बड़ी खबर : शहीद की पत्नी ने कहा हमें रोना नहीं है,हम दुश्मनों को मिटा देंगे

बड़ी खबर : शहीद की पत्नी ने कहा हमें रोना नहीं है,हम दुश्मनों को मिटा देंगे

monu sahu | Publish: Mar, 14 2018 12:29:08 PM (IST) Gwalior, Madhya Pradesh, India

रामकिशन सीआरपीएफ की २१२वीं बटालियन में पदस्थ थे।

ग्वालियर। छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सलियों के हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ एएसआई रामकिशन सिंह तोमर की पत्नी प्रभा देवी की आंखों में दुश्मनों के लिए खून खौल रहा है। वह पति की मौत पर वह रोना नहीं चाहतीं, बल्कि देश के दुश्मनों का सफाया करना चाहती हैं। वह सरकार के रवैये से भी खफा हैं। रामकिशन के शहीद होने की खबर मिलने पर प्रभा देवी और उनकी बेटी पिंकी एक-दूसरे को दिलासा देकर आंसू पौंछ रही थीं। प्रभादेवी बेटे विनय के आंसू पोंछते हुए कहती हैं, बेटा हमें रोना नहीं है, हम दुश्मनों को मिटा देंगे। वह कहती हैं, पति ने मुझे बंदूक चलाना सिखाई है, अब इसी बंदूक से दुश्मनों का सफाया कर दूंगी।

 

चाचा अभिलाख भी फफक-फफक कर रो रहे थे। उनका कहना था रामकिशन उनका भतीजा नहीं, बेटा था। उन्होंने बताया कि शाम करीब ४ बजे रामकिशन के कमांडेंट का फोन आया, उन्होंने पूरी घटना बताई। तब उन्हें पता चला। रामकिशन सीआरपीएफ की २१२वीं बटालियन में पदस्थ थे। वे अपने साथियों के साथ एंटी लैंडमाइन व्हीकल में सवार होकर रवाना हुए थे। जब वह किस्टराम थाना क्षेत्र में थे, तभी नक्सलियों ने शक्तिशाली विस्फोट से उनके वाहन को उड़ा दिया। जिसमें वह शहीद हो गए।

 

बचपन से देश सेवा की ललक थी
रामकिशन को बचपन से ही देश सेवा की ललक थी। वन विभाग के रिटायर्ड डीएफओ चाचा अभिलाख सिंह तोमर ने बताया कि पढ़ाई के दौरान रामकिशन अक्सर उनसे कहते थे किखाकी वर्दी पहनकर देश की सेवा करूंगा। उसने जैसा सोचा था, वैसा कर भी दिखाया। देश की सेवा करते-करते वह शहीद हो गया।

 

सुबह १० बजे ही पत्नी से हुई थी फोन पर बात
रामकिशन के शहीद होने की खबर मिलते ही उनके घर डीडी नगर सेक्टर जीएल १०६३ पर रिश्तेदारों, दोस्तों और कॉलोनीवासियों की भीड़ जुट गई। पत्नी प्रभा देवी, बेटी पिंकी और बेटा विनय सिंह उर्फ विक्की के आंसू थम नहीं रहे थे। मंगलवार सुबह करीब १० बजे पत्नी से उनकी फोन पर कुछ मिनट बात भी हुई। बच्चों का हाल चाल लेकर बोले चेकिंग पर जाना है, कुछ देर बाद बात करेंगे। पत्नी उनके दोबारा फोन का इंतजार कर रही थी। लेकिन फोन तो आया पति के शहीद होने की खबर लेकर।

 

डोली में बैठाकर धूमधाम से विदा करना चाहते थे बेटी को
शहीद रामकिशन सिंह तोमर की हार्दिक इच्छा थी कि वह अपनी बेटी पिंकी की धूमधाम से शादी कर उसे अपने हाथों से डोली में बैठाकर विदा करें। इसलिए कुछ दिन पहले छुट्टी लेकर आए थे और तीन-चार जगह रिश्ते की बात भी करने गए। कुछ लड़के पसंद भी आए। लेकिन, छुट्टी खत्म होने के कारण उन्हें सुकमा लौटना पड़ा। वह घरवालों से कहकर गए थे कि अगली बार आकर रिश्ता पक्का कर देंगे। लेकिन, उनकी इच्छा पूरी नहीं हो सकी। मंगलवार को छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सलियों द्वारा घात लगाकर किए हमले में देश के लिए शहीद हो गए।

 

जल्द लौटने का बोल दो दिन पहले ही गए थे
रामकिशन घर की होली मनाने के लिए पन्द्रह दिन की छुट्टी लेकर डीडी नगर अपने घर आए थे। छुट्टी खत्म होने पर दो दिन पहले रविवार शाम ४ बजे सुकमा लौट गए। पत्नी बच्चों से बोलकर गए थे कि दोबारा जल्द लौटकर आऊंगा।

 

 

Naxalite Attack Chhattisgarh

दोस्तों के साथ मस्ती
रामकिशन मिलनसार था, इसलिए दोस्तों का प्रिय था। होली पर दोस्तों के साथ जमकर मस्ती की। मित्र मोहन तिवारी ने बताया कि जब वह छुट्टी पर आते तो दोस्तों को जरूर याद करते। वहीं खबर के बाद भी प्रशासन या पुलिस का कोई वरिष्ठ अधिकारी या बड़ा नेता डीडी नगर उनके घर नहीं पहुंचा। सिर्फ वार्ड१८ के पार्षद जवर सिंह गुर्जर मौजूद थे, वही परिजनों को दिलासा दे रहे थे।

 

बेटा करेगा देश सेवा
चाचा अभिलाख सिंह तोमर ने बताया रामकिशन की इच्छा थी कि बेटा विनय भी वर्दी पहनाकर देश की सेवा करे। उसे स्पोट्र्स में बढ़ चढ़कर हिस्सा दिलवाते थे। विनय जूडो कराटे का अच्छा खिलाड़ी भी है। अक्सर परिवार के सदस्यों को कहते कि देखना उनका बेटा भी एक दिन नाम करेगा।

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