यह नवजात दुनिया में आने से पहले ही बना तीन नर्सों का शिकार,खबर पढ़कर आंसू नहीं रोक पाएंगे आप

जिला अस्पताल के मेटरनिटी वार्ड में एक महिला के प्रसव के तुरंत बाद उसके बच्चे की मौत हो गई। परिजन ने आरोप लगाया कि लेबर रूम में तीन-तीन नर्सों ने प्रसू

By: monu sahu

Published: 18 Aug 2017, 10:00 PM IST

ग्वालियर/मुरैना। जिला अस्पताल के मेटरनिटी वार्ड में एक महिला के प्रसव के तुरंत बाद उसके बच्चे की मौत हो गई। परिजन ने आरोप लगाया कि लेबर रूम में तीन-तीन नर्सों ने प्रसूता के पेट पर चढ़कर उसे दबाया,जिससे बच्चे का दम घुट गया और उसकी मौत हो गई। उनका कहना था कि इस मामले में दोषी नर्सों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। खेड़ा मेवदा निवासी बालस्टर जाटव की पत्नी नीतू को गुरुवार की रात १० बजे प्रसव के लिए जिला अस्पताल लाया गया था।

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शुक्रवार को दोपहर ढाई बजे उसे लेबर रूम में ले जाया गया। तब तक पेट में उसके बच्चे की रिपोर्ट ओके थी। 2  बजकर 36 मिनट पर नीतू ने एक बालक को जन्म दिया,इसके तुरंत बाद ही उसकी मौत हो गई,जिससे परिजन भड़क उठे। लेबर रूम में नीतू के साथ मौजूद उसकी ननद माया ने बताया कि बच्चे को बाहर निकालने के लिए तीन-तीन नर्सें उसके पेट को दबा रही थीं। उन्हें ऐसा करने से रोका भी गया, लेकिन वे नाराज होकर कहने लगी कि यदि ज्यादा जानती हो तो तुम ही प्रसव करा लो।

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नर्सों ने पेट को तब तक दबाया,जब तक कि बच्चा बाहर नहीं आ गया, लेकिन इसके तुरंत बाद ही उसकी मौत हो गई। बच्चे की मौत से आक्रोशित परिजन ने नर्सों से जवाब तलब भी किया पर उनकी बात को अनसुना कर दिया गया। लिहाजा वे लेबर रूम के बाहर अपना दुखड़ा रोते रहे। शाम पांच बजे आरएमओ डॉ. पदमेश उपाध्याय ने लेबर रूम पहुुंचकर इस मामले की जानकारी ली। नर्सों ने उन्हें बताया कि बच्चे की धकडऩ नहीं थी। इसीलिए उसे बाहर निकालने के लिए पेट दबाना पड़ा, लेकिन परिजन इस घटना के लिए नर्सों को दोषी ठहराते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे।

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पांच साल बाद हुआ था बच्चा
नवजात की मौत के बाद परिजन बेहद दु:खी थे। लाजिमी भी था, क्योंकि बालस्टर और नीतू की शादी के पांच साल बाद यह बच्चा हुआ था। परिजन का कहना था कि सुबह तक नीतू के गर्भ की स्थिति समान्य थी। यदि नर्सों के वश में नहीं था तो वे हमें कहीं और जाने को ही कह देतीं, कम से कम यह दु:ख तो नहीं देखना पड़ता।

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मां को पता ही नहीं था कुछ
मृत नवजात का पिता बालस्टर व उसके परिवार के अन्य लोग लेबर रूम के बाहर व्यथित अवस्था में थे, तो दूसरी ओर बालस्टर की पत्नी को यह पता ही नहीं था कि जिस बच्चे को वह नौ माह से पेट में पाल रही थी, उसकी मौत हो गई है। हालांकि वार्ड में पलंग पर लेटी नीतू बच्चे के बारे में बार-बार पूछ रही थी, तो परिजन उसे यह कहकर तसल्ली दे रहे थे कि वह दूसरे वार्ड में है।

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अव्यवस्थाओं पर जताया आक्रोश
मेटरनिटी वार्ड में नवजात की मौत की घटना के बाद कई अन्य महिलाओं ने भी वहां अव्यवस्थाओं को लेकर आक्रोश जताया। लेबर रूम के बाहर ही मौजूद महिलाओं ने कहा कि मेटरनिटी स्टाफ अभद्रता से बात करता है। यदि किसी गंभीर समस्या के बारे में बताया जाए तो स्टाफ नर्स सुनवाई करने के बजाय भड़क उठती हैं। कुछ महिलाओं ने तो मेटरनिटी में खुलेआम अवैध वसूली किए जाने की बात भी कही।

 

''पता चला है कि बच्चे की धड़कन अंदर ही रुक गई थी। इसलिए पेट दबाकर उसे बाहर निकालना पड़ा। परिजन का दु:ख लाजिमी है। हम इस मामले को और दिखवा लेते हैं।''
डॉ. पदमेश उपाध्याय, आरएमओ, जिला अस्पताल

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