जानें... क्यों नहीं मिली लोहा कारोबारियों को 13 साल बाद भी जमीन

शहर में बढ़ते यातायात के दबाव को देखते हुए 2006 में लोहिया बाजार को ग्राम चिरवाई में स्थानांतरित करने की योजना बनाई गई थी।

ग्वालियर. शहर के विकास और स्मार्ट बनाने के लिए किए गई कवायद का जमीनी असर नहीं दिख रहा है। यहां शहर में बढ़ते यातायात के दबाव को देखते हुए 2006 में लोहिया बाजार को ग्राम चिरवाई में स्थानांतरित करने की योजना बनाई गई थी। नवीन लोहामंडी के लिए 272 लोहा कारोबारियों की ओर से जमीन के लिए 1 करोड़ 59 लाख और विकास कार्यों के लिए 2 करोड़ 30 लाख रुपए ग्वालियर विकास प्राधिकरण में जमा कराए गए थे। बाद में इस जमीन पर किसी किसान ने अपना हक जता दिया था और 30 बीघा जमीन में से करीब 14 बीघा जमीन कोर्ट ने उसके हक में कर दी। इसके बाद कई साल बीतने के बाद भी लोहा कारोबारी खाली हाथ हैं। लोहा व्यवसायी संघ के सचिव निर्मल जैन का कहना है कि बाकी बची करीब 16 बीघा अविवादित जमीन भी व्यापारियों को मिल जाए तो कुछ राहत मिल जाएगी।

13 साल बीतने के बाद भी कारोबारियों को जमीन क्यों नहीं मिल सकी है?
हमने 30 बीघा जमीन और विकास कार्यों के लिए करीब चार करोड़ रुपए दिए थे, लेकिन अभी तक हमें जमीन नहीं मिल पाई है। पहले 14 बीघा जमीन किसान की निकलने के कारण नहीं मिली और अब कोर्ट में मामला जाने के बाद भी निर्णय हमारे पक्ष में नहीं हुआ। अब हम इसके लिए डबल बेंच में जाएंगे।
2018 में आपसे पुरानी रकम की जगह नई रकम 8 करोड़ 80 लाख रुपए की मांग की गई थी, क्या ये सही है?
जी हां, ये बिल्कुल सही है। 2018 के मांग पत्र में हमसे 8 करोड़ 80 लाख रुपए की मांग की गई थी, इस पर हम कोर्ट में चले गए थे। कोर्ट में हमारे पक्ष में निर्णय नहीं हुआ। अब फिर से अपर कोर्ट में जाने की तैयारी कर रहे हैं।
इतने वर्ष पहले आपनेे करीब चार करोड़ रुपए जमा किए थे, आपकी इस रकम का क्या हुआ?
उस समय इतनी बड़ी रकम यदि हमने कहीं और लगा दी होती तो उसकी एक बड़ी रकम हमें अब तक मिल गई होती, लेकिन नवीन लोहामंडी की जमीन को लेकर हम आज भी वहीं खड़े हैं, जहां पहले थे।

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राजेश श्रीवास्तव Desk
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