जानें... क्या कमी है करोड़ों रुपए से बने स्वीमिंग पुल में

जीवाजी विश्वविद्यालय में खिलाडिय़ों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का तैराकी का प्रशिक्षण देने और प्रतियोगिताएं कराने के लिए बन रहे स्वीमिंग पूल का निर्माण लगभग पूरा हो गया है लेकिन तकनीकी तौर पर इस स्वीमिंग पुल में कई खामियां हैं।

ग्वालियर. जीवाजी विश्वविद्यालय में खिलाडिय़ों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का तैराकी का प्रशिक्षण देने और प्रतियोगिताएं कराने के लिए बन रहे स्वीमिंग पूल का निर्माण लगभग पूरा हो गया है। 4 करोड़ 83 लाख 89 हजार रुपए की लागत से बने इस पूल की लंबाई-चौड़ाई में तकनीकी खामियां सामने आने के बाद करीब 43 लाख रुपए खर्च किए जा रहे हैं। इसके बाद भी यह तय नहीं है कि पूल की गुणवत्ता बेहतर हो सकेगी।
विवि में अध्ययनरत खिलाडिय़ों को तैराकी प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने के लिए चार साल पहले स्वीमिंग पूल के निर्माण की नींव रखी गई थी। पीआइयू के माध्यम से हो रहे निर्माण की तकनीकी सलाह के लिए पूल के सलाहकार के रूप में एलएनयूपीई से सेवानिवृत प्रो.बीके डबास को नियुक्त किया गया था। अब निर्माण लगभग पूरा हो गया है, लेकिन तकनीकी सलाहकार को सबसे बाद में पूछा गया। इसके बाद निरीक्षण हुआ तो पहली ही नजर में लंबाई-चौड़ाई में कमी नजर आई। अब लेजर डिस्टेंस मीटर से नाप होने के बाद सही माप के हिसाब से पूल बनाने व अन्य कार्यों में करीब 43 लाख रुपए और खर्च होने की संभावना है।

पहले खेल मैदान में खुदवाए गए थे गड्ढे

विश्वविद्यालय में स्वीमिंग पूल की योजना अमल में आने के बाद निर्माण के लिए सबसे पहले खेल मैदान में ही जगह निर्धारित की गई थी। इस जगह पर करीब 11 लाख रुपए खर्च कर गड्ढे किए गए थे। इसके बाद स्ट्रक्चर आदि में राशि खर्च हुई। बाद में किसी कारण से इस स्थान को बदलकर आइआइटीएम के पीछे का स्थान तय कर दिया गया। इससे खेल मैदान पर खर्च की गई राशि व्यर्थ चली गई।

सिर्फ मनोरंजन का साधन

जेयू के विभागीय सूत्रों का कहना है कि पूल का निर्माण अंतरराष्ट्रीय मानकों के हिसाब से नहीं हुआ है, इसमें तमाम खामियां हैं। इन्हें दूर नहीं किया गया तो इंटरनेशनल कॉम्पटीशन होना अंसभव है।
साथ ही मानक पूरे न होने से यहां खिलाडिय़ों को तैयार करने में असुविधाओं का सामना करना पड़ेगा। खामियों को दूर नहीं किया तो वर्तमान में तैयार हो रहा पूल सिर्फ शहरवासियों के लिए मनोरंजन का माध्यम बनकर रह जाएगा।

यह हैं खामियां

-स्वीमिंग पूल के निर्माण की प्रदेश सरकार और नगर निगम से स्वीकृति नहीं ली गई। पूल बनने के बाद प्रतियोगिताएं कराने से पहले अनुमति अनिवार्य रहेगी।
-पूल की लंबाई 50 मीटर और चौड़ाई 25.40 मीटर होना चाहिए थी। इस मानक का ध्यान नहीं रखा गया है। सही तरीके से माप की जाएगी तो यह कमी सामने आएगी।
-गैलरी में बैठने वालों को पूरी लेन नजर नहीं आएंगी।
-पानी ओवरफ्लो होता है तो साइड गटर लाइन होनी चाहिए, यह नहीं बनाई गई।
-सलाहकार को निर्माण की बारीकियों का निरीक्षण करने के लिए बुलाया जाना था, लेकिन नहीं बुलाया गया।
-खेल विभाग के डायरेक्टर को पूल के निर्माण से दूर रखा गया।

स्वीमिंग पूल का निर्माण कराते समय बुलाया नहीं गया। निर्माण कार्य बंद होने के बाद पूछा गया था, इसके बाद हमने अपनी रिपोर्ट बनाकर भेज दी है।
प्रो. बीके डबास, सलाहकार-स्वीमिंग पूल

-निर्माण शुरू होने के साथ ही हमने अपनी आपत्ति दर्ज करा दी थी। पूल के लिए सही जगह का चयन नहीं किया गया है।
डॉ.राजेन्द्र , विभागाध्यक्ष-खेल विभाग
-पूल के निर्माण की शुरुआत में कुछ तकनीकी गलतियां हुई हैं, जिनके बारे में पीआइयू को बताया था। पूल प्रशिक्षण के लिए बनाया गया है।
डॉ.केशव सिंह गुर्जर, विभागाध्यक्ष-शारीरिक शिक्षा

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राजेश श्रीवास्तव Desk
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