बहुमंजिला इमारत के मालिकों को फायदा दे रही बिजली कंपनी

Gaurav Sen

Publish: Jun, 15 2018 01:15:59 AM (IST)

Gwalior, Madhya Pradesh, India
बहुमंजिला इमारत के मालिकों को फायदा दे रही बिजली कंपनी

अब कम लोड दर्शा कर लगवा रहे ट्रांसफार्मर,लो वोल्टेज से जूझ रहे उपभोक्ता

फोटो 18

ग्वालियर। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारी शहर के बहुमंजिला इमारतों के मालिकों को सीधा फायदा देने में जुटी है। बहुमंजिला इमारत में बिजली सप्लाई को लेकर बिना लोड चैक किए ही ट्रांसफार्मर स्वीकृत किए जा रहे हैं। बहुमंजिला इमारत में ५० किलोवॉट से कम लोड होने पर बिजली कंपनी स्वयं के स्तर से ट्रांसफार्मर रखवा सकती है। यह ट्रांसफार्मर का खर्च बिल्डिंग मालिक को नहीं देना होता है। शहर में इस नियम का गलत तरीके से पालन किया जा रहा है। हालांकि बिजली कंपनी लोड बढऩे पर भी एेसे भवनों को लोड दर्शाने में कोताही बरत रही है। इन बिल्डिंगों के उपभोक्ताओं को इन दिनों लो वोल्टेज का सामना करना पड़ रहा है।

गर्मी के सीजन में शहर में एेसे उपभोक्ता है जिन्हें लो वॉल्टेज की समस्या से जूझना पड़ रहा है। एक ही ट्रांसफार्मर से कालोनी के लोगों को बिजली दी जा रही है। एेसे ही ट्रांसफार्मर से एक बिल्डिंग में रहने वाले एक से अधिक उपभोक्ताओं को कनेक्शन दिए गए है। एेसे उपभोक्ता लो वॉल्टेज की समस्या से जूझ रहे हैं। यह लो वॉल्टेज आने के पीछे बिजली अफसरों द्वारा कम लोड के ट्रांसफार्मर रखवाकर अधिक ज्यादा उपभोक्ताओं को जोड़ा गए है। एेसा अधिकांश सिटी सेंटर, बहोड़ापुर, सिरोल रोड पर बहुमंजिला बिल्डिंग में यह स्थिति बन रही है।


इन बिल्डिंगों में लोड स्वीकृत किए जाने के दौरान बिजली कंपनी के अधिकारी जमकर घालमेल कर रहे हैं। लोड जांच के लिए जाने वाले अधिकारी ६० किलोवॉट की जगह ४० किलोवॉट दर्ज कर रहे हैं। इसी तरह की स्थिति बिजली कंपनी सीधे तौर पर बिल्डिंग मालिक को फायदा दे रहे हैं।
सरकारी जमीन पर लग रहे ट्रांसफार्मर
शहर में सरकारी जमीन पर नगर निगम से आम उपभोक्ताओं के हित की बात कहते हुए एनओसी ली जा रही है। इन ट्रांसफार्मर को रखवाकर सीधे बहुमंजिला बिल्डिंग के फ्लेटों में सप्लाई दी जा रही है। जबकि नियमानुसार बहुमंजिला इमारत के मालिक को निजी जमीन पर ट्रांसफार्मर रखवाना होता है। इस ट्रांसफार्मर का खर्च स्वयं के स्तर से उठाना होता है। बिजली अधिकारी साठगांठ करके पहले कम लोड स्वीकृत करते हैं। जब बात नहीं बनती तो सरकारी जमीन पर आम उपभोक्ताओं की जरूरत दर्शाकर निजी बिल्डिंगों में सप्लाई दे रहे हैं। इस तरह बिल्डिंग मालिक को सीधे तौर ट्रांसफार्मर रखवाने पर लाखों का फायदा होता है। यह स्थिति सराफा बाजार, दौलतगंज, राम मंदिर के पास स्थित पार्क में लगे ट्रांसफार्मर से कमर्शियल बिल्डिंग में दी जाने वाली बिजली सप्लाई, सिटी सेंटर, गोविंदपुरी, अलकापुरी तिराहा सहित कई जगह हैं।
"एक से अधिक उपभोक्ता एक भवन में रहते हैं। बिजली अफसर एेसे भवन का लोड जांचते हैं। कई भवनों का लोड शहर में ५० किलोवॉट से अधिक का है। फिर भी कम दर्शाकर बिजली अफसरों ने स्वयं के खर्च पर ट्रांसफार्मर लगवाए हैं। जबकि एेसे ट्रांसफार्मर को बिल्डिंग मालिक के खर्च पर उनकी ही जमीन पर लगना चाहिए।"
डॉ. प्रवीण अग्रवाल, पूर्व सदस्य राज्य सलाहाकार, समिति मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग

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