घर पर चल रही थी बारात की तैयारी, चंद मिनट में मातम में बदल गई खुशियां

मौत के बाद घर में पसरा मातम, शादी स्थगित

By: monu sahu

Updated: 29 Jun 2020, 07:26 PM IST

ग्वालियर। जिले की डबरा विधानसभा के गिजौर्रा थाना क्षेत्र के सिली सिलेटा गांव में भात देने आए परिवार के बच्चों की मौत के बाद शादी वाले घर में खुशियों में मातम पसर गया। रात तक जिस घर में नाच गाने व बारात की तैयारियां चल रही थी। वहां सोमवार को हादसे के बाद तैयारियां ठप पड़ गई। शादी स्थगित कर दी गई और शाम को बारात भी नहीं गई। सिली सिलेटा गांव में गंभीर सिंह बाथम के घर पुत्र की शादी थी। रविवार को शाम को मंडल का खाना था। देर रात तक नाच गाने चले और बारात की तैयारियां चल रही थी। मंडल में गंभीर सिंह के ससुराल पक्ष के लोग ग्वालियर के लधेड़ी से भात देने आए थे।

इस परिवार में बालक अमन (12) पुत्र सुरेश बाथम छुटकी उर्फ काजल (18) पुत्र पप्पू मांझी दोनों मौसेरे भाई बहन भी शादी में शामिल होने आए थे। दोनों ने देर रात तक काफी मनोरंजन किया। बालक बारात में जाने के लिए उतावला था जिसके लिए वह भी तैयारी कर रहा था। लेकिन दोनों को क्या पता था कि सुबह वे इस दुनिया से विदा हो जाएंगे। सोमवार की सुबह दोनों जब शादी वाले घर की महिलाएं के उनकी मां और दादी सिंध नदी में नहाने के लिए गई तो अमन और छुटकी भी साथ चले गए। जब सभी महिलाएं नहा रही थी तभी घाट पर नहाने के दौरान अमन और छुटकी पानी में थोड़ा आगे चले गए वहां गहराई ज्यादा थी जिससे दोनों डूब गए।

किनारे पर खड़े कुछ बच्चों ने उन्हें डूबते देख लिया तो चिल्लाकर महिलाओं को बताया कि वे दोनों डूब गए हैं। महिलाओं ने चीख पुकार मचाई तो आवाज सुनकर गांव से लोग दौड़ पड़े। चूंकि ये शादी वाला परिवार मांझी समुदाय से है इसलिए लोग तैरना जानते थे इसलिए कुछ युवा नदी में कूद पड़े और कुछ ही देर में दोनों को निकालकर बाहर ले आए लेकिन इस दौरान देर हो गई और अमन और छुटकी की मौत हो गई। सूचना मिलते ही गिजौर्रा थाना पुलिस मौके पर पहुंच गई और दोनों शवों को डबरा लेकर आई यहां दोनों शवों का पोस्टमार्टम के बाद परिजन को सौंप दिया।

घर पर चल रही थी बारात की तैयारिंया, चंद मिनट में मातम में बदल गई खुशियां

रेत खनन के गड्ढे भी ले रहे जान
सिंध नदी के घाटों पर अवैध रेत खनन चलते बड़े-बड़े गडढे हो गए हैं, जिससे घाट पर नहाने वाले तो पता ही नहीं चलता कि कहां गहराई ज्यादा है। जिसके चलते हादसा हो जाता है। नदी के किनारे के गांवों के लोग नदी पर नहाने जाते हैं जिससे उन्हें हमेशा खतरा बना रहता है। मृतकों के परिजनों का भी यहीं कहना था कि घाट पर रेत निकालने के कारण गहराई ज्यादा है जिसके चलते उनके बच्चे डूब गए।

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