पत्रिका एक्सपोज... सोसायटियों के नाम पर लिया फंड, आयोजक बन गया संत रविदास मप्र हस्तशिल्प एवं हाथकरघा विकास निगम

ग्वालियर व्यापार मेले के दस्तकारी हाट में लगाए गए हाथकरघा मेला (मृगनयनी हैंडलूम मेला) में दो सोसायटियों के नाम से फंड (अनुदान) लिया गया है और आयोजक के रूप...

ग्वालियर. ग्वालियर व्यापार मेले के दस्तकारी हाट में लगाए गए हाथकरघा मेला (मृगनयनी हैंडलूम मेला) में दो सोसायटियों के नाम से फंड (अनुदान) लिया गया है और आयोजक के रूप में संत रविदास मप्र हस्तशिल्प एवं हाथकरघा विकास निगम ने खुद को ही दर्शा दिया है। यह फंड जिला हाथकरघा कार्यालय की ओर से दिया गया है। इसके साथ ही यहां बनाए गए 125 स्टॉल में से 31 स्टॉल तो मध्यप्रदेश के हैंडलूम बुनकरों को दिए गए हैं, जबकि 94 स्टॉल दूसरे प्रदेशों के शिल्पियों को बांट दिए गए हैं। इसके बदले इन शिल्पियों से 5-5 हजार रुपए की रकम वसूली गयी है। मजे की बात यह है कि हाथकरघा मेला लगाने के आदेश में साफ-साफ लिखा है कि दुकान आवंटन नि:शुल्क किया जाएगा।


94 शिल्पियों को बांट दिए स्टॉल
शिल्प बाजार में लगाए गए हाथकरघा मेले में कुल 125 स्टॉल लगाए गए हैं। इनमें से 31 स्टॉल हैंडलूम के लगे हैं बाकी 94 स्टॉल दूसरे प्रदेशों के शिल्पियों को आवंटित कर दिए गए हैं। इन सभी से 5-5 हजार रुपए की रकम टेंट, बिजली, टेबल आदि के नाम पर ले ली गई है।

प्रभारी बोले- एक लाख मिले हैं
संत रविदास मप्र हस्तशिल्प एवं हाथकरघा विकास निगम ग्वालियर के प्रभारी सुधीर व्यास से जब पूछा गया कि इस मेले के लिए आपको ग्रांट प्राप्त हुई है, तो पहले तो उन्होंने मना किया पर बाद में जब उनसे कहा गया कि इसमेंं आयोजक आप हैं। तब वे बोले कि हमें एक लाख मिले हैं और इसके आयोजक हम ही हैं, जबकि जिला हाथकरघा कार्यालय की ओर से बृजकिशोर सूत्रकार संचालक पारस हाथकरघा उद्योग ग्वालियर और दशरथ पाठ्या संचालक दशरथ हैंडलूम ग्वालियर को एक-एक लाख रुपए की ग्रांट दी गई है।

पद्मश्री अवार्डी से भी वसूल लिए 5 हजार
हैंडलूम मेले में पंजाब की फुलकारी शिल्पी लाजवंती ने भी स्टॉल लगाया है। लाजवंती ने बताया कि पहले मेरी 20 नंबर की पक्की दुकान थी, फिर मुझे कच्ची दुकान दे दी गयी। कच्ची दुकान के लिए भी मुझसे 5 हजार रुपए लिए गए हैं, जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए।

बिजली-टेंट नाम पर लिए
हैंडलूम मेले में दुकान लगाए सात दिन हो गए हैं। हम कश्मीरी वूलन लेकर आए हैं। शिल्प बाजार में भी दुकान लगाई थी। बिजली, टेंट, टेबल के नाम पर पांच हजार लिए गए हैं। मध्यप्रदेश के अलावा दूसरे प्रदेश के शिल्पियों ने भी दुकानें लगाई हैं।
शब्बीर खान, शिल्पी, कश्मीर

पता करके बताता हूं
हाथकरघा मेला तो हमने ही लगाया है। बाकी बात आप प्रभारी से पूछिए। जहां तक रुपए लेने की बात है तो उसके क्या प्रावधान हैं ये मैं पता करके बताता हूं।
राजीव शर्मा, एमडी, संत रविदास मप्र हस्तशिल्प विकास निगम और आयुक्त हाथकरघा

रिज़वान खान Desk
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