CORONA VIRUS : 16 दिन में दो बार राहत, दोनों बार भीड़ को रोकने के इंतजाम फेल

lockdown in gwalior due to corona virus attack : कम्यूनिकेशन गैप से सोशल प्लेटफार्म पर फैल रहे भ्रम को ही सच मान रहे लोग

By: Gaurav Sen

Updated: 07 Apr 2020, 05:08 PM IST

@ ग्वालियर

कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए जिला दंडाधिकारी कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने लगातार दो बार टोटल लॉक डाउन किया। जनता कफ््र्यू के बाद 16 दिन में दो बार हुए इस कंप्लीट लॉक डाउन में जनता ने सरकारी निर्देशों की लगातार अनदेखी की। तीसरी बार भी तीन दिन के लिए घोषित लॉक डाउन के पहले दिन पुलिस और प्रशासन लोगों के घरों में रखने में नाकाम रहा। स्थिति यह है कि जानकारियों को एकत्रित करने के लिए बनाए गए कमांड सेंटर में भी शाम तक अपडेट नहीं हो पाता। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी बुलेटिन और कमांड सेंटर द्वारा प्रसारित जानकारी दो बार अंतर सामने आ चुका है। इसके बाद भी जानकारी के एकत्रीकरण और लीक होने को रोका नहीं जा सका है।

सोमवार को भी राशन वितरण को लेकर जनप्रतिनिधियों से सत्यापन कराने की अफवाह फैलने के बाद दक्षिण विधायक प्रवीण पाठक के निवास पर लोगों की भीड़ लग गई। सोशल डिस्टेंस के सारे नियम पुलिस की मौजूदगी में ही टूटते रहे। शाम को डीएम को इस बारे में बयान जारी करना पड़ा और अब प्रशासन ने अप्रमाणित जानकारियां फैलाने वालों पर आईटी एक्ट में कार्रवाई करने की तैयारी कर ली है, लेकिन करीब 25 लाख की जनसंख्या वाले जिले में सोशल प्लेटफार्म की निगरानी कैसे करेंगे यह स्पष्ट नहीं है।

दरअसल, कोरोना अलर्ट होने के बाद कमांड सेंटर को सूचना का केन्द्र बनाया गया था। बाद में यहां आम जन को कोरोना के संबंध में जानकारी के लिए हेल्पसेंटर भी बनाया गया और वीडियो कॉल के जरिए परामर्श भी शुरू हुआ। इस सबके बाद भी कमांड सेंटर से अपडेट जानकारियां आम जन के बीच न पहुंचने के कारण अधूरी जानकारियां लीक हो रही हैं, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच कंप्यूनिकेशन गैप को जिम्मेदार बताया जा रहा है। हालांकि, राहत की खबर यह है कि सभी सैंपल्स की रिपोर्ट निगेटिव आई है, और इनमें से अधिकतर सैंपल 45 वर्ष तक की आयु के लोगों के हैं, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है, अगर संदिग्धों में उम्र दराज लोगों की संख्या ज्यादा होती तो स्वास्थ्य विभाग की तैयारी पर सवाल खड़े हो सकते थे।

इन बिंदुओं पर जरूरी है मंथन

  • कोरोना सैंपल की रिपोर्ट निगेटिव आई है, अधिकतर संदिग्ध 45 वर्ष से कम उम्र के हैं, इस उम्र में रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है, लेकिन अगर संदिग्धों में उम्र दराज लोगों की संख्या ज्यादा होती तो स्वास्थ्य विभाग की तैयारी पर सवाल खड़े हो सकते थे।
  • संक्रमण के डर से सब्जी के विक्रय पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया गया है, लेकिन खुले बाजार में चोरी छुपे सब्जी की बिक्री लगातार जारी है। जब प्रतिबंध है तो सब्जियां कहां से आ रही हैं?
  • तमाम भ्रामक जानकारियां अलग-अलग तरीके से लोगों तक पहुंच रही हैं, इनको लेकर जो असमंजस की स्थिति है, उस पर प्रशासनिक रुख स्पष्ट नहीं है।
  • वाट्सएप सहित अन्य सोशल प्लेटफार्म पर लीक हो रहे अपडेट्स से लगातार भ्रम की स्थिति बन रही है, भ्रामक संदेशों को लेकर प्रशासन या पुलिस ने अभी तक प्रभावी कार्रवाई नहीं है।
  • दो बार टोटल लॉक डाउन, दोनों ही बार फेल
    सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने के लिए प्रशासन ने एक अप्रैल को दो दिन के लिए लॉक डाउन किया, इसके बाद तीन अप्रैल को लॉक डाउन किया। जनता कफ्र्यू के बाद शहर को पूरी तरह से बंद करने के लिए यह आदेश जारी किए गए थे। लेकिन सभी जगह इन आदेशों का पालन कराने में पुलिस असफल सिद्ध हुई लोगों ने सरकारी आदेश का जमकर मखौल उड़ाया। इसके बाद जब दो दिन के बाजार खोला गया तो पहले ही दिन लगभग सभी दुकानों पर सरकारी आदेश की धज्जियां उड़ती दिखीं। अब फिर से आठ अप्रैल तक लॉक डाउन घोषित किया गया है, इस बार भी व्यवस्था का पालन कराने वाले लापरवाह हैं और लोग सोशल डिस्टेंस की अनदेखी कर रहे हैं।
  • यह बोले डीएम
    फेसबुक,वाट्सएप, ट्विटर सहित अन्य सोशल प्लेटफार्म पर बिना प्रमाणित जानकारी के कोरोना वायरस संक्रमण सहित अन्य व्यवस्थाओं को लेकर समाचार या सूचना डालना अपराध की श्रेणी में मानकर आईटी एक्ट के अंतर्गत दंडात्मक कार्रवाई होगी। सोमवार को राशन प्राप्त करने के लिए जनप्रतिनिधियों से प्रमाणित कराने की जो सूचना फैली यह पूरी तरह से निराधार है। राशन के लिए किसी को भी सत्यापन कराने की आवश्यकता नहीं है। सभी से अनुरोध है कि अब सोशल मीडिया पर किसी भी तरह की आपत्तिजनक या अप्रमाणित सूचना प्रसारित होने पर न की जाए।इससे अव्यवस्था, भय और अनिश्चितता का माहौल बनता है।
    कौशलेन्द्र विक्रम सिंह, जिला दंडाधिकारी
Gaurav Sen
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