स्पेशल बच्चे समाज का हिस्सा

स्पेशल बच्चे समाज का हिस्सा हैं। उन्हें आगे बढ़ाना हम सभी का कर्तव्य है। लेकिन यह तभी होगा, जब हम मिलकर प्लान करेंगे।

By: Avdhesh Shrivastava

Published: 04 Apr 2019, 07:25 PM IST

ग्वालियर . स्पेशल बच्चे समाज का हिस्सा हैं। उन्हें आगे बढ़ाना हम सभी का कर्तव्य है। लेकिन यह तभी होगा, जब हम मिलकर प्लान करेंगे। इसमें सबसे अधिक ध्यान शिक्षक, माता और पिता को देना होगा। हमें बच्चों के साथ धैर्य एवं संयम बरतना होगा। नि:शक्त बच्चों की गति एवं स्तर को ध्यान में रखकर योजना बनानी होगी। यह एक टीम वर्क है। यह बात मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित उमा तुली ने कार्यक्रम के दौरान कही। यह प्रोग्राम ‘शिक्षकों का समावेशित शिक्षा पर उन्मुखीकरण कार्यक्रम’ विषय पर आयोजित किया गया था। यह कार्यक्रम बुधवार को डाइट की ओर से परिसर में आयोजि किया गया। विशिष्ट अतिथि मंजुला पाटनकर उपस्थित रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता डाइट के प्रिंसिपल उदय उपेन्द्र भिड़े ने की।
समाज को बदलनी होगी सोच : सीडब्ल्यूएसएन छात्रावास के शिक्षकों एवं शासकीय स्कूल के शिक्षकों के लिए आयोजित कार्यक्रम में मंजुला पाटनकर ने कहा कि आज भी समाज नि:शक्त बच्चों को अच्छी नजर से नहीं देखता। उसे अपनी सोच बदलनी होगी। क्योंकि इन बच्चों के पास भी टैलेंट है। आवश्यक है उनका सहयोग करने और सही तरीके से गाइड करने की। इस दौरान शिक्षकों द्वारा कई क्वेश्चन पूछे गए, जिसका जवाब उन्होंने उदाहरण के साथ दिया।
बच्चों के साथ हो एक जैसा व्यवहार : नि:शक्ल बच्चों को नॉर्मल बच्चों के साथ शामिल किया जाना चाहिए। उनके साथ भी एक जैसा व्यवहार करना चाहिए। आगे बढ़ाने के लिए उन्हें कॉम्पीटिशन में पार्टिसिपेट करना चाहिए। उनकी पसंद और नापसंद का ध्यान रखना चाहिए। उनके भी सपने होते हैं। उसे समझकर उन्हें उसी दिशा में मोटिवेट करना चाहिए। कार्यक्रम का संचालन केदार पाल ने किया एवं आभार समावेशित शिक्षा प्रभारी ओपी दीक्षित ने व्यक्त किया।

Avdhesh Shrivastava
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