात के बाद सरसों का भाव 10 हजार रुपए क्विंटल तक पहुंच सकता है। एक जिला-एक उत्पाद योजना में शामिल होने के बाद सरसों के उत्पाद, निर्यात एवं बाजार बढ़ाने के साथ उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए मुरैना जिले को सरसों-हब के तौर पर विकसित करने पर भी कवायद की जाएगी।
तेल उत्पादन अच्छा देने वाली किस्में लाई जाएंगी
सरसों के तेल का उत्पादन वर्तमान में 30-35 प्रतिशत तक ही मिल पाता है। अब 44 प्रतिशत तक तेल उत्पादन देने वाली सरसों की खेती को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।

आवक नहीं हो रही है
गेहूं खरीदी के लिए हमने 35 केंद्र बनाए हुए हैं, लेकिन मंडियों में भाव ज्यादा होने के कारण अभी केंद्रों पर गेेहूं की आवक नहीं हो रही है। कुछ यही स्थिति सरसों की भी है।
आरके शर्मा, सहायक आयुक्त सहकारिता श्योपुर
गेहूं के आंकड़े
जिला ------ समर्थन मूल्य ------ मंडी भाव------ खरीदी समर्थन मूल्य पर ------खरीदी मंडी भाव
श्योपुर ------2015 ------ 2100-2300----- - 220 क्विंटल ------ 25000 क्विंटल
मुरैना ------2015 ------ 2155----- -200 क्विंटल ------ 38994 क्विंटल
भिण्ड ------2015------ 2100-2300 ------ 200 क्विंटल ----- -95000 क्विंटल
दतिया------2015------ 2125-2175 ------ 7053 क्विंटल ------ 40000 क्विंटल
डबरा ------2015----- -2200-2500 ---- --100 क्विंटल------ 5600क्विंटल

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