शिवराज के मंत्रिमंडल में ग्वालियर चंबल संभाग से बनाए नौ मंत्री, सिंधिया के प्रति है ऐसी निष्ठा

ग्वालियर चंबल अंचल में 16 सीटों पर होना है उपचुनाव

By: monu sahu

Updated: 02 Jul 2020, 07:22 PM IST

ग्वालियर। शिवराज सिंह चौहान के मंत्रिमंडल में ग्वालियर चंबल संभाग से नौ विधायकों को मंत्रिमंडल में जगह मिलेगी है। ग्वालियर चंबल में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए पांच विधायकों को मंत्री बनाया गया है। ग्वालियर जिले से पूर्व मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, पूर्व मंत्री इमरती देवी और भाजपा विधायक भारत सिंह कुशवाह को शामिल किया गया है। ग्वालियर चंबल अंचल में 16 सीटों पर विधानसभा के उपचुनाव है इसलिए सबसे ज्यादा भिण्ड, मुरैना और ग्वालियर को मंत्रिमंडल में वजन दिया गया है।

प्रद्युम्न सिंह तोमर
ज्योतिरादित्य सिंधिया के बेहद करीबी। सिंधिया ने कांग्रेस से टिकट दिलाया था और जीतने के बाद मंत्री भी बने। सिंधिया के कहने पर कांग्रेस सरकार में मंत्री पद छोड़कर भाजपा में आए। इसलिए उनको मंत्रिमंडल में स्थान दिया।

इमरती देवी
डबरा विधानसभा सीट पर कांग्रेस के टिकट पर लगातार तीन बार जीत चुकी है। इसलिए इस बार कांगे्रस ने मंत्रिमंडल में शामिल किया था। सिंधिया के कहने पर ही कांग्रेस को छोड़कर भाजपा में आई। भाजपा के लिए उपचुनाव में जीतने के लिए इमरती देवी तुरुप का इक्का साबित हो सकती है। इसलिए भाजपा आसानी से इमरती पर दांव खेल सकती है। इसलिए भाजपा के मंत्रिमंडल में मंत्री बनाया है।

भारत सिंह कुशवाह
ग्वालियर जिले से भाजपा के एकमात्र विधायक हैं भारत सिंह कुशवाह। केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर के बेहद करीबी माने जाते है भारत सिंह। पिछली बार तोमर ने भारत सिंह मंत्रिमंडल में शामिल करने के लिए पूरा जोर लगाया था, लेकिन सफल नहीं हो सके थे। इस बार शिवराज सिंह के सामने मुसीबत ये है कि यदि भारत सिंह को मंत्री नहीं बनाते है तो ग्वालियर में भाजपा का एक भी मंत्री नहीं होगा और ग्वालियर जिले में करीब 3 लाख से ज्यादा कुशवाह वोट हैं, यदि ये नाराज हो गया तो उपचुनाव में परेशानी खड़ी हो सकती है। इसलिए भारत सिंह को इस बार मंत्री बनाया।

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डॉ. अरविंद भदौरिया
भिंड जिले से अटेर विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक डॉ अरविंद सिंह नरवरिया मंत्रिमंडल में शामिल गए हैं। भदोरिया न सिर्फ भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में शुमार हो गए हैं बल्कि संगठन में उनकी मजबूत पकड़ होने के अलावा उन्होंने कांग्रेस सरकार गिराने में भी अहम भूमिका निभाई थी। भिंड जिले की 5 विधानसभा सीट में से गोहद और मेहगांव की सीट पर उपचुनाव होना है जबकि लहर में कांग्रेस का विधायक है, भिंड में बसपा विधायक का कब्जा है। ऐसे में भिंड जिले में एकमात्र भाजपा विधायक भदौरिया को मंत्रिमंडल में जगह दी गई।

एंदल सिंह कंषाना
पूर्व विधायक एंदल सिंह कंषाना ने मंत्री न बनाए जाने की वजह से ही कांग्रेस से बगावत की थी। चौथी बार सुमावली से विधायक चुने गए कंषाना पहली बार कांग्रेस शासन में मंत्री रह चुके हैं। 2018 में जब कांग्रेस सरकार में लौटी तो कंषाना मंत्री पद के प्रबल दावेदार थे। लेकिन उनको शामिल नहीं किया। जिससे वे खफा हो गए थे और जौरा उप चुनाव के खामियाजा भुगतने की चेतावनी भी दी थी। इसलिए यह माना जा रहा है, कंषाना मंत्री बनने की शर्त पर भी आए हैं।

यशोधरा राजे सिंधिया
यशोधरा राजे सिंधिया भाजपा सरकार में हर बार केबिनेट में मंत्री बनीं, बल्कि कांग्रेस सरकार को प्रदेश में गिराने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की रिश्ते में बुआ भी हैं। भाजपा में यशोधरा राजे खुद का कद भी बड़ा है, वहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया के भी अब भाजपा में आने से उनका वजन और भी अधिक बढ़ गया। यही वजह है कि इस बार मंत्रिमंडल में जगह दी गई।

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गिर्राज दंडोतिया

दिमनी से विधायक थे। सिंधिया के बेहद ही करीब नेता है। सिंधिया के कहने पर कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए। किसान संघ के अध्यक्ष हैं।

ओपीएस भदौरिया
सिंधिया खेमे से ही है। सिंधिया के कहने पर ही कांग्रेस छोड़ी और भाजपा में आए। मेहगांव सीट से पिछले विधानसभा चुनाव में जीते थे। भिण्ड में भाजपा को मजबूत करने के लिए उनको मंत्रिमंडल में शामिल किया गया।

सुरेश राठखेड़ा
मैं तो ज्योतिरादित्य सिंधिया का सिपाही हूं और जहां वे जाएंगे, मैं उनके साथ जाऊंगा। यदि वे कहेंगे तो मैं बिना कुछ सोचे-समझे इस्तीफा भी दे दूंगा। यह बात पोहरी के पूर्व विधायक सुरेश राठखेड़ा ने कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री कमलनाथ से उस समय कही थी, जब सिंधिया वर्सेस कमलनाथ एपिसोड चल रहा था। सिंधिया के प्रति राठखेड़ा की यह निष्ठा ही बड़ा कारण रही कि उन्हें एक बार व 18 महीने की विधायकी के बदले में राज्यमंत्री का दर्जा मिल गया। जबकि इससे पूर्व पूर्व भाजपा के ही लगातार दो बार विधायक रहे प्रहलाद भारती को यह मौका नहीं मिल पाया, जबकि वे तो शिवराज सिंह चौहान के रिश्तेदार भी हैं। ऐसे में कयास यही लगाए जा रहे हैं कि सिंधिया के प्रति निष्ठा का प्रतिफल ही राठखेड़ा को मिला है और इसी वजह से उन्हे राज्यमंत्री बनने का अवसर मिला।

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