अवैध नियुक्ति को न्यायालयीन आदेश से वैधानिकता प्रदान करना उचित नहीं

निगम की सेवा से हटाए कर्मचारी पिछला वेतन पाने के पात्र नहीं

ग्वालियर. श्रम न्यायालय के न्यायाधीश केसी यादव ने निगम के हटाए गए कर्मचारी जयदीप शर्मा के मामले में आदेश दिया है अवैध नियुक्ति के कारण सेवा से हटाया गया कर्मचारी पिछला वेतन पाने का पात्र नहीं होगा। न्यायालय ने कहा कि ऐसे कर्मचारी को फिर से सेवा में भी नहीं लिया जा सकता है।
न्यायाधीश केसी यादव ने अपने आदेश में कहा कि दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी की अवैध छंटनी पर सहायता किस स्थिति में दी जाए इस पर व्यवस्था है, लेकिन इस मामले में प्रार्थी ने वैध नियुक्ति का कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया है। इसलिए वह न्याय व्यवस्था के प्रकाश में वह पुर्नस्थापना तथा पिछला वेतन पाने का पात्र नहीं है। कोर्ट ने कहा कि कर्मचारी का नियुक्ति आदेश प्रमाणित व नियुक्ति वैध स्थापित न होने से उसकी पुर्नस्थापना के लिए नियुक्ति की नवीन प्रक्रिया निर्मित की जाना उचित नहीं है। अवैध नियुक्ति के कर्मचारी की सेवा समाप्ति होने पर उसकी सेवा में फिर से पुर्नस्थापना के आदेश को न्यायालयीन आदेश से वैधानिकता प्रदान करना उचित नहीं है। अवैध तरीके से नियुक्ति पाने वाला एवं अवैध तरीके से नियुक्ति देने वाला निरंतर इस प्रक्रिया को अपनाने के लिए प्रोत्साहित होंगे। इस मामले में निगम की ओर से एडवोकेट अशोक मेहता ने पैरवी की।
अधिकारी जानबूझकर अवैध नियुक्ति कर सेवा समाप्ति की अवैध कार्रवाई करेंगे एवं न्यायालय में भी उचित पक्ष नहीं रखेंगे। दोनों स्थिति में न्यायालयीन प्रक्रिया आदेश द्वारा अवैध कार्य को वैधानिकता प्रदान करना उचित नहीं है। नियोक्ता को अवैधानिक कार्य, अवैध छंटनी के लिए कर्मचारी को उसकी सेवा अवधि के लिए 50 हजार रुपए क्षतिपूर्ति भुगतान का आदेश उचित सहायता है। कोर्ट ने कर्मचारी की सेवा समाप्ति को अवैध छंटनी माना है वहीं उसे फिर से सेवा लिए जाने का पात्र भी नहीं माना है। इसके अलावा उसे क्षतिपूर्ति के रूप में 50 हजार रुपए प्रदान किए जाएं।

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राजेंद्र ठाकुर Desk
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