scriptITM students gave a presentation in AIR as RJ | आइटीएम के स्टूडेंट्स ने आकाशवाणी में बतौर आरजे दिया प्रजेंटेशन | Patrika News

आइटीएम के स्टूडेंट्स ने आकाशवाणी में बतौर आरजे दिया प्रजेंटेशन

ऑडिशन के बाद सिलेक्शन

ग्वालियर

Published: December 27, 2021 11:47:08 pm

ग्वालियर.
ऑडिशन के बाद सिलेक्शन

आइटीएम यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स अमीषा शर्मा और अक्षत कश्यप ने आकाशवाणी ग्वािलयर के प्रोग्राम में बतौर आरजे प्रजेंटेशन दिया। आकाशवाणी, ने आजादी अमृत महोत्सव के अंतर्गत ‘आरजे हंट’ किया था, जिसके लिए वे आइटीएम यूनिवर्सिटी में भी एक बेहतर आरजे की खोज के लिए पहुंचे। यहां कई डिपार्टमेंट के स्टूडेंट्स ने ऑडिशन दिया। इसके लिए उन्हें तीन से पांच मिनट तक किसी एक टॉपिक पर अपने विचार प्रस्तुत करने थे। सिलेक्शन तीन प्रमुख बिंदुओं पर किया गया, टॉपिक, प्रजेंटेशन और प्रोनानसेशन। स्टूडेंट्स ने मेरे सपनों का भारत, कल की नारी, स्किल इंडिया, मेरा रोल मॉडल, भारतीय मूल्य और संस्कृति जैसे टॉपिक पर प्रजेंटेशन दिया। इस दौरान आकाषवाणी के केंद्राध्यक्ष एवं कार्यक्रम प्रमुख सोहन सिंह, इंजीनियरिंग प्रमुख अरुण कुमार पांडेय, प्रोग्रामर तूलिका शर्मा, अनिल शर्मा, आइटीएम से जयंत सिंह तोमर, चंचल मेघानी मौजूद रहे।
आइटीएम के स्टूडेंट्स ने आकाशवाणी में बतौर आरजे दिया प्रजेंटेशन
आइटीएम के स्टूडेंट्स ने आकाशवाणी में बतौर आरजे दिया प्रजेंटेशन
कांफिडेंस के साथ किया आकाशवाणी में शो
स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन के स्टूडेंट्स अमीषा शर्मा और अक्षत कश्यप का सिलेक्शन आर जे हंट में किया गया। जिन्हें आकाशवाणी में प्रोग्राम रिकार्ड करने का मौका मिला। आइटीएम के इन स्टूडेंट्स ने कई टॉपिक्स पर फोकस करते हुए प्रोग्राम रिकार्ड किया। जिसमें उन्होंने वुमन एम्पावरमेंट, स्किल इंडिया जैसे टॉपिक्स को अपनी प्रोग्राम स्क्रिप्ट में बतौर आरजे शामिल किया। इसे आकाशवाणी में शाम को ऑन एयर किया गया।
स्टूडेंट्स ने प्रजेंटेशन के दौरान कहा जानते हो अक्षत भारत में नए युग की नारी अब कितनी बदली है? मैं कुछ इसे अपने अंदाज में सुनाती हूं, सुनो-इस बार स्त्रियां अपनी गाथा खुद लिखेगी, जहां चीरहरण होने पर वह, भरी सभा में प्रार्थना नहीं करेगी, नहीं मागेंगी देवताओं से लज्जा की भीख, वह टूटती-बिखरती खुद खड़ी होगी, उसके भीतर एक आग छुपी है साधो। वह नई स्त्री होगी। नई स्त्री या नए युग की नारी कुछ और नहीं बल्कि वह उन पुरातन परंपराओं का प्रतिकार है जिसने उसे वर्षों तक उपेक्षा के हाशिये पर किनारे रखा। नई स्त्री हर उन बेडिय़ों को तोडऩे का साहस रखती है, जिसने उसकी शारीरिक-मानसिक स्वंछदता पर बंधन आरोपित किए।

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