कभी डकैतों की आस्था का केंद्र होता था मां शीतला का दरबार

शेरों का जोड़ा मां के दर्शनों के लिए आता था

ग्वालियर। नवरात्र में दिनों में मां शीतला के दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं का हुजूम लगना शुरू हो जाता है। इन दिनों भी शीतला माता मंदिर दर्शन के लिए हर रोज हजारों की संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। सुबह से लेकर रात तक 24 घंटे मां के दर्शनों के लिए श्रद्धालु वहां पहुंच रहे हैं। मां सीतला का दरबार कभी डकैतों की आस्था का केंद्र हुआ करता था। पुलिस की मौजूदगी के बाद भी नवरात्र के दिनों में डकैत मंदिर पर घंटा जरूर चढ़ाते थे। वहीं कहावत है कि कुछ वर्ष पहले तक शेरों का जोड़़ा भी मां के दर्शनों के लिए आता था, लेकिन जैसे-जैसे यहां लोगों की आवाजाही बड़ती गई, शेरों का आना बंद हो गया।


ऐसे विराजी मां शीतला


मंदिर के आसपास घनघोर जंगल है, लेकिन दर्शन करने के लिए आने वालों को आज तक किसी भी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा है। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार एक समय इस इलाके में अकाल पड़ गया था, पशुओं तक के लिए चारे और पानी की व्यवस्था तक नहीं थी, जिस पर यहां का एक चरवाह अपने पशुओं को लेकर भिण्ड जिले के खरौआ गांव में चला गया जहां पर शीतला माता का एक मंदिर था। चरवाह रोज माता की पूजा करता था और पशुओं को चराता था, लेकिन जब बारिश शुरू हो गई तो वह वापस अपने गांव आने लगा, जिस पर शीतला माता प्रकट हुई, और उस चरवाहे के साथ साथ सातऊ गांव आ गई चरवाहे ने माता को पहाड़ी पर बैठने के लिए कहा और उसी समय से यहां माता का चमत्कार होने लगा, धीरे धीरे लोग मंदिर पर आने लगे और आज इलाके इस मंदिर पर नवरात्र के दौरान लाखों की संख्या में भक्त आकर माता के दर्शन करते हैं। वहीं इस इसके अलावा भी कई माता मंदिर स्थापना को लेकर कई कहानियां सुनने में आती हैं।

राजेंद्र ठाकुर Desk
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