पत्रिका एक्सपोज... न निकले खिलाड़ी और न तैयार हुए खेल मैदान

ग्रामीण अंचल की युवा खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए 11 वर्ष पहले बनी योजना के बाद भी अभी तक किसी भी पंचायत में स्तरीय खेल मैदान नहीं बन सका...

ग्वालियर. ग्रामीण अंचल की युवा खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए 11 वर्ष पहले बनी योजना के बाद भी अभी तक किसी भी पंचायत में स्तरीय खेल मैदान नहीं बन सका है। मैदान तैयार करने के लिए पंचायतों को दिए गए 1-1 लाख रुपए खर्च हो चुके हैं। इसके साथ ही गांवों के युवाओं को खेल सामग्री के लिए किसी पर आश्रित न होना पड़े इसलिए खेल एवं युवक कल्याण विभाग के माध्यम से पंचायतों का क्लस्टर बनाकर एक-एक लाख रुपए की खेल सामग्री भी प्रदाय की गई थी। इस खेल सामग्री को 2011 में जिला खेल अधिकारी के माध्यम से पंचायतोंं को वितरित किया गया था।
यह सब होने के बाद भी जिले की ग्राम पंचायतों से एक भी स्तरीय खेल प्रतिभा नहीं निकल सकी है। कुछ पंचायतों का नाम कराते, हैंडबॉल, थ्रोबॉल में इसलिए हो सका है क्योंकि यहां के छात्रों ने शहर में आकर प्रैक्टिस की और फिर अपने गांव का नाम रोशन किया। पूर्व में किए गए खर्च को लेकर हुई जांच के परिणाम अभी तक सामने नहीं आए हैं और अब प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री महेन्द्र सिंह सिसोदिया ने पंचायतों में खेल मैदान बनाने की घोषणा फिर से कर दी है। पूर्व में हुए खर्च का हिसाब किए बिना फिर से पंचायतों में खेल मैदान बनाने का काम शुरू हुआ तो सरपंच, सचिव और मूल्यांकन करने वाले अधिकारियों द्वारा किए गए फर्जीवाड़े पर पर्दा डल जाएगा।


इस तरह हुआ था काम
- पंचायतों में खेल मैदान बनाने के लिए मनरेगा के अंतर्गत राशि जारी हुई थी।
- तत्कालीन समय में जिले की 399 (वर्तमान में 256) पंचायतों में खेल मैदान बनाने का काम 2009-10 में शुरू किया गया था।
- इसके बाद 2012 तक इन मैदानों को बनाए जाने की पुष्टि भी हुई।
- मैदानों का समतलीकरण और खेलने वालों के लिए अन्य सुविधाएं विकसित करने पर हर पंचायत में लगभग एक लाख रुपए खर्च किए गए थे।

यह थी योजना
- ग्रामीण अंचल के खिलाडिय़ों की प्रतिभा को निखारने के लिए खेल मैदान बनाने की तैयारी की गई थी।
- प्रत्येक ग्राम पंचायत में पहले से मौजूद मैदान, गौचर या फिर स्कूलों के आसपास की खुली जगह को खेल मैदान के रूप में विकसित करने की योजना थी।
- इस योजना के अंतर्गत मनरेगा कन्वर्जेंस से काम कराए जाने के लिए स्वीकृति दी गई थी।
- मैदान तैयार होने के बाद विकासखंड स्तर पर नियुक्त प्रशिक्षकों को चरण बद्ध तरीके से ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षण देने के लिए निर्देश दिया गया था।
- पंचायत, विकासखंड और जिला स्तर पर प्रतियोगिताओं का आयोजन कर खिलाडिय़ों को प्लेटफार्म भी प्रदान किया जाना था।
- खेल किट भी प्रदान किए जाने की योजना थी, खेल एवं युवक कल्याण विभाग द्वारा पंचायतों को किट प्रदान होना थीं।

यह है वर्तमान स्थिति
- खिलाडिय़ों के लिए बनाए मैदान 90 फीसदी जगहों से गायब हो चुके हैं।
- शहर से लगी 32 पंचायतों के नगर निकाय में विलय के बाद मैदानों के लिए चिह्नित की गई जगहों पर पूरी तरह से अतिक्रमण हो चुका है।
- मैदानों के लिए आई राशि को तत्कालीन सरपंच, सचिव, मूल्यांकन करने वाले अधिकारियों ने मिलबांटकर हजम कर लिया।
- प्रत्येक पंचायत को दी गई एक लाख रुपए से अधिक की खेल सामग्री भी गायब हो चुकी है।

इनका कहना है
जिन पंचायतों में खेल मैदान पहले बन चुके हैं, उनका परीक्षण कराया जाएगा। जहां मेंटेनेंस की जरूरत है, वहां मेंटेनेंस कराया जाएगा। पंचायतों से रिपोर्ट मांगी गई है। अगले कुछ दिन में पूरी रिपोर्ट आ जाएगी। इसके बाद जहां जरूरत होगी, वहां नए मैदान बनाए जाएंगे और जहां पुराने मैदान सही करने लायक होंगे उनको सही किया जाएगा। जिन मैदानों पर अतिक्रमण है, उसको हटाया जाएगा।
किशोर कान्याल, सीईओ-जिला पंचायत

रिज़वान खान Desk
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