अब शहर में विलुप्त हो रहे गिद्ध

अब शहर में विलुप्त हो रहे गिद्ध
Now the vultures going extinct in the city

देश में एेसी कई प्रजातियां हैं, जो धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही हैं और कुछ विलुप्त होने की कगार पर हैं। इनमें से एक गिद्ध भी हैं, जो इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन एंड नेचर की रेड डाटा बुक में अति विलुप्त प्रजाति की सूची में 1990 से दर्ज हो गए थे।

ग्वालियर. देश में एेसी कई प्रजातियां हैं, जो धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही हैं और कुछ विलुप्त होने की कगार पर हैं। इनमें से एक गिद्ध भी हैं, जो इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन एंड नेचर की रेड डाटा बुक में अति विलुप्त प्रजाति की सूची में 1990 से दर्ज हो गए थे। देश में गिद्ध की पॉपुलेशन 95 परसेंट तक डिक्लाइन हो चुकी है। 5 परसेंट गिद्ध ही शेष बचे हैं। शहर की बात करें तो चिडि़याघर में 12 गिद्ध और गोपाचल पर्वत पर 24 गिद्ध हैं, जिन्हें आसानी से देखा जा सकता है।

चिडि़याघर के एन्क्लोजर में 12 गिद्ध

गिद्ध की दो प्रजातियां होती हैं। लांग बिलीड वल्चर एवं स्क्वेंजर वल्चर। वर्तमान में चिडि़याघर में 12 गिद्ध संरक्षित हैं। सबसे अहम बात यह है कि ये गिद्ध रेस्क्यू कर प्राप्त हुए हैं। जैसे ही गर्मियों का तापमान 47 से 48 डिग्री पहुंचता है। तो शहर के अनेक स्थानों पर ये दिखने लग जाते हैं, जिन्हें पकड़कर चिडि़याघर लाया जाता है और समुचित देखरेख में एनक्लोजर में रखा जाता है।

तेज धूप निकलने पर होते हैं सक्रिय

पक्षी एक्सपर्ट गौरव परिहार में बताते हैं कि शहर में लगभग 36 गिद्ध हैं। इनमें से 12 गिद्ध चिडि़याघर में हैं, जो उचित देखरेख में हैं। गिद्ध दोपहर 12 बजे के बाद सक्रिय होते हैं। बादल होने पर यह अपनी जगह से नहीं निकलते और जैसे ही धूप तेज होती है। ये मूवमेंट करते देखे जा सकते हैं।

पहली बार जू में जन्मे गिद्ध

प्रदेश में पहली बार ग्वालियर के चिडि़याघर में गिद्ध ने अंडे दिए हैं, जिन्हें पूरी देखरेख में रखा गया। अब वह दो महीने के हो चुके हैं। चिडि़याघर के नोडल अधिकारी डॉ. उपेन्द्र यादव ने बताया कि देश के अनेक शहरों में गिद्ध संरक्षण केन्द्र संचालित हैं। इनमें गिद्धों को प्राकृतिक आवास में रखकर प्रजनन एवं पुनर्वास का कार्य कराया जाता है। पुरन्तु ग्वालियर चिडि़याघर में बिना ज्यादा किसी तकनीकी के वंशवृद्धि होना बड़ा कार्य है। 

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