scriptPapa had said, touch the sky, we also spread our wings | पापा ने कहा था छू लो आसमां, हमने भी पंख फैला दिये | Patrika News

पापा ने कहा था छू लो आसमां, हमने भी पंख फैला दिये

फीस भरने स्कूल टाइम से शुरू किए ट्यूशन, स्पोट्र्स से पढ़ाई कर बनी नेशनल प्लेयर और कोच

ग्वालियर

Published: August 22, 2021 10:30:09 am

ग्वालियर.

परिवार का सपोर्ट और कुछ अलग करने का जुनून हो तो लक्ष्य तक पहुंचने में अधिक समय नहीं लगता। ग्वालियर की विजेता सिंह चौहान को अपना कॅरियर बनाने में परिवार का पूरा सहयोग मिला। उन्होंने भी स्कूल टाइम से काफी चुनौतियों का सामना किया, लेकिन आज वह एक मुकाम हासिल कर चुकी हैं। उनका सामाजिक दायरा बड़ा होने के साथ ही वह स्पोट्र्स में अच्छा दखल रखती हैं। वह वॉलीबॉल नेशनल प्लेयर व नेशनल कोच भी हैं और खुद की एक एकेडमी भी शुरू कर चुकी हैं, जो बच्चों को खेल से जोडऩे के लिए है। उनके नाम कई अवॉर्ड हैं। वह जेसीआई इंडिया की जोन डायरेक्टर (मैनेजमेंट) भी हैं।

पापा ने कहा था छू लो आसमां, हमने भी पंख फैला दिये
पापा ने कहा था छू लो आसमां, हमने भी पंख फैला दिये

पापा की सेलरी कम थी, अपना खर्च खुद उठाया
विजेता ने बताया कि मेरे पापा (स्व. नरेन्द्र सिंह चौहान) नगर निगम में फोर्थ ग्रेड में थे। इसीलिए मैंने क्लास 8वीं में ट्यूशन लेना शुरू कर दिए। पहले खुद पढ़कर आती और फिर तैयार होकर बच्चों को पढ़ाने बैठती। साथ ही घर का काम भी करती और छोटी बहन को भी पढ़ाती। पापा के सपोर्ट से इतने पैसे जोड़ लिए थे कि भोपाल से स्पोट्र्स में बैचलर और मास्टर डिग्री ली। पापा ने मुझे व छोटी बहन (अजेता) को बोल दिया था कि तुम ही मेरे बेटे हो, जो करना चाहते हो करो। अजेता इस समय सिविल जज की प्रिपरेशन कर रही है।

स्पोट्र्स मैनेजर रहीं, स्पोट्र्स एकेडमी की फाउंडर भी
विजेता ने वॉलीबॉल में कई नेशनल खेले और मेडल अपने नाम किए। उन्होंने स्पोर्टसीड प्रो कम्पनी में जॉब की, जिसके तहत ग्वालियर में कई स्कूल्स में स्पोट्र्स मैनेजर रहीं। इसके बाद उन्होंने खुद की एकेडमी शीस्टेप स्पोट्र्स शुरू की, जिसके अंतर्गत उन्होंने बच्चों को खेल से जोडऩे का प्रयास किया है। कोरोना कम होते ही यह एकेडमी एक बार फिर शुरू होगी।

ग्वालियर खेल रत्न, ध्यानचंद अवॉर्ड मिल चुका विजेता को
विजेता नेशनल प्लेयर के साथ-साथ डिस्ट्रिक्ट बास्केट बॉल एसोसिएशन की कोर मेंबर रह चुकी हैं और वर्तमान में स्कूल गेम फेडरेशन ऑफ इंडिया एमपी की कोच हैं। वह ग्वालियर खेल रत्न, ध्यानचंद अवॉर्ड, विवेकानंद खेल सम्मान से विभूषित हो चुकी हैं।

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