खुद वसूली की नहीं अब कह रहे शासन ने फंड में कर दी कटौती

नगर निगम अधिकारियों ने खुद की आय बढ़ाने के कोई प्रयास नहीं किए अब जब शासन ने कई मदों में कटौती कर दी तो हाय तौबा मच रही है। यहां तक कि अधिकारी आय के अन्य कोई विकल्प ढूंढना तो दूर की बात है जो टैक्स की वसूली है वह भी सही ढंंग से नहीं कर सके हैं। वसूली में पूरी तरह से नाकाम अधिकारी अब अपनी कमियों का सिरा शासन पर फोडऩे की कोशिश कर रहे हैं। फिर चाहे वह संपत्तिकर हो, जलकर या फिर होर्डिंग्स इन सभी में ही निगम वसूली करने में फिसड्डी साबित रहा है।

By: Vikash Tripathi

Updated: 27 Nov 2019, 09:45 PM IST


शहर में विकास कार्य की शुरूआत में बजट रोडा बन रहा है। फिर चाहे वह मुख्यमंत्री अधोसंरचना के तहत चल रहे निर्माण कार्य हों या फिर सड़कों का डामरीकरण। निगम अधिकारियों के अनुसार निगम की वित्तीय हालत खराब हो चुकी है, कई मदों में फंड ही नहीं है। जिसके कारण स्थिति गड़बड़ा रही है। नए कार्य पूरी तरह से रुक गए हैं। निगम अधिकारियों का कहना है कि शासन से जो फंड मिलता है उसमें कटौती की गई है। जिसके कारण वित्तीय हालत ठीक नहीं है। लेकिन जो फंड निगम वसूली के जरिए बढ़ा सकता है उस ओर कोई ध्यान नहीं हैै।

अगर संपत्तिकर की बात करें तो शहर में २.४ लाख प्रोपर्टीज हैं जिसमें से निगम द्वारा सिर्फ ४५ फीसदी तक ही वसूली की जाती है। कुछ यही हाल है जल कर का। शहर में १.४ लाख वैध कनैक्शन हैं लेकिन इनमें से बिल जमा ४५ से ५० फीसदी ही होता है। इन्हें बढ़ाने के लिए कोई प्रयास निगम द्वारा अभी तक नहीं किए गए।


होर्डिंग्स में भी गड़बड़ी
होर्डिंग्स से निगम को फिलहाल साल में करीब डेढ़ से दो करोड़ की वसूली की जाती है। जबकि शहर में बड़ी संख्या में अवैध होर्डिंग्स लगे हैं अगर इनसे वसूली की जाए तो आय में वृद्धि हो सकती है। इसके अलावा कई होर्डिंग्स संचालक को रजिस्टे्रशन के बाद भी अनुमति नहीं मिली है जिससे निगम को हर साल करीब ४ से ६ करोड़ का नुकसान हो रहा है।


१२५ दुकानों का नहीं हुआ आवंटन
शहर में निगम की दुकानों की बात करें तो करीब १९०० दुकानें हैं। जिसमें से १२५ दुकान अभी आवंटित नहीं हुई हैं। इसके अलावा दुकानों के ट्रांसफर में भी काफी समय लगता है जिसके कारण निगम को जहां ट्रांसफर राशि २५ हजार रुपए प्रति दुकान और उसके बाद ५० प्रतिशत किराया जो बढ़ता है वह नहीं मिल पाता है। हर महीने की बात करें तो निगम को फिलहाल १८ से २० लाख रुपए किराए से प्राप्त हो रहा है।
फंड जो शासन से कम मिला


चुंगी क्षतिपूर्ति में २८ फीसदी की कमी की गई है।
विशेष निधि की राशि नहीं मिली।
वाणिज्यक कर में १५ करोड़ की कटौती।
राज्य वित्त आयोग में करीब ४ करोड़ की कटौती।
मुख्यमंत्री अधोसंरचना में मिलने वाली २० प्रतिशत की ग्रांट नहीं मिली। जिससे ८० प्रतिशत की राशि जो कि लोन के रूप में मिलती थी वह भी नहीं मिली।

नगर निगम को वसूली अभियान पर पूरा फोकस करना चाहिए। अगर सही ढंग से संपत्तिकर, जलकर की वसूली की जाए तो हर महीने १० करोड़ रुपए निगम के फंड में जमा हो जाए। इसके अलावा जो होर्डिंग के टेंडर हैं उन्हें भी जल्द निकाला जाए जिससे निगम की आय बढ़ेगी।
कृष्णराव दीक्षित, नेता प्रतिपक्ष, नगर निगम परिषद

नगर निगम द्वारा वित्तीय हालत का बहाना बनाया जा रहा है। विधायकों के लिए निगम द्वारा कार्य कराए जा रहे हैं वहीं पार्षदों से कहा जा रहा है कि वित्तीय हालत ठीक नहीं है। यही सही नहीं है। निगम ने आय बढ़ाने के कोई प्रयास ही नहीं किए।
दिनेश दीक्षित, पार्षद भाजपा

Vikash Tripathi
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