मंदी से उबर रहा जमीन कारोबार, 17 प्रतिशत की हुई वृद्धि, सरकार के खजाने में आए 2 अरब

मंदी से उबर रहा जमीन कारोबार, 17 प्रतिशत की हुई वृद्धि, सरकार के खजाने में आए 2 अरब

Rahul Aditya Rai | Publish: Jan, 14 2019 07:23:22 PM (IST) Gwalior, Gwalior, Madhya Pradesh, India

दिसंबर 2017 की अपेक्षा दिसंबर 2018 में दस्तावेज पंजीयन भले ही कम हुआ हो, लेकिन राजस्व प्राप्ति में विभाग को फायदा हुआ है। साथ ही संपत्तियों के विक्रय में भी लगभग 17 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है

ग्वालियर। दो साल पहले हुई नोटबंदी से गिरा जमीन का कारोबार अब ऊपर उठने लगा है। गाइड लाइन में जमीनों के दाम में अधिकतम 5 से 10 फीसदी तक वृद्धि किए जाने से निवेशक जहां जमीन के व्यवसाय से दूरी बनाए हुए हैं, वहीं रहने के लिए घर खरीदने के इच्छुक लोगों ने पंजीयन विभाग को राहत दी है।

 

इसका असर यह है कि दिसंबर 2017 की अपेक्षा दिसंबर 2018 में दस्तावेज पंजीयन भले ही कम हुआ हो, लेकिन राजस्व प्राप्ति में विभाग को फायदा हुआ है। साथ ही संपत्तियों के विक्रय में भी लगभग 17 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

 

अधिकारियों का मानना है कि पंजीयन विभाग को अप्रैल से दिसंबर 2018 तक 3173 दस्तावेजों के पंजीयन शुल्क से 2 करोड़ 30 लाख 86 हजार 817 रुपए और मुद्रांक शुल्क से 25 करोड़ 80 लाख 94 हजार 281 रुपए की आय हुई है।

 

2018 के अंतिम दो महीनों में वास्तविक खरीदारों की रुचि बढऩे से ग्वालियर वृत-२ में सबसे ज्यादा 1580 दस्तावेज पंजीकृत हुए हैं। दस्तावेज पंजीयन के इस आंकड़े में औसतन 10 से 15 फीसदी तक वृद्धि और होने की संभावना है।

 

इतने दस्तावेजों का पंजीयन
-दिसंबर 2018 में 3173 दस्तावेजों का पंजीयन हुआ है, जबकि दिसंबर 2017 में 3186 दस्तावेज पंजीकृत हुए थे।
-1 अप्रैल 2018 से दिसंबर तक कुल 27,581 दस्तावेजों का पंजीयन हुआ था, जबकि वर्ष 2017 में इस अवधि में 25,902 दस्तावेजों का पंजीयन हुआ था। इस वर्ष 1679 दस्तावेजों की वृद्धि हुई है।

 

यह हुई आय
दिसंबर 2018
-मुद्रांक शुल्क से 25 करोड़ 80 लाख 94 हजार 281 रुपए।
-पंजीयन शुल्क से 2 करोड़ 30 लाख 86 हजार 817 रुपए।

दिसंबर 2017
-मुद्रांक शुल्क से 27 करोड़ 73 लाख 31 हजार 155 रुपए।
-पंजीयन शुल्क से 2 करोड़ 63 लाख 35 हजार 913 रुपए।

 

इतना रहा अंतर
-दिसंबर 2017 में 30 करोड़ 36 लाख 67 हजार 068 रुपए की कुल आय हुई थी, जबकि दिसंबर 2018 में 28 करोड़ 11 लाख 81 हजार 095 रुपए की आय हुई है। 2017 की तुलना में दिसंबर 2018 में आय 7 प्रतिशत कम रही है।

 

यह है अप्रैल से दिसंबर तक का हिसाब
अप्रैल से दिसंबर 2018 तक
-मुद्रांक शुल्क से 2 अरब 35 करोड़ 88 लाख 39 हजार 900 रुपए की आय हुई है।
-पंजीयन शुल्क से 21 करोड़ 44 लाख 4 हजार 244 रुपए की आय हुई है।

अप्रैल से दिसंबर 2017
-मुद्रांक शुल्क से 2 अरब 01 करोड़ 70 लाख 51 हजार 570 रुपए की आय हुई थी।
-पंजीयन शुल्क से 18 करोड़ 77 लाख 15 हजार 489 रुपए की आय हुई थी।
-अप्रैल से दिसंबर 2017 तक कुल आय 2 अरब 20 करोड़ 47 लाख 67 हजार 068 रुपए की आय हुई थी।
-अप्रैल से दिसंबर 2018 तक कुल आय 2 अरब 57 करोड़ 32 लाख 44 हजार 141 रुपए हुई है। वर्ष 2017 से 17 प्रतिशत ज्यादा आय हुई।

 

उप पंजीयक वार पंजीयन और शुल्क
-ग्वालियर-1 में 1010 दस्तावेजों के मुद्रांक शुल्क से 8 करोड़ 42 लाख 77 हजार 686 रुपए और पंजीयन शुल्क से 88 लाख 81 हजार 875 रुपए सरकारी खजाने में जमा हुए।
-ग्वालियर-2 में 1580 दस्तावेजों के मुद्रांक शुल्क से 12 करोड़ 93 लाख 22 हजार 729 रुपए और पंजीयन शुल्क से 1 करोड़ 22 लाख 97 हजार 286 रुपए सरकारी खजाने में जमा हुए।
-डबरा में 442 दस्तावेजों के मुद्रांक शुल्क से 1 करोड़ 51 लाख 67 हजार 065 रुपए और पंजीयन शुल्क से 15 लाख 64 हजार 108 रुपए सरकारी खजाने में जमा हुए।
-भितरवार में 141 दस्तावेजों के मुद्रांक शुल्क से 29 लाख 17 हजार 138 रुपए और पंजीयन शुल्क से 3 लाख 43 हजार 548 रुपए सरकारी खजाने में जमा हुए।
-इ-स्टांप की बिक्री से 97 लाख 76 हजार 342 रुपए और गोरखी कोषालय में मुद्रांक शुल्क के 67 लाख 72 हजार 365 रुपए जमा हुए हैं।
कोषालय मोतीमहल में 98 लाख 60 हजार 956 रुपए जमा हुए हैं।

 

राजस्व में वृद्धि हो रही है
पिछले वर्ष से दिसंबर तक 1679 दस्तावेजों की वृद्धि हुई है। इसके साथ ही मुद्रांक और पंजीयन से प्राप्त हो रहे राजस्व में भी तुलनात्मक रूप से वृद्धि हो रही है।
डॉ.दिनेश गौतम, जिला पंजीयक

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