पर्यावरण बचाने के लिए पौधरोपण करने लोगों को कर रहे प्रेरित

शहर हो या फिर हमारा देश लगातार पर्यावरण असंतुलन के कारण कई तरह की समस्याएं हमारे सामने उत्पन्न हो रही हैं। जिसमें सबसे बड़ी समस्या है लगातार तापमान का बढ़ना और अल्प बारिश। बीते दो दशक की बात करें तो औसत तापमान काफी बढ़ गया है। पर्यावरण बचाने शहर को हरा भरा करने की कोशिश में जुटे हैं दिनेश शर्मा।

ग्वालियर. शहर हो या फिर हमारा देश लगातार पर्यावरण असंतुलन के कारण कई तरह की समस्याएं हमारे सामने उत्पन्न हो रही हैं। जिसमें सबसे बड़ी समस्या है लगातार तापमान का बढ़ना और अल्प बारिश। बीते दो दशक की बात करें तो औसत तापमान काफी बढ़ गया है। शहर की ही बात करें तो गमिर्यों में जहां अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहता था। वहीं अब 48 डिग्री सेल्सियस के भी पार पहुंच जाता है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण लगातार पेड़ों की संख्या में हो रही कमी है। पर्यावरण बचाने शहर को हरा भरा करने की कोशिश में जुटे हैं दिनेश शर्मा। वह शहर ही नहीं बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी पौधरोपण करते हैं। पेशे से शिक्षक दिनेश शर्मा कॉलेज में गांव से पढ़ाई के लिए 1998 में शहर आए थे। उस समय के हालातों के बारे में वह कहते हैं उस समय सड़कों के दोनों ओर हरे भरे पेड़ लहलहाते थे और शहर में आबादी बहुत कम थी। चारों ओर जंगल ही जंगल दिखाई पड़ता था, लेकिन अब हरियाली की जगह कॉन्क्रीट के जंगलों ने ले लिया है। चारों तरफ सिर्फ बिल्डिंग ही बिल्डिंग दिखाई देती है। दिनेश के अनुसार दो दशक पहले बारिश भी बहुत होती थी, लेकिन इसके बाद से पर्यावरण में असंतुलन होता चला गया और स्थिति बिगड़ती चली गईं। अगर आगे और स्थिति न बिगड़े तो इसके लिए जरूरी है कि अधिक से अधिक पेड़ लगाए जाएं। यहीं से उन्होंने ठान लिया कि पेड़ लगाएंगे।

बिना किसी की मदद के करते हैं पौधरोपण

दिनेश ट्यूशन पढ़ाकर अपना खर्च चलाते हैं। वह पौधरोपण में किसी प्रकार से किसी की सहायता नहीं लेते। वह 3 सालों से लगातार पौधरोपण कर रहे हैं। इसके लिए वह ऐसे स्थानों का चयन करते हैं जहां पानी की व्यवस्था हो या फिर पानी का प्राकृतिक स्त्रोत हो। अभियान के दौरान वह लोगों को पौधरोपण के लिए भी प्रेरित करते हैं। इसके साथ ही कोचिंग पर आने वाले स्टूडेंट्स को भी वह पर्यावरण के महत्व के बारे में बताते हैं। इसके अलावा वह बच्चों को पौधे भी गिफ्ट करते हैं और उन्हें पौधे रोपने के साथ ही उसकी पूरी मॉनिटरिंग करने की जिम्मेदारी भी वह बच्चों को देते हैं।

Harish kushwah Desk
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