पत्रिका EXCLUSIVE : दल-बदल के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया का पहला साक्षात्कार

पत्रिका का सवाल: क्या आप सीएम पद के दावेदार हैं?
सिंधिया का जवाब: मेरी कोई आशा-अभिलाषा नहीं

By: Shailendra Sharma

Published: 28 Oct 2020, 07:16 PM IST

नितिन त्रिपाठी

ग्वालियर . मध्यप्रदेश को उपचुनाव की स्थिति तक पहुंचाने में सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की क्या भूमिका रही, यह बात किसी से छिपी नहीं है। यही कारण है कि कांग्रेस के सीधे निशाने पर हैं वो। उन्हें ऐसे-ऐसे संबोधन दिए जा रहे हैं, जिनसे कोई भी विचलित हो सकता है। लेकिन सिंधिया से मिलकर लगा कि उन्हें इन बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता। सुबह 10.30 बजे ग्वालियर से चार्टर्ड प्लेन में उनके साथ हम भोपाल के लिए रवाना हुए। उनसे तमाम मुददों पर चर्चा हुई। उन्होंने भी चिरपरिचित अंदाज में जवाब दिए। पढि़ए बातचीत के अंश...

सवाल- आप इस चुनाव के बाद खुद को कहां देखते हैं। आपकी राजनीतिक महत्वकांक्षाएं क्या हैं ?
जवाब- बीस साल से जनसेवा कर रहा हूं। मैं अपनेआप को जनसेवक के रूप में देखना चाहता हूं। मेरी खोज जनता के दिल में स्थान बनाने की है, मैं नेमप्लेट बनना नहीं चाहता। मेरी विचारधारा और कार्यप्रणाली में भी यही है।

सवाल- कांग्रेसी विधायक दूसरी पार्टी में आ रहे हैं, इसके पीछे क्या कारण हो सकता है ?
जवाब- 70 साल के इतिहास में मैं नहीं मानता कि कोई भी दल ऐसा होगा, जो 15 साल बाद सत्ता में आया होगा और 15 महीने में ही इतने विधायकों का विश्वास खो दिया होगा। 26 विधायक यानी 30 प्रतिशत विधायकों का छोड़ जाना क्या कहलाएगा। कमलनाथ और दिग्विजय सिंह को सोचना चाहिए कि वे विधायकों को संभाल नहीं पाए, उनका विश्वास नहीं जीत पाए। इसमें कमी विधायकों की है या फिर उनकी। वे विधायकों को ठीक से नहीं रख पा रहे। इसके पीछे का कारण यह है कि इन्होंने कभी जनता, कार्यकर्ता और प्रदेश के विकास के बारे में नहीं सोचा। जब ये छोडकऱ चले गए तब आपको वोट के बारे में सोचना पड़ रहा है।

सवाल- अब चुनाव की दिशा क्या है, आप क्या मानते हैं ?
जवाब- जनता वर्सेज भ्रष्टाचार और वादाखिलाफी, इन दोनों (कमलनाथ और दिग्विजय सिंह का नाम नहीं लिया) गद्दारों की। वैसे मैं इस शब्द का इस्तेमाल नहीं करता हूं। लेकिन उन्होंने बात निकाली है तो कह रहा हूं।

सवाल- आपका गुस्सा क्यों था और किससे था ?
जवाब- कांग्रेस की सरकार बनी थी जनता की भलाई करने के लिए, खुद की भलाई के लिए नहीं। 15 महीने तक वल्लभ भवन में क्या खेल चल रहा था, मुझे बताने की जरूरत नहीं है।

सवाल- आप सीएम पद के दावेदार हैं या और कुछ बड़ा सोच रखा है ?
जवाब- मेरी कोई आशा, अभिलाषा नहीं है। ऐसा होता तो मैं पीसीसी की लड़ाई में फंस जाता। आप सब जानते हैं कि मैंने सहज तरीके से पार्टी का निर्णय मान लिया था। मैं केंद्र सरकार में मंत्री रहा, मैंने कभी लाल बत्ती नहीं लगाई। वैसे जो भाग्य में लिखा है उसे कोई मिटा नहींं सकता और जो नहीं लिखा, वो कोई लिख नहीं सकता।

सवाल- कमलनाथ और दिग्विजय सिंह से गुस्सा था तो कांग्रेस छोडऩे का निर्णय क्यों ?
जवाब- हर बार जनता की आवाज मैं उठा रहा था और हर बार मुझसे यही कहा जा रहा था कि सडक़ पर उतर जाओ। ऐसे में मेरे पास क्या चारा रह गया था।

सवाल- चुनाव की शुरुआत सिंधिया वर्सेज कमलनाथ थी, अब यह शिवराज वर्सेस कमलनाथ हो गई है ?
जवाब- देखिए, यह चुनाव न तो सिंधिया वर्सेज कमलनाथ है और न ही शिवराज वर्सेज कमलनाथ। यह चुनाव जनता वर्सेज कमलनाथ है, दिग्विजय सिंह है। हम लोग तो सेवक के रूप में काम कर रहे हैं, चाहे मैं हूं या शिवराज हों। हम तो पहले भी सेवा ही कर रहे थे और अब भी कर रहे हैं।

जीएंगे तो लड़ेगे...सिंधिया परिवार का डीएनए: इतिहास पढ़े कांग्रेसी
राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा, भाजपा पुरानी पार्टी है। इसे मेरी दादी ने स्थापित किया है। पिताजी ने जनसंघ से जनसेवा शुरू की। मेरे लिए यह नई पार्टी नहीं है। भाजपा मेरा परिवार है। इससे रिश्ता बनाना मेरी जिम्मेदारी है। इसमें समय जरूर लगेगा, पर रिश्ता बनाना होगा। मैं एक-एक कार्यकर्ता से घुल मिल रहा हूं। मंडलों की बैठकों में शामिल हो रहा हूं।

सवाल- रानी लक्ष्मीबाई की शहादत और सिंधिया परिवार की भूमिका को लेकर सवाल उठाए जाते हैं, आपकी तरफ से कभी जवाब नहीं आया?
जवाब- आरोप लगाने वाले इतिहास जाकर पढ़ लें। सिंधिया परिवार के पूर्वजों ने अंग्रेजों के खिलाफ अहमदशाह अब्दाली से लड़ाई लड़ी है। दत्ताजी महाराज को तब मारा गया था, नजीबुल्लाह द्वारा। उनसे सिर काटने के पहले पूछा गया और लड़ोगे तो दत्ताजी राव सिंधिया ने कहा, जीएंगे तो लड़ेगे। यह सिंधिया परिवार का डीएनए है। इतिहास को तोड़-मरोडक़र पेश करना राजनेताओं की आदत है। वैसे जो कहना है कहें। मेरा चरित्र और मेरे परिवार का चरित्र देश जानता है। उसका सर्टिफिकेट कांग्रेसियों से लेने की जरूरत नहीं है।

सवाल- क्या भाजपा में आने के बाद आपके विचारों में बदलाव आया है ?
जवाब- भाजपा में आने से मेरे विचार नहीं बदले हैं। अनुच्छेद-370 को मैंने पहले भी सही बताया था। मैं राम मंदिर निर्माण को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का पक्षधर था और यह मैंने कांग्रेस में बैठकर कहा था।

सवाल- आप सक्षम थे, फिर अपनी पार्टी क्यों नहीं बनाई, भाजपा ही क्यों?
जवाब- मुझे विश्वास है नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में। मुझे विश्वास है नड्डा और अमित शाह में। इन तीनों शख्सियतों के आधार पर हम भारत को विश्व स्तर पर ले जाएंगे। यह मेरी सोच है जो सही है।

सवाल- उपचुनाव के लिए 107 सभाएं कर चुके सिंधिया अब दो दिन मालवा के दौरे पर रहेंगे।
जवाब- अब सभाएं कम करेंगे और चुनाव प्रबंधन पर ध्यान देंगे। मतदान का समय नजदीक है, इसलिए टीम मैनेजमेंट भी जरूरी है।

सवाल- पहले भाजपा ने आपके परिवार को राजनीतिक रूप से घेरने के लिए गद्दार शब्द का इस्तेमाल किया था, अब कांग्रेस इसी शब्द से हमला बोल रही है ?
जवाब- स्वागत है उनका, 30 साल मेरे पूज्य पिता ने कांग्रेस की सेवा की। 20 साल मैंने सेवा की, तब इनका मुंह नहीं खुला। असली गद्दार कौन है, यह जनता बखूबी जानती है। यह हमें किसी को बताने की जरूरत नहीं है।

Shailendra Sharma
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