ब्रीडिंग करने देश की सबसे साफ चम्बल नदी में आती है 'इंडियन स्किमरÓ

मार्च से मई तक होता है ब्रीडिंग पीरियड

GWALIOR

चिडिय़ों का चहचहाना और आसपास बसेरा बनाना कम होता जा रहा है। अब आसमान पर उड़ते परिंदों को नजदीक से देखना और उनको पहचानना मुश्किल हो रहा है। आमतौर पर हम इनसे अनजान ही रहते हैं। ग्वालियर के आसपास रहने वाले पक्षियों और अलग-अलग मौसम में आने वाले कुछ प्रवासी पक्षियों को आपसे रूबरू कराने का प्रयास पत्रिका कर रहा है। इस प्रयास को सफल बना रहे हैं अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त बर्ड वॉचर संजय दत्त शर्मा। वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी को कॅरियर बनाने वाले शर्मा के कैमरे से ली गई 'इंडियन स्किमरÓ की तस्वीर आज प्रकाशित की जा रही है। हमारे इस प्रयास में आप न केवल इन पक्षियों की खूबसूरत तस्वीर देख सकेंगे, बल्कि उनके नाम और विशेषताओं को भी जान सकेंगे। साथ ही शर्मा बताएंगे कि एक तस्वीर को लेने के लिए कितना धैर्य रखना होता है और किस तरह के प्रयासों के बाद पक्षियों की बेहतरीन तस्वीर को कैमरे के फ्रेम में उतारा जाता है।


मार्च से मई तक होता है ब्रीडिंग पीरियड
'इंडियन स्किमरÓ देश के चम्बल रिवर, मुरैना और धौलपुर में नजर आती है। यह चम्बल नदी में नवंबर से मई तक नजर आती है। जून आते ही यह अपना ठिकाना बदल देती है। इसका ब्रीडिंग पीरियड मार्च से मई तक होता है। यह एक साथ 35 से 40 पेयर रहते हैं। इस पक्षी के ऊपर की चोंच छोटी और नीचे की लंबी होती है। इसकी वजह से यह उड़ते हुए नदी में आती है और नीचे वाली चोंच से मछली पकड़कर ले जाती है। ये हमेशा फ्रेश वाटर में ब्रीडिंग करती है। यही कारण है कि यह चम्बल नदी आती है। क्योंकि चम्बल नदी देशभर की सभी नदियों में से सबसे साफ है।

अवैध उत्खनन से कम हो रहे 'इंडियन स्किमरÓ

इस पक्षी का बसेरा चम्बल नदी के आइलैंड पर है, लेकिन वर्तमान समय में इस पर संकट देखा जा रहा है। इसका कारण अवैध उत्खनन है। यही कारण है कि हर साल इनकी संख्या कम होती जा रही है। अब यह सिर्फ एक ग्रुप ही नजर आता है, जबकि पहले तीन से चार ग्रुप ग्वालियर चम्बल में देखने को मिल जाते थे।

Mahesh Gupta
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