स्वच्छता सर्वेक्षण-2020: अब रैंकिंग जारी होना है तो कर रहे दिखावा, 1500 अंकों पर टिका है पूरा दारोमदार

nagar nigam gwalior swachhta sarveshan 2020 ranking : इसके अलावा वाट्स ऐप पर और फील्ड में जाकर अधिकारी लोगों से गुजारिश कर रहे हैं कि सर्वे टीम आए तो हां में जवाब देना

By: Gaurav Sen

Published: 06 Jan 2020, 11:51 AM IST

ग्वालियर. स्वच्छता सर्वेक्षण-2020 में सफाई के नाम पर पूरे साल खानापूर्ति करते रहे नगर निगम के अधिकारी अब रैंकिंग जारी होना है तो अपनी लाज बचाने के लिए जनता को सर्वे के सवालों के जवाब रटवा रहे हैं। इसके लिए शहर में जगह-जगह होर्डिंग्स लगाए गए हैं, जिन पर सर्वे के सवालों के साथ जवाब भी लिखे हैं। इसके अलावा वाट्स ऐप पर और फील्ड में जाकर अधिकारी लोगों से गुजारिश कर रहे हैं कि सर्वे टीम आए तो हां में जवाब देना।

इसकी जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि निगम स्वच्छता सर्वेक्षण के मापदंड पर फेल हो गया है और ओडीएफ डबल प्लस का दर्जा भी नहीं मिल सका है, इसलिए अब पूरा दारोमदार जनता के फीडबैक के1500 अंकों पर निर्भर है। वहीं अब सफाई में भी तेजी दिखाई दे रही है, अगर यही गंभीरता सालभर दिखाई होती तो शहर रैंकिंग में बहुत बेहतर होता।

सात सवाल और उनकी हकीकत
1. सवाल: क्या आप जानते हैं कि आपका शहर स्वच्छता सर्वेक्षण-2020 में भागीदारी कर रहा है। जवाब हां में देने के मिलेंगे 100 अंक।
स्थिति: निगम ने इसके लिए वार्ड स्तर पर जागरुकता अभियान नहीं चलाया, जिसके कारण अधिकांश लोगों को स्वच्छता सर्वेक्षण की जानकारी नहीं है। अगर टीम ने वास्तविक तौर पर सर्वे किया तो इसमें भी अंक नहीं मिलेंगे।

2. सवाल: आप शहर में अपने आसपास की सफाई को अपने पिछले 6 महीने के अनुभव के आधार पर 200 में से कितने अंक देंगे ?
स्थिति: शहर में वार्ड स्तर पर अभी भी हालात खराब हैं। जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हैं। जिस गति से अभी सफाई करने की कोशिश की जा रही है, वही सालभर होती तो मामला अलग होता। इसमें भी लोग नकारात्मक जवाब ही देंगे।

3. सवाल: आप शहर में सार्वजनिक और व्यावसायिक क्षेत्र की स्वच्छता को अपने पिछले 6 महीने के अनुभव के आधार पर 200 में से कितने अंक देना चाहेंगे।
स्थिति: शहर के शौचालयों की स्थिति खराब है। यही कारण है कि दो बार ओडीएफ डबल प्लस के लिए आवेदन करने के बाद भी शहर को यह दर्जा नहीं मिला। आवेदन से पहले ही शहर के शौचालयों को सुधारा गया था, अब स्थिति फिर वही है।

4 . सवाल: क्या आपसे कचरा संग्राहक द्वारा सूखा-गीला कचरा अलग-अलग देने के लिए कहा जाता है, इसका जवाब हां में देने पर 200 अंक मिलेंगे।
स्थिति: शहर के 66 वार्डों में कचरा संग्रहण के लिए ईको ग्रीन कंपनी की गाडिय़ां पहुंचती हैं, लेकिन यह कभी भी सूखा और गीला कचरा अलग-अलग देने की बात नहीं करते। इस तरह इसमें भी निगम अधिकारी जनता से झूठ बुलवाकर अंक प्राप्त करना चाहते हैं।

5. सवाल: क्या आपके शहर में सड़कों के डिवाइडर पौधे या हरी घास से ढंके हुए हैं, इसका जवाब हां में देने पर 100 अंक मिलेंगे।
स्थिति: शहर के डिवाइडरों की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। एक दो सड़कों को छोड़ दें तो अधिकांश के हालात खराब हैं।

6. सवाल: आप शहर में सार्वजनिक शौचालयों की स्वच्छता को अपने पिछले 6 महीने के अनुभव के आधार पर 200 में से कितने अंक देना चाहेंगे।
स्थिति: शौचालयों और मूत्रालय की स्थिति बहुत खराब है। अधिकांश जगहों पर पानी की भी व्यवस्था नहीं है।

7 -सवाल: क्या आपको शहर के ओडीएफ अर्थात खुले में शौच से मुक्त या जीएफसी अर्थात कचरा मुक्त के स्टेटस के बारे में जानकारी है, हां कहने पर 100 अंक मिलेंगे।
स्थिति: शहर में अभी भी खुले में शौच हो रहा है और शहर कचरा मुक्त भी नहीं हो सका है।

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सीधी बात: संदीप माकिन, निगमायुक्त

सफाई व्यवस्था बेहतर हुई है

सवाल: शहर में होर्डिंग पर सर्वे के सवाल और उनके जवाब क्यों लिखे गए हैं?
जवाब: स्वच्छता सर्वेक्षण के प्रचार-प्रसार के लिए किया गया है।

सवाल: सर्वे के सवालों को जनता को रटाने की जरूरत क्यों पड़ी, पूरे साल गतिविधि क्यों नहीं की गई?
जवाब: हमने वार्ड स्तर पर सर्वे किया था, इसमें हमारे पास कई लोगों के नंबर भी हैं।

सवाल: सफाई को लेकर जो वर्तमान में तेजी दिखाई जा रही है, वह पूरे साल क्यों नहीं दिखाई?
जवाब: हम सफाई अभियान शुरू से ही चला रहे हैं। अब जबकि रैंकिंग के लिए टीम आने वाली है इसलिए और अधिक अलर्ट हैं।

सवाल: आपको क्या लगता है कि शहर वास्तव में साफ हुआ है, और लोग हां में जवाब देंगे?
जवाब: मैंने 8 महीने पहले ज्वॉइन किया था, इसके बाद से सफाई व्यवस्था बेहतर हुई है। मुझे उम्मीद है कि शहरवासी फीडबैक के दौरान सकारात्मक जवाब देंगे।

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ओडीएफ डबल प्लस के लिए 6 माह बाद ही कर सकेंगे आवेदन ....रैंकिंग पर पड़ेगा असर
शहर को ओडीएफ डबल प्लस का दर्जा दिलाने के लिए नगर निगम अब 6 महीने बाद ही फिर आवेदन कर सकेगी। डबल प्लस नहीं मिलने से निगम की कमियों का खामियाजा अब शहर को स्वच्छता सर्वेक्षण की रैंकिंग में भुगतना पड़ेगा। नगर निगम ने अधूरी तैयारी के बीच दो बार ओडीएफ डबल प्लस के लिए आवेदन किया, लेकिन हकीकत जांचने आई सर्वे टीम को कई जगहों पर खामियां मिलीं, जिसके चलते यह दर्जा नहीं मिल सका।

पहले जैसे हुए हालात
निगम अधिकारियों ने ओडीएफ डबल प्लस के सर्वे के लिए जो तैयारियां की थीं, उन पर फिर ध्यान देना बंद कर दिया है। अब शौचालयों के हालात फिर पहले जैसे हो गए हैं।

दो बार कर सकते हैं आवेदन
ओडीएफ डबल प्लस के लिए आवेदन करने के बाद यदि सर्वे टीम उसे रिजेक्ट करती है, तो फिर 7 दिन बाद आवेदन दोबारा से किया जा सकता है। फिर निरस्त किया होने पर 6 माह बाद ही आवेदन होगा।

केन्द्र से कहा है
नगर निगम आयुक्त संदीप माकिन ने कहा, हमने केन्द्र से फिर शहर का निरीक्षण करने के लिए कहा है। हालांकि ओडीएफ डबल प्लस के लिए अब 6 महीने बाद ही आवेदन किया जा सकेगा।

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