प्रदेश में पहली बार भोपाल में जुटेंगे देश भर के जेल डीजी, इस खास वजह से हो रही है कॉन्फ्रेंस

प्रदेश में पहली बार भोपाल में जुटेंगे देश भर के जेल डीजी, इस खास वजह से हो रही है कॉन्फ्रेंस

Gaurav Sen | Publish: Dec, 09 2018 08:17:04 AM (IST) Gwalior, Gwalior, Madhya Pradesh, India

प्रदेश में पहली बार भोपाल में जुटेंगे देश भर के जेल डीजी, इस खास वजह से हो रही है कॉन्फ्रेंस

पुनीत श्रीवास्तव @ ग्वालियर

देश के 29 राज्य और 7 केन्द्र शासित प्रदेशों के जेल प्रमुखों को भोपाल आने का न्यौता दिया जा रहा है। यहां पहली बार देश के सभी जेलों के प्रमुखों की कॉन्फ्रेंस होगी। इसमें जेलों के विकास, बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोडऩे सहित तमाम मसलों पर सभी जेल डीजीपी चर्चा करेंगे। इसमें तय होगा कि किस तरह पुलिस, जेल, स्वास्थ्य और न्याय विभाग मिलकर बंदियों और जेलों के सुधार के लिए कदम उठा सकते हैं। किस तरह सदियों पुराने कामकाज के ढर्रे को बदल कर आधुनिक तरीके से काम किया जा सकता है, जिससे समय और फिजूल खर्च से बचा जाए।


देश के सभी जेलों के प्रमुख की कॉन्फ्रेंस जनवरी के दूसरे सप्ताह में होगी, हालांकि अभी तारीख तय नहीं हुई है, लेकिन मीङ्क्षटग का खाका खींचा जा चुका है। मध्यप्रदेश पहली बार इस आयोजन की मेजबानी करेगा। जेल अफसर बताते हैं कि देश में सबसे ज्यादा 11 सेंट्रल जेल मध्यप्रदेश में हैं। इनकी सुरक्षा के अलावा बंदियों को मुख्यधारा से जोडऩा बड़ी चुनौती है, यह जेल डीजीपी कॉन्फ्रेंस में चर्चा का मुख्य मुद्दा रहेगा।


कुछ प्रदेशों ने इस दिशा में काम किया है, उनसे इसे साझा किया जाएगा। इसके अलावा दूसरा मुद्दा खुली जेल का है। अभी तक देश में 63 खुली जेल बन चुकी हैं, इनमें लगातार इजाफा हो रहा है। उनका किस तरह से विकास किया जाए, इसे लेकर भी बैठक में चर्चा होगी। इससे पहले जम्मू-कश्मीर में देशभर के जेल प्रमुखों की बैठक में इनमें से कुछ मसलों पर चर्चा हुई है, लेकिन उन्हें मूर्तरूप में लाना बाकी है।

कॉन्फ्रेंस में उठ सकते हैं यह बिंदु

  • जेल महकमे की बड़ी चुनौती अंडर ट्रायल बंदी हैं। इनके लंबित प्रकरणों को निपटाने में जेल विभाग के अलावा पुलिस, न्याय और स्वास्थ विभाग की भी भूमिका रहती है। इन सभी विभाग की अंडर ट्रायल मैनेजमेंट को लेंकर संयुक्त ट्रेनिंग होना चाहिए।
  • जेल में बंदियों की संख्या लगातार बढ़ी है, लेकिन उनकी निगरानी करने वाला स्टाफ कम हो रहा है। लगभग हर प्रदेश के जेल विभाग को इस समस्या से जूझना पड़ रहा है, इसलिए जेल विभाग में सभी स्तर के पदों में इजाफा और भर्ती पर भी चर्चा होगी।
  • अंडर ट्रायल बंदियों को जेल से कोर्ट पेशी ले जाना चुनौती भरा काम है। सभी जेलों को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए कोर्ट से जोड़ा जाए, इससे बंदियों खास कर अंडर ट्रॉयल को अदालत ले जाने में होने वाले पैसे और समय के खर्च से बचा सकता है।
  • इसके अलावा जेलों की सुरक्षा, आधुनिकीकरण, जेल में बंदियों का डाटा सहित अन्य मुद्दों पर कॉन्फ्रेंस में चर्चा होगी।

जेल विभाग के मुताबिक देशभर की जेल और बंदियों के आंकड़े

कितनी जेल कुल बंदी
सेंट्रल जेल-134 159,158
जिला जेल-379 137, 972
उप जेल-741 46, 358
महिला जेल-18 4,748
खुली जेल-63 5,370
वोस्र्टल जेल-20 1,830
विशेष जेल-43 10,915
अन्य जेल-03 420

प्रदेश में जेल : सेंट्रल जेल इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, रीवा, सतना, उज्जैन, सागर, नरसिंहपुर, बड़वानी, होशंगाबाद, जबलपुर।

जनवरी के दूसरे सप्ताह में बैठक की उम्मीद
देश के सभी जेल प्रमुखों की बैठक भोपाल में होगी। संभवत: मीटिंग जनवरी के दूसरे सप्ताह में होगी, बस उसकी तारीख तय करना बाकी है। इसमें देशभर से आने वाले जेल प्रमुख जेल और बंदियों के विकास, उन्हें मुख्यधारा से जोडऩे सहित कई विषयों पर विचार साझा करेंगे।
गाजीराम मीणा, एडीजीपी जेल

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