पत्रिका एक्सपोज न्यूज... ई-चालान की रफ्तार धीमी, सिर्फ 5 चौराहों पर घेराबंदी बाकी जगहों पर टूटे नियम

शहर का यातायात बहुत ही बिगड़ा हुआ है। यातायात को सुधारने के लिए राज्यसभा सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया ट्रैफिक वार्डन बनने तक की बात कह रहे हैं। लेकिन यातायात की दशा...

ग्वालियर. शहर का यातायात बहुत ही बिगड़ा हुआ है। यातायात को सुधारने के लिए राज्यसभा सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया ट्रैफिक वार्डन बनने तक की बात कह रहे हैं। लेकिन यातायात की दशा सुधारने के लिए शहर के लोगों को भी जागरुक रहना होगा। जब तक लोग खुद जागरुक नहीं होंगे यातायात की दशा नहीं सुधरेगी। लोगों को ट्रैफिक रूल्स का पालन कराने के लिए पर्याप्त कसावट भी नहीं है। यातायात पुलिस के पास शहर के यातायात के हिसाब से फोर्स नहीं है, हाईटेक तरीके से ट्रैफिक पर नजर रखने के इंतजाम भी अधूरे हैं। ताजा हालात में सिर्फ 5 चौराहों पर कैमरे ट्रैफिक रूल्स तोडऩे वालों की गलती को पकड़ रहे हैं। बाकी चौराहों पर यातायात की अनदेखी करने वाले बेधड़क हैं। हालांकि जहां कैमरे की नजर नहीं है वहां यातायात पुलिसकर्मी मोबाइल और हैंडीकैम से गलत ड्राइविंग करने वालों की गलती पकड़ रहे हैं, लेकिन यह आसान नहीं है। क्योंकि जब पुलिसकर्मी फोटो खींचते हैं ज्यादातर वाहन चालक उनकी कैमरे की पकड़ से बाहर निकल जाते हैं। रनिंग वाहन का फोटो साफ नहीं आता इससे वाहन का नंबर पता नहीं चलता तो ई-चालान की कार्रवाई नहीं हो पाती।
यातायात डीएसपी आरएन त्रिपाठी बताते हैं कि शहर में कुल 72 चाराहों पर ऐसे कैमरों की जरूरत है, जो गलत ड्राइविंग करने वालों की गलती को पकड़कर उसका फोटो खींच सकें। तब ई-चालान की कार्रवाई कारगर होगी। अभी सिर्फ फूलबाग, तानसेन तिराहा, वीसी बंगला, गोला का मंदिर और डीडीनगर चौराहा पर कैमरे हैं। इन्हें स्मार्ट सिटी ने लगवाया है। बाकी 29 चौराहों पर पुलिस और 12 पर नगर निगम के कैमरे लगे हैं। इन्हें स्मार्ट सिटी को रिप्लेस करना है।


नीचे आया ग्राफ
वर्ष 2019 में यातायात पुलिस ने कुल 5029 ई चालान किए थे, जबकि 2020 में सिर्फ 2366 वाहनों की कैमरे से गलती पकड़कर उनके ई-चालान किए गए। एक साल में करीब 2263 चालान का ग्राफ नीचे आया। अब यातायात पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि सभी चौराहों पर ट्रैफिक सिग्लन से कनेक्ट कैमरे लगने के बाद इस प्रक्रिया में तेजी आएगी। उसके बाद वाहन चालकों की छोटी गलती पर भी नजर रहेगी।


पुलिस कैमरे से सिर्फ सर्विलांस, ट्रैफिक की निगरानी नहीं
डीएसपी त्रिपाठी के मुताबिक पुलिस के कैमरे यातायात सुधार में कमजोर हैं। इनका इस्तेमाल यह पता लगाने में तो किया जा सकता है कि किस रास्ते से कौन कब निकला है, लेकिन कैमरों का फोकस चौराहों की जेब्रा लाइन और सिग्लन से ताल्लुक नहीं रखता तो यातायात नियमों की अनदेखी करने वालों की गलती नहीं पकड़ी जाती। इसके लिए स्मार्ट सिटी के कैमरे के भरोसे रहना पड़ता है। इसलिए हर दिन 20 से 25 ई चालान ही हो पार रहे हैं।

रिज़वान खान Desk
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