प्रदेश का तीसरा नगर निगम हो गया कंगाल, बॉण्ड से जुटाएगा 100 करोड़, हायर करेगी CA company

nagar nigam gwalior faces economic problem : प्रदेश में बॉण्ड जारी करने वाला ग्वालियर तीसरा नगर निगम होगा। इससे पहले भोपाल और इंदौर भी बॉण्ड जारी कर चुके हैं।

By: Gaurav Sen

Published: 08 Mar 2020, 01:39 PM IST

ग्वालियर. खराब वित्तीय स्थिति से जूझ रहा नगर निगम अब बॉण्ड जारी करेगा। इसके जरिए पब्लिक से 100 करोड़ रुपए जुटाए जाएंगे। इस रकम का उपयोग विकास योजनाओं को पूरा करने में किया जाएगा। इसके लिए कंसल्टेंसी फर्म की तलाश शुरू कर दी है। यह पहला मौका है जब नगर निगम को बांड के जरिए पैसा जुटाना पड़ रहा है। प्रदेश में बॉण्ड जारी करने वाला ग्वालियर तीसरा नगर निगम होगा। इससे पहले भोपाल और इंदौर भी बॉण्ड जारी कर चुके हैं।

शासन स्तर पर विभिन्न मदों में कटौती कर दी गई है। इधर, वसूली में भी निगम फिसड्डी साबित हुआ है। ऐसे में निगम पर आर्थिक संकट छा गया है। निगम के पास कर्मचारियों के वेटन के लिए भी पैसा नहीं है। इससे कर्मचारियों में भी असंतोष पनप रहा है। वहीं अमृत और स्मार्ट सिटी जैसी विकास योजनाओं में शासन ने हाथ खींच लिया है। योजनाओं का काम जारी रखने के लिए निगम को अपने पास से पैसा लगाना पड़ रहा है। केन्द्र की इन योजनाओं में प्रदेश सरकार को भी फंड देना होता है लेकिन शासन ने नगर निगम को ही इस फंड की राशि जुटाने के लिए कहा है।

रेटिंग तय होने के बाद जारी होंगे बांड
बॉण्ड जारी करने के लिए सीए कंपनी को हायर किया जा रहा है। इसके लिए टेंडर बुलाए गए हैं। 6 लाख रुपए में यह टेंडर हुए है। इसमें सीए की पूरी टीम रहेगी जो कि पहले भारत सरकार को प्रोजेक्ट का डिमॉन्स्टे्रशन देगी इसके साथ ही रेटिंग जारी कराने में भी मदद करेगी। जब तक बॉण्ड की लिस्टिंग स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध नहीं हो जाता कंपनी पूरी तरह से कार्यभार देखेगी।

6 प्रतिशत पर मिलेगी राशि
नगर निगम बॉण्ड के जरिए 100 करोड़ रुपए जुटाने की योजना है। निगम को यह राशि 6 प्रतिशत ब्याज पर मिलेगी। बॉण्ड लिस्टिंग के बाद तय समयावधि के बाद निगम को यह राशि लौटाना होगी। जो बॉण्ड खरीदेगा उसे निश्चित 6 प्रतिशत की राशि वापस की जाएगी।

इन मदों में नहीं मिला पैसा
शासन ने तीन महीने से चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि जारी नहीं की है। इसके अलावा मुख्यमंत्री अधोसंरचना, पीएमवायके सहित अन्य मदों में भी पैसा नहीं मिला है। इस कारण से सडक़, प्रधानमंत्री आवास सहित अन्य निर्माण कार्य पूरी तरह से ठप हो गए हैं।

निगम डिफाल्टर हुआ तो लौटाएगा राशि
नगर निगम द्वारा जो बांड जारी किया जाएगा उसके लिए तैयारी हो गई हैं। शासन ने भी निगम को बांड जारी करने की अनुमति दे दी है। इसके साथ ही काउंटर गारंटी भी दी है। अगर बांड जारी करने के बाद नगर निगम के पास बांड मेच्योर होने पर पैसा नहीं रहा तो शासन द्वारा यह राशि संबंधित को लौटाई जाएगी।

इन मदों में नहीं मिला फंड

चुंगी क्षतिपूर्ति में 28 फीसदी की कमी की गई है। विशेष निधि की राशि नहीं मिली। वाणिज्यक कर में 15 करोड़ की कटौती। राज्य वित्त आयोग में करीब 4 करोड़ की कटौती। मुख्यमंत्री अधोसंरचना में मिलने वाली 20 प्रतिशत की ग्रांट नहीं मिली। जिससे 80 प्रतिशत की राशि जो कि लोन के रूप में मिलती थी वह भी नहीं मिली।

प्रधानमंत्री आवास योजना
केन्द्र सरकार की योजना है इसमें केन्द्र द्वारा 75 और 25 प्रतिशत की राशि प्रदेश सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जाती है। इसके लिए प्रदेश सरकार ने पैसा देने से मना कर दिया है। जिसके चलते अब पहले जो आवास बन गए हैं उन्हें बेचकर नए आवास बनाए जाएंगे।

अमृत योजना
केन्द्र सरकार की अमृत योजना 750 करोड़ की है। इसमें निगम को 20 प्रतिशत अंश देना है। वर्तमान में निगम को करीब 50 करोड़ रुपए अमृत में जरूरत हैं तभी आगे का प्रोजेक्ट के लिए केन्द्र से पैसा मिलेगा।

नगर निगम बॉण्ड के जरिए 100 करोड़ रुपए जुटाएगा। इसकी तैयारी हो गई है। यह पूरी प्रक्रिया सीए द्वारा की जाएगी इसके लिए टेंडर जारी किए गए हैं।
राजेश श्रीवास्तव, अपर आयुक्त ननि

Gaurav Sen
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