शौर्य, समर्पण और साहस का प्रतीक है कारगिल युद्ध

शौर्य, समर्पण और साहस का प्रतीक है कारगिल युद्ध
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Harish kushwah | Publish: Jul, 26 2019 07:20:00 PM (IST) Gwalior, Gwalior, Madhya Pradesh, India

कारगिल युद्ध को ऑपरेशन विजय के नाम से भी जाना जाता है। भारत और पाकिस्तान के बीच सन् 1999 में जम्मू और कश्मीर के कारगिल में सशस्त्र संघर्ष हुआ। 28 जुलाई को भारत ने दुश्मनों को छक्के छुड़ाते हुए ऐतिहासिक विजय हासिल की थी।

ग्वालियर. कारगिल युद्ध को ऑपरेशन विजय के नाम से भी जाना जाता है। भारत और पाकिस्तान के बीच सन् 1999 में जम्मू और कश्मीर के कारगिल में सशस्त्र संघर्ष हुआ। 28 जुलाई को भारत ने दुश्मनों को छक्के छुड़ाते हुए ऐतिहासिक विजय हासिल की थी। भारतीय सेना के साहस, शौर्य एवं समर्पण के प्रतीक इस दिन को कारगिल विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह जानकारी लेफ्टिनेंट कर्नल एसके सोनी ने वुमंस ट्रेनीज को संबोधित करते हुए कही। ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (ओटीए) में कारगिल विजय दिवस के अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, जिसके तहत गुरुवार को यह आयोजन हुआ।

1300 से अधिक घायल हुए थे जवान

कर्नल ने बताया कि लगभग करीब दो माह तक चला कारगिल युद्ध भारतीय सेना के साहस और जांबाजी का उदाहरण है। जिस पर हर एक देशवासी को गर्व करना चाहिए। 18 हजार वर्ग फीट की ऊंचाई पर लड़ी गई इस संघर्ष में देश ने 500 से अधिक जवानों को खोया था और 1300 से अधिक जवान घायल हुए थे। उनके बलिदान को हमें कभी नहीं भूलना चाहिए।

डॉक्युमेंट्री फिल्म में दिखी विजय गाथा

इस अवसर पर कारगिल युद्ध पर बनी डॉक्युमेंट्री भी ट्रेनीज को दिखाई गई, ताकि वे अपने निदेशालयों में जाकर कैडेट्स को कारगिल विजय दिवस के बारे में बता सकें। ओटीए में यह आयोजन 27 जुलाई तक आयोजित किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत ट्रेनीज को कारगिल युद्ध से जुड़ी पूरी जानकारी दी जाएगी।

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