तीन साल में इतने नहीं बने डेथ सर्टिफिकेट जितने बने साढ़े चार महीने में

कोरोना संक्रमण के चलते हुई अधिकतर मौतें, 2020 में मई महीने में बने थे 532 डेथ सर्टिफिकेट, बीते वर्ष 7276, 2019 में 6428 और 2018 में नगर निगम ने बनाए 5896 डेथ सर्टिफिकेट। 25 मई तक निगम में बने डेथ सर्टिफिकेट 2126, महीने के अंत तक ढाई हजार हो सकती है सर्टिफिकेट की संख्या। रोजाना आ रहे हैं एक सैकड़ा से अधिक आवेदन।

By: Hitendra Sharma

Published: 28 May 2021, 02:34 PM IST

ग्वालियर. देश व प्रदेश में मौत का तांडव मचाने के बाद कोरोना संक्रमण का तूफान अब थमता नजर आ रहा है। लेकिन इससे पहले कोरोना संक्रमण शहर सहित अंचल के कई घरों में मातम मचा चुका है। यदि आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो यह आंकड़े काफी हद तक डरावने ही है। हालांकि सरकारी आंकड़े में मई महीने में ही महज निगम की ओर से 2126 और अप्रैल-मई महीने में जेएएच व मुरार अस्पताल द्वारा 855 लोगों को डेथ सर्टिफिकेट बनाए गए हैं। जबकि बीते वर्ष पूरे साल में 7276 लोगों का डेथ सर्टिफिकेट बनाए गए थे। लेकिन इस वर्ष नगर निगम के बर्थ डेथ डिपार्टमेंट में डेथ सर्टिफिकेट बनवाने वालो की सुनामी देखी गई।

निगम अधिकारियों का कहना है कि अब तक के पूरे कार्याकाल में इतने डेथ सर्टिफिकेट कभी नहीं बनाए गए जितने एक मई से लेकर 25 मई तक बना दिए गए है। इतना ही नहीं बीते तीन महीनों में भी जितने डेथ सर्टिफिकेट बने हैं इतने आज तक नहीं बनाए गए है। 25 मई तक जेएएच और मुरार अस्पताल को मिलाकर तीन हजार के करीब डेथ सर्टिफिकेट बनाए जा चुके हैं। जबकि कई आवेदन अभी पेंडिग भी पड़े हुए है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि मई के अंत तक ढाई हजार से अधिक डेथ सर्टिफिकेट बनाए जा सक ते हैं।

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इतिहास में पहली बार बने इतनी संख्या में डेथ सर्टिफिकेट
नगर निगम में डेथ सर्टिफिकेट बनाने के लिए एक दिन में पहली बार एक सैकड़ा से अधिक डेथ सर्टिफिकेट बनाने के लिए आवेदन आए है। यह भी एक तरह से इतिहास है। बाल भवन के मुख्यालय में प्रतिदिन एक सैकड़ा से अधिक डेथ सर्टिफिकेट बनने के आवदेन पहुंच रहे है। जबकि जेएएच और मुरार अस्पताल में भी आधा सैकड़ा के करीब आवेदन आ रहे हैं। ऐसे में आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि कोरोना संक्रमण ने शहर के कितने लोगों की जिंदगी छीन ली है।

मौतों का अंदाजा लगाना काफी मुश्किल
डेथ सर्टिफिकेट को लेकर नगर निगम सीमा क्षेत्र में आने वाले आवेदनों को लेकर अभी यह आंकड़े है लेकिन बीते मार्च,अप्रैल और मई में होने वाली मौतो का सटीक आंकलन करना बेहद ही मुश्किल कार्य है। डेथ सर्टिफिकेट के आंकडों के हिसाब से अंदाजा लगाया जा सकता है कि बीते तीन महीनों में 40 प्रतिशत के करीब मौते घरो अथवा अस्पताल ले जाते वक्त रास्ते में हुई है। यह बात का खुलासा डेथ सर्टिफिकेट के आंकड़े से नजर आ रहा है।

532 मौतें हुई थी बीते साल मई में
कोरोना संक्रमण का कहर बीते साल भी रहा था और नगर निगम सीमा में हुई मौतों का आंकड़ा भी अच्छा खासा रहा था। मई 2020 में जहां 532 लोगों का डेथ सर्टिफिकेट जारी हुआ था। वहीं इस साल मई के 26 दिन में ही दो हजार से अधिक लोगों की मौत का आंकडा पार हो चुका है।

अगले महीने में और बढ़ सकती है संख्या
नगर निगम के सूत्रों ने बताया कि कोरोना संक्रमण के चलते अभी कोरोना कफ्र्यू लगा हुआ है। ऐसे में अभी भी कई लोग कोरोना संक्रमण के चलते घर से बाहर नहीं निकल रहे है। ऐसे में संक्रमण की रफ्तार कम होने और जून महीने में अपने परिजनों व रिश्तेदारों को खो चुके लोग उनका डेथ सर्टिफिकेट बनवाने के लिए निगम में आवेदन करेंगे। ऐसे में निश्चित रूप से जून में यह ग्राफ और अधिक बढ़ सकता है। बीते वर्ष जून महीने में 573 लोगों का डेथ सर्टिफिकेट बनाया गया था जो कि मई से अधिक था।

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रजिस्ट्रार बर्थ व डेथ सर्टिफिकेट विभाग, उपायुक्त नगर निगम, डॉ प्रदीप श्रीवास्तव ने बताया कि कोरोना संक्रमण के चलते नगर निगम में डेथ सर्टिफिकेट बनवाने वालों की संख्या काफी तेजी से बढ़ी है। प्रतिदिन एक सैकड़ा से अधिक आवेदन निगम में आ रहे हैं। आयुक्त के निर्देश पर स्पेशल खिड़की भी लगाई गई है। पहले डेथ सर्टिफि केट 15 दिन में जारी किए जाते थे लेकिन अब 24 घंटे में ही जारी किए जा रहे हैं। साथ ही एप के माध्यम से भी आमजन सर्टिफिकेट बनवाने के लिए पंजीयन करा सकते है।

Hitendra Sharma
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