स्वर्ण रेखा की सफाई अधर में, प्रशासक की नाराजगी के बाद भी नहीं सुधरे हालात

स्वर्ण रेखा में साफ पानी बहाने का दावा तो हर कोई करता है लेकिन यह पूरा नहीं हो सका। करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद हालात नहीं सुधर रहे हैं। साफ पानी तो दूर की बात है गंदगी और कीचड़ तक की सफाई नहीं हो पा रही है। तीन महीने से अधिक समय से जो लाइनें चोक हैं उन्हें अभी तक दुरुस्त नही किया गया है। निगम और ठेकेदार एक दूसरे पर जिम्मेदार डालकर बचने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन जनता इन सबके बीच पिसकर रह गई है।

एक दशक से स्वर्ण रेखा विभागों के लिए बजट ठिकाने लगाने की योजना बनकर रह गई है। २०१० में जल संसाधन विभाग ने करीब ११० करोड़ इस पर खर्च कर दिए इसके बाद भी इसे जीवित करने के नाम पर कई योजनाएं बनाई जा चुकी हैं। स्मार्ट सिटी ने भी ८० करोड़ का प्रोजेक्ट बनाया है जिसमें स्वर्ण रेखा में साफ पानी बहाने की बात कही जा रही है। लेकिन यहां सबसे पहले जो जरूरत है कि स्वर्ण रेखा की सफाई कराई जाए उसको लेकर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। तीन महीने से अधिक समय से फूलबाग के आसपास स्वर्ण रेखा में सीवर और गंदगी जमा है जो कि शहर की सुंदरता पर बट्टा भी लगा रही है लेकिन फिर भी निगम अधिकारी इसको लेकर कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।

स्वच्छता सर्वेक्षण के बाद बंद की सफाईगर निगम ने स्वच्छता सवेक्षण रैंकिंग के लिए शहर में सफाई अभियान चलाया। इस दौरान सर्वे के लिए जो टीम आना थी उससे पहले स्वर्ण रेखा में जोर शोर से सफाई की गई। कई जेसीबी स्वर्ण रेखा में उतार दी गईं लेकिन सर्वे होने के बाद इसे बंद कर दिया गया। वर्तमान में हालात बदतर हो चुके हैं लेकिन निगम सफाई नहीं करा रही है।


प्रशासक आज करेंगे भ्रमण
शहर में अमृत के तहत चल रहे सीवर के कार्यों का निगम प्रशासक एमबी ओझा शनिवार को जायजा लेंगे। इसके साथ ही वह स्वर्ण रेखा का भी निरीक्षण करेंगे। इस दौरान निगम अधिकारी साथ रहेंगे।

Vikash Tripathi
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