साल की दूसरी स्वाइन फ्लू से हुई मौत, दिल्ली में चल रहा था इलाज

स्वाइन फ्लू से पीडि़त समाधिया कॉलोनी निवासी सुरेन्द्र खंडेलवाल की दिल्ली के मेदांता हॉस्पिटल में मौत हो गई। 50 वर्षीय खंडेलवाल को 10 अगस्त को परिवार ह

By: Gaurav Sen

Published: 22 Aug 2017, 10:57 AM IST

ग्वालियर। स्वाइन फ्लू से पीडि़त समाधिया कॉलोनी निवासी सुरेन्द्र खंडेलवाल की दिल्ली के मेदांता हॉस्पिटल में मौत हो गई। 50 वर्षीय खंडेलवाल को 10 अगस्त को परिवार हॉस्पिटल से दिल्ली के लिए रैफर किया गया था। मेदांता हॉस्पिटल में जांच के बाद स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई थी। हालत नाजुक होने के चलते उन्हें वहां वेंटीलेटर पर रखा गया था। सोमवार को इलाज के दौरान खंडेलवाल ने दम तोड़ दिया। खंडेलवाल की मौत की खबर ग्वालियर पहुंचते ही स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया।


वर्ष 2017 में स्वाइन फ्लू से यह दूसरी मौत है। इससे पहले फरवरी में मुरार निवासी मालती सिंघल की मौत हो चुकी है। इसके साथ ही अब तक 14संदिग्ध के सैंपल जांच के लिए डीआरडीई भेजे गए हैं। जिनमें दो की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। शेष

स्वाइन फ्लू मरीज
पिछले नौ साल में इस बीमारी ने 115 लोगों को अपनी चपेट में लिया। जिसमें १२ लोगों की मौत हुई। वर्ष 2015 में तो पांच लोगों की मौत हुई थी। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.एसएस जादौन ने तत्काल स्वाइन फ्लू पीडि़त के घर के आसपास सर्वे करने के निर्देश दिए।

स्वाइन फ्लू से एक की मौत हुई है। जानकारी मिलने के बाद पीडि़त के घर के आसपास सर्वे करने के निर्देश दिए गए हैं। निजी अस्पताल से मरीज की पूरी हिस्ट्री मंगाई जाएगी।
डॉ.एसएस जादौन, सीएमएचओ

 

जेएएच की सेंट्रल पैथोलॉजी में मरीजों ने किया हंगामा
जयारोग्य अस्पताल की ओपीडी से जांच के लिए सेंट्रल पैथोलॉजी पहुंचे मरीजों को अव्यवस्था का शिकार होना पड़ा। ऐसे में मरीज व उनके परिजन ने हंगामा कर दिया।सुरक्षाकर्मी ने मरीजों को शांत करने का प्रयास किया, लेकिन मरीजों ने उसकी एक न सुनी।


अव्यवस्थाओं से नाराज मरीज प्रबंधन को खरी-खोटी सुनाते रहे। कर्मचारियों ने भी मरीजों को समझाने का प्रयास किया। मरीजों का कहना था कि घंटों लाइन में लगने के बाद भी जांच की बारी नहीं आ रही है। प्रबंधन को महिलाओं के लिए एक अलगखिड़की बनाना चाहिए, जिससे वे आसानी से जांच करा सकें। पैथोलॉजी में हंगामे के ख्चलते करीब आधा घंटे काम बंद रहा। चिकित्सकों ने मौके पर पहुंचकर मरीजों को समझाइश दी। इधर कर्मचारियों का कहना था कि व्यवस्था बनाने के लिए एक सुरक्षाकर्मी तैनात है, लेकिन मरीजों की भीड़ को देखते हुए यहां दो गार्ड तैनात किए जाने चाहिए। काफी बहस के बाद मरीजों का गुस्सा शांत हुआ और पैथोलॉजी का काम फिर से शुरू हो सका। उपनगर ग्वालियर से आए नंदकिशोर ने बताया कि सुबह से लाइन में लगने के बाद भी नम्बर नहीं आया। महिलाओं को लाइन में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। उनके लिए अलग लाइन होनी चाहिए।

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