अपने बच्चों को संस्कार अवश्य दें

- महलगांव स्थित कैलोदवी मंदिर में रामकथा के पांचवे दिन संत चिन्मयानंद बोले

By: Narendra Kuiya

Published: 03 Jan 2020, 11:38 PM IST

ग्वालियर. अपने बच्चों को संस्कार अवश्य दें। आज हम पैसा कमाने में इतने व्यस्त हो गए हैं कि हमने अपने सारे संस्कार भुला दिए है और अपने बच्चों को संस्कार देना भी भूल गए। उक्त विचार संत चिन्मयानंद ने महलगांव स्थित कैलादेवी माता मंदिर के मैदान पर आयोजित की जा रही रामकथा के पांचवे दिन व्यक्त किए।
भागवत प्रेम परिवार की ओर से आयोजित की जा रही रामकथा में उन्होंने आगे कहा कि पृथ्वी पर भगवान कभी जन्म नहीं लेते भगवान हमेशा प्रकट होते हैं, जैसे दूध में घी छिपा होता है उसे प्रकट किया जाता है। वैसे ही परमात्मा संसार में हर जगह व्याप्त है उसे प्रकट करना पड़ता है और ईश्वर प्रकट होता है। उन्होंने कहा कि धरती पर कौशल्या माता की तरह प्रेम जब होता है परमात्मा को बुलाना नहीं पड़ता वह खुद ही प्रकट हो जाता है। कथा के क्रम को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि भगवान के प्रकट होने के बाद भगवान का नामकरण संस्कार किया गया। हम अपने बच्चों के नाम ऐसे रखें जिसे लेकर ईश्वर या कोई महापुरुष की याद आए। उन्होंने कहा कि बड़े होने पर भगवान का जनेऊ संस्कार किया गया। बापू ने कहा कि पहले के जमाने में मनुष्य के 16 संस्कार होते थे लेकिन दुर्भाग्य है कि आज हम इतने व्यस्त हो गए हैं कि हमारे जीवन में सिर्फ दो ही संस्कार बचे हैं एक तो विवाह और दूसरा अंतिम संस्कार। उन्होंने कहा कि हम भारतीय हैं। भारत संस्कारों की धरा है, हम भारत के संस्कारों को ना छोड़े यह ऋषियों के दिए हुए संस्कार हैं। आज पश्चिम के देशों की शैली इतनी हावी हो गई है कि युवा भाई-बहन अपना पहनावा-संस्कार सब भूल गए। उन्होंने कथा के माध्यम से पाश्चात्य शैली का विरोध किया और कहा कि आजकल जो पहनावा है वह हमारे ऋषियों के दिए हुए संस्कार नहीं है। उन्होंने कहा कि भगवान विद्या अध्ययन करने के लिए अपने गुरु के आश्रम में गए थे। यदि हमें विद्या ग्रहण करनी है तो हमें गुरु के आश्रम पर जाना चाहिए, ना कि गुरु को हम अपने घर बुलाएं। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि पैसे लेकर जो शिक्षक घर पर पढ़ाने आते हैं, यह शिक्षा की सही पद्धति नहीं है। यदि हमें जल चाहिए तो हमें नदी के पास जाना पड़ेगा, नदी हमारे घर नहीं आती उसी प्रकार हमें गुरु के दर पर जाना चाहिए। 4 जनवरी को श्रीराम और जानकी के विवाह उत्सव की कथा होगी।

Narendra Kuiya Reporting
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