कोरोना संक्रमण काल के दो वर्षों में 40 फीसदी घट गया लघु उद्योगों का उत्पादन, उद्यमियों का कहना - फिर से अपनी लय में उठ खड़े होंगे

- वल्र्ड एमएसएमइ डे आज

By: Narendra Kuiya

Published: 27 Jun 2021, 09:07 AM IST

ग्वालियर. एमएसएमइ यानी सूक्ष्म, लधु और मध्यम उद्यम हमारी अर्थव्यवस्था में जान फूंकते हैं। सरकार भी इन्हें बढ़ावा देने की प्रयास करती है। कोरोना संक्रमण काल के दो वर्षों में कहीं ना कहीं एमएसएमइ पर असर देखने को मिला है। उद्यमियों का कहना है कि इन दो वर्षों में करीब 40 फीसदी उत्पादन में गिरावट देखने को मिली है, लेकिन एक बार फिर से उद्योग धंधे अपनी लय में होंगे। इसके लिए सरकार को भी उनकी मदद करनी होगी। दुनियाभर में 27 जून यानी शनिवार को विश्व एमएसएमइ दिवस (वल्र्ड एमएसएमइ डे) मनाया जाएगा। वल्र्ड एमएसएमइ डे की स्थापना साल 2017 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा की गई थी। एमएसएमइ के स्थानीय और वैश्विक स्तर पर समावेशी व सतत विकास में योगदान के लिए इस दिवस की स्थापना हुई थी।

फैक्ट फाइल
- ग्वालियर, बानमोर और मालनपुर में करीब 3 हजार सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग हैं।
- इन सभी से करीब 50 हजार से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से रोजगार मिलता है।
- इनका सालाना टर्नओवर करीब एक हजार करोड़ रुपए है।

फर्नीचर क्लस्टर में 100 निवेशक करेंगे निवेश
प्रदेश के एमएसएमइ मंत्री ओमप्रकाश सखलेचा ने बताया कि ग्वालियर-चंबल संभाग के सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों के लिए सरकार प्लान कर रही है। इसी संदर्भ में 23 जून को दिल्ली में बैठक की थी। उसमें तय किया गया है कि ग्वालियर और मुरैना के बीच फर्नीचर क्लस्टर बनाया जाएगा। इसके लिए दो जुलाई को विजिट भी करेंगे। यहां 100 निवेशक निवेश करेंगे तथा करीब 10 हजार लोगों को रोजगार प्राप्त होगा। इसके लिए 200 हैक्टेयर जमीन चिन्हित की है। ये एमएसएमइ विभाग को ट्रांसफर की जाएगी। इस फर्नीचर क्लस्टर में चाइना से बेहतर और सस्ता फर्नीचर तैयार किया जाएगा। यहां 2022 तक करीब 5 हजार करोड़ का फर्नीचर बनाने की योजना है।

जिलाधीश नहीं जिला प्रबंधक दे सरकार
प्रदेश में एमएसएमइ यूनिट एक लाख 10 हजार मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट हैं तथा ढ़ाई लाख से ऊपर सर्विस इंडस्ट्री हैं। एमएसएमइ में नए उत्पाद बाजार में लाने वाला हमेशा आगे जाएगा, इसके लिए नए मार्केट भी तलाशने होंगे। प्रदेश सरकार ने प्रबंधन नियम में उदारता की है, लेकिन एक्सीक्यूशन करने वाले लोग परेशान करते हैं। इसके लिए कुछ समय पूर्व हमने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र भी लिखा है। हमें जिलाधीश न देते हुए जिला प्रबंधक देना चाहिए। कोरोना ने एमएसएमइ को खासा परेशान किया है, अब धीरे-धीरे इसमें सुधार आएगा। हम दोबारा बुलंदी के साथ खड़े होंगे।
- विपिन जैन, महासचिव, मप्र स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज ऑर्गेनाइजेशन

काम करना मुश्किल हुआ है
भारत के उत्पादन का 40 फीसदी लघु व मध्यम उद्योगों से होता है। इसके साथ ही देश के कुल निर्यात का 50 फीसदी योगदान भी यहीं से है। एमएसएमइ ऐसा सेक्टर है जो निवेश के विरूद्ध रोजगार भी उपलब्ध कराता है। कोरोना काल में लघु उद्योगों को माल बेचने में परेशानी हुई, साथ ही उत्पादन में भी दिक्कत हुई, वहीं बाजारों के बंद रहने से माल भी नहीं बिक पाया। पिछले दो सालों में काम करना भी मुश्किल हो गया है। कुल उत्पादन में 40 फीसदी की गिरावट देखने को मिल रही है। ऐसे में लाभ भी कम हुआ है।
- केआर अष्ठाना, पूर्व अध्यक्ष, बानमोर औद्योगिक क्षेत्र

खासा योगदान है हमारा
कोरोना काल में जो कच्चा माल उद्योगों को चाहिए था, वह उपलब्ध ही नहीं हो पाया। ऐसे में उत्पादन पर खासा असर पड़ा है। सरकार को लघु उद्योगों को उबारने के लिए कुछ रियायतें प्रदान करनी चाहिए। खासकर इनमें काम करने वाले कर्मचारियों के हितार्थ चलायी जा रही योजनाओं पर अमल होना चाहिए। आर्थिक विकास में सूक्ष्म व लघु उद्योगों का खासा योगदान है।
- सोबरन सिंह, अध्यक्ष, बाराघाटा औद्योगिक क्षेत्र

विश्व का मैन्यूफैक्चरिंग हब बनेगा
एमएसएमइ भारत में आर्थिक विकास की रीढ़ की हड्डी है। ये पूरे भारत में सबसे अधिक रोजगार भी प्रदान करती है। एमएसएमइ उद्योगपति वो है जो अपनी पूंजी लगाकर रोजगार निर्माण करता है, इसलिए वह जुझारू भी होता है और साहसी भी। कोरोना जैसी महामारी उसकी रफ्तार को कुछ समय के लिए तो रोक सकती है पर ये अल्प विराम होगा, पूर्ण विराम नहीं। मुझे पूरा विश्वास है कि भविष्य में देश का आर्थिक जगत और एमएसएमइ दोनों दोगुनी रफ्तार से आगे बढ़ेंगे और देश को विश्व का मैन्यूफैक्चरिंग हब बनाकर ही दम लेंगे।
- आशीष वैश्य, अध्यक्ष, श्यामा प्रसाद औद्योगिक क्षेत्र

Narendra Kuiya Reporting
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