कॉलेज संचालकों की नैक की नई गाइड लाइन ने उड़ाई नींद,ये है नया नियम

कॉलेज संचालकों की नैक की नई गाइड लाइन ने उड़ाई नींद,ये है नया नियम

By: monu sahu

Published: 24 May 2018, 02:22 PM IST

ग्वालियर। जीवाजी यूनिवर्सिटी अधिकारियों से सेटिंग कर संबद्धता हासिल करने वाले कॉलेजों की नैक (नेशनल असेसमेंट एंड एक्रिडिएशन काउंसिल) की सख्त गाइडलाइन ने नींद उड़ा दी है। सभी ४४० कॉलेजों में से किसी ने भी इस २०१८-१९ में (ग्रेडिंग) निरीक्षण के लिए आवेदन नहीं किया है। कॉलेजों को निरीक्षण से पहले एसएसआर (सेल्फ स्टडी रिपोर्ट) भेजना होती है, लेकिन किसी ने नहीं भेजी है, जबकि देशभर से 665 कॉलेजों-यूनिवर्सिटी ने यह रिपोर्ट भेजी है। इसमें प्रदेश से महज 11 कॉलेज-यूनिवर्सिटी ही शामिल हैं।

 

यह स्थिति इसलिए बनी क्योंकि नैक ने कुछ समय पहले ही नई और सख्त गाइड लाइन जारी की। इसके तहत अब एसएसआर रिपोर्ट के आधार पर ही 70 फीसदी रिजल्ट तय हो जाएगा। पियर टीम की भूमिका नाम की रह गई। इसकी रिपोर्ट के आधार पर महज 30 फीसदी अंक मिलेंगे। ग्वालियर में ४५० कॉलेजों में से ८ ने नैक से ग्रेड हासिल की। इनमें भी सात कॉलेज सरकारी हैं।


नई गाइड लाइन में ऐसे मिलेगी ग्रेड
ए डबल प्लस ग्रेड (3.76 से 4 अंक) सबसे टॉप मानी जाएगी। इसके बाद ए प्लस (3.51 से 3.75) और ए ग्रेड (3 से 3.50 तक) ए ग्रेड रहेगी।
बी डबल प्लस ग्रेड (2.76 से 3) और बी ग्रेड (2.51 से 2.75) भी बेहतर मानी जाएगी, लेकिन बी ग्रेड (2 से 2.50) अच्छी स्थिति नहीं है।
सी डबल प्लस (1.76 से 2) और सी प्लस (1.51 से 1.75) तक की ग्रेड वालों के सामने अनुदान रुकने का संकट रहेगा।
वहीं सी (1 से 1.50) वाली ग्रेड पर तो कॉलेज ही बंद करना पड़ेगा।

 

इन कारणों से नहीं किया आवेदन
1. अब संस्था प्रभारी नैक की पियर टीम को प्रलोभन
देकर ग्रेड तय नहीं करवा सकेंगे। क्योंकि 70 फीसदी नंबर सेल्फ स्टडी रिपोर्ट के आधार पर तय होंगे।
2. पियर टीम कॉलेज का राज जानने सीधे छात्र और अभिभावकों से फोन या ईमेल से संपर्क कर फीडबैक लेगी। इस दौरान सभी नाम गोपनीय रखे जाएंगे।
3. सुविधाओं और फैकल्टी के मामले में 45 फीसदी से ज्यादा कॉलेज सी प्लस ग्रेड लाने की स्थिति में हैं। इसी स्थिति में पुराने नियम से कम से कम बी ग्रेड मिल जाती थी।


रोजगार पर पड़ेगा असर
इस स्थिति से सबसे ज्यादा नुकसान छात्रों को होगा, क्योंकि कॉलेजों को मार्कशीट पर ग्रेड दिखाना होगी। बड़ी कंपनियां उन्हीं कॉलेजों में प्लेसमेंट के लिए जा रही हैं, जिनकी ग्रेड कम से कम ए या बी डबल प्लस है, जिन कॉलेजों के पास ग्रेड नहीं है, वहां कंपनियां प्लेसमेंट के लिए आ ही नहीं रहीं। ग्रेड नहीं होने या खराब होने पर यूजीसी का अनुदान भी रुकेगा।


कॉलेजों की स्थिति
450 कॉलेज जेयू से संबद्धता प्राप्त
18 कॉलेज आरजीपीवी से संबद्धता
8 कॉलेज ने ही नैक से ग्रेड प्राप्त की

 

"नैक ग्रेड लेने में अंचल में सरकारी कॉलेज सबसे आगे हैं। शहर के टॉप ४ कॉलेजों के पास पहले से ही नैक की ग्रेड है, कुछ के रिजल्ट जल्द आएंगे। निजी कॉलेजों की स्थिति खराब है। नैक से ग्रेड न मिली तो विवि से संबद्धता मिलना भी मुश्किल हो जाएगा।"
डॉ. केएस सेंगर, अतिरिक्त संचालक, उच्चशिक्षा विभाग

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