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pitru paksha 2022: क्या महिलाएं भी कर सकती हैं तर्पण और पिंडदान

धर्मसिंधु ग्रंथ, मनुस्मृति, वायु पुराण, मार्कंडेय पुराण और गरुड़ पुराण में महिलाओं को तर्पण और पिंडदान करने का अधिकार बताया गया है।

ग्वालियर

Updated: September 14, 2022 05:09:23 pm

ग्वालियर। पितृपक्ष में पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध कर्म श्रद्धा के साथ किए जा रहे हैं। मार्कंडेय पुराण में अगर किसी का पुत्र ना हो तो पत्नी श्राद्ध कर्म कर सकती है। परिवार में पुरुषों के ना होने पर महिलाएं भी श्राद्ध कर्म करने की अधिकारी होती हैं। धर्मसिंधु ग्रंथ, मनुस्मृति, वायु पुराण, मार्कंडेय पुराण और गरुड़ पुराण में महिलाओं को तर्पण और पिंडदान करने का अधिकार बताया गया है। इसके अलावा वाल्मीकि रामायण में भी सीता जी ने राजा दशरथ के लिए पिंड दान किया था।

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बालाजी धाम काली माता मंदिर के ज्योतिषाचार्य डॉ. सतीश सोनी के अनुसार लोग अपने पितरों को ना भूलें इसलिए श्राद्ध की व्यवस्था शास्त्रों में बताई गई है। मार्कंडेय पुराण में कहा गया है। कि अगर किसी का पुत्र ना हो तो पत्नी बिना मंत्रों के श्राद्ध कर्म कर सकती है। पत्नी ना हो तो कुल के किसी भी व्यक्ति द्वारा श्राद्ध किया जा सकता है। इसके अलावा परिवार और कुल में कोई पुरुष ना हो तो सास का पिंडदान बहू कर सकती है।

गरुड़ पुराण कहता है कि अगर घर में कोई विवाहित बुजुर्ग महिला है तो युवा महिला से पहले श्राद्ध कर्म करने का अधिकार उसका होता है। महिलाएं श्राद्ध के लिए सफेद या पीले कपड़े पहन सकती हैं। केवल विवाहित महिलाओं को ही श्राद्ध करने का अधिकार है। श्राद्ध करते वक्त महिलाओं को कुश और जल के साथ काले तिल से तर्पण नहीं करना चाहिए केवल जल से तर्पण करना चाहिए।

सगा भाई भी कर सकता है श्राद्ध

डॉ. सोनी ने बताया की पुत्र या पति के नहीं होने पर कौन श्राद्ध कर सकता है। इस बारे में गरुड़ पुराण के ग्यारहवें अध्याय के अनुसार जेष्ठ पुत्र या कनिष्ठ पुत्र के अभाव में बहू पत्नी को श्राद्ध करने का अधिकार होता है। इसमें जेठ पुत्री या एकमात्र पुत्री भी शामिल है। अगर पत्नी भी जीवित ना हो तो सगा भाई अथवा भतीजा, भांजा, नाती, पोता आदि कोई भी श्राद्ध कर सकता है।


श्राद्ध पक्ष में पंचवली का है विशेष महत्व

ब्रह्म पुराण में पंचवली का बहुत महत्व बताया गया है। पंचवली में सबसे पहला भोजन गाय को खिलाएं, जिसे गोवली कहा जाता है। उसके बाद दूसरा ग्रास कुत्ते को दें, वहीं तीसरा भोजन कौवा को, जिसे काकवली कहते हैं। चौथा देववली जिसे जल में प्रवाहित करते हैं और अंतिम पांचवा ग्रास चीटियों के लिए जिसे पीपीलिकादि वली कहा जाता है।

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धन एवं समय अभाव में कैसे करें श्राद्ध

पदम पुराण में उल्लेख है। कि जातक अगर धनह्य अभाव एवं समय अभाव में श्राद्ध तिथि पर पितरों का स्मरण कर गाय को हरा घास खिलाएं तो उसकी पूर्ति होती है। वहीं विष्णु पुराण में कहा गया है कि अगर यह भी संभव ना हो तो श्राद्धकर्ता एकांत में जाकर पितरों का स्मरण कर दोनों हाथों को उठा कर प्रार्थना करें हे पितृण मेरे पास श्राद्ध के लिए उपयुक्त धन नहीं है। मेरे पास आपके लिए हृदय से श्रद्धा है। इसी से आप तृप्त हो जाएं तथा गीता का 7 अध्याय का पाठ का महत्व सुनाएं तो श्राद्ध कर्म की पूर्ति होती है।

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