भगवान महावीर जयंती: जैन साध्वी पुष्पाश्री समाज को पढ़ा रहीं शांति-अहिंसा का पाठ,जानिए

भगवान महावीर जयंती: जैन साध्वी पुष्पाश्री समाज को पढ़ा रहीं शांति-अहिंसा का पाठ,जानिए

monu sahu | Publish: Apr, 17 2019 06:19:42 PM (IST) Gwalior, Gwalior, Madhya Pradesh, India

भगवान महावीर जयंती: जैन साध्वी पुष्पाश्री समाज को पढ़ा रहीं शांति-अहिंसा का पाठ,जानिए

ग्वालियर। पति की आकस्मिक मृत्यु से ऐसा सदमा लगा कि सांसारिक जीवन से मोहभंग हो गया,परिणामस्वरूप पारिवारिक जीवन छोडकऱ वैराग्य धारण कर लिया। अब वे बीती आधी सदी से भी ज्यादा समय से समाज को शांति और अहिंसा का पाठ पढ़ा रही हैं। ये कहानी है कि श्योपुर निवासी प्रेमतला जैन की, जो 64 साल पूर्व जैन साध्वी पुष्पाश्री बनकर सकल जैन समाज के लिए आदर्श की प्रतिमूर्ति बन गई हैं। वे श्योपुर जिले के इतिहास में वैराग्य धारण करने वाली एकमात्र जैन साध्वी हैं। वर्ष 1952 में ग्वालियर की पुत्री प्र्रेमलता जैन का विवाह श्योपुर निवासी नेमीचंद जैन के साथ बड़ी धूमधाम से हुआ।

 

विवाह के दौरान प्रेमलता की उम्र 17 साल थी। विवाह के लगभग दो साल बाद 2 जून 1954 को प्रेमलता के जीवन पर पहाड़ सा टूटा, जब उनके पति नेमीचंद बंजारा डैम सीप नदी में नहाने गए, जहां पैर फिसलने से नदी में डूब गए और असामयिक मृत्यु हो गई। बस यहीं से प्रेमलता का सांसारिक मोह छूट गया और उन्होंने वैराग्य धारण करने का निर्णय लिया। यही कारण रहा कि जैन मुनियों के सानिध्य में प्रेमलता ने वर्ष 1955 में जैन साध्वी के रूप में दीक्षा ली और मां पुष्पाश्री बनकर वैराग्य के कठिन मार्ग पर निकल पड़ी।

 

वर्ष 1955 में दीक्षा ग्रहण करने के बाद जैन साध्वी पुष्पाश्री ने श्योपुर भी छोड़ दिया और वर्तमान में गुजरात के पालीताणा में रह रही हैं। हालांकि देश के कई जैन धर्मावलंबियों वाले शहरों में वे चातुर्मास कर चुकी हैं, लेकिन पिछले 6 4 सालों में उन्होंने श्योपुर में एक बार ही चातुर्मास किया है। वर्ष 1978 में चातुर्मास के दौरान वे श्येापुर में रही और यहां के जैन धर्मावलंबियों को शांति का पाठ पढ़ाया।

 

श्योपुर में 200 से 400 साल पुराने जैन मंदिर
यूं तो श्योपुर में जैन समाज के परिवारों की संख्या कम है, लेकिन शहर के आधा दर्जन जैन मंदिरों पर णमोकार मंत्र की ध्वनि नित प्रति गूंजती रहती है। शहर में लगभग चार सैकड़ा की आबादी वाले जैन समाज के पांच मंदिर हैं। ऐतिहासिक किला परिसर में स्थित चार सौ साल पुराने भगवान शांतिनाथ जी के मंदिर के अलावा बोहरा मोहल्ला स्थित पाŸवनाथजी पंचकल्याणम का मंदिर, मुख्य बाजार स्थित भगवान आदिनाथ जी (प्रथम तीर्थकर) का मंदिर, मुख्य बाजार स्थित ही पाŸवनाथ जी का मंदिर और कॉलेज के पीछे संभवनाथजी (13वें तीर्थकर) का मंदिर प्रमुख हैं।

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