जॉब क्रिएटर बनने छोड़ी नौकरी, युवाओं को स्टार्टअप से जोड़ा

प्रदेश में फैलाया बिजनेस, दो साल में देशभर से जुडऩे का लक्ष्य

By: Mahesh Gupta

Published: 16 Sep 2021, 10:41 AM IST

ग्वालियर.

वर्तमान में युवाओं की सोच का दायरा बढ़ा है। वे अब नौकरी पाने के बजाए जॉब क्रिएटर बनना चाहते हैं। वे कोई ऐसा स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं, जो समाज के लिए नया और सुविधा से जुड़ा हो। इसी सोच के साथ प्रदेश के युवाओं ने अच्छे पैकेज की नौकरी छोड़ स्टार्टअप शुरू किया और युवाओं को अपने से जोड़ा। इन्हीं में से एक हैं ग्वालियर के सुशांत सांघी, जिन्होंने मल्टीनेशनल कंपनी की जॉब छोड़ ऑफिस स्टेशनरी का स्टार्टअप शुरू किया। आज वह ग्वालियर, भोपाल, शहडोल में ५० से अधिक युवाओं को रोजगार दे रहे हैं।

स्टेशनरी के बाद जल्द ई-नोट बुक्स लॉन्च होगी
सुशांत ने बताया कि मैंने बीटेक के बाद मेरठ की एक मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब की। नौकरी करते हुए मुझे लगा कि जितना समय मैं यहां दे रहा हूं। उससे मैं खुद का एक ब्रांड शुरू कर सकता हूं, जिससे कई युवाओं को जोड़ सकूंगा। इससे मैं कुछ नया भी कर पाऊंगा। अपने इन ख्यालों को लक्ष्य बनाकर अगले ही दिन रिजाइन दे दिया। इस दौरान अन्य कंपनीज से और अच्छे पैकेज के ऑफर आए, लेकिन मैंने अपने मन की सुनी और ऑफिस स्टेशनरी का स्टार्टअप (क्रॉस्टबस्र्ट) शुरू किया। मेरी टीम ने गवर्नमेंट एवं प्राइवेट ऑफिसेस में स्टेशनरी पहुंचाई। कुछ समय बाद ही मैंने इलेक्ट्रॉनिक स्टेशनरी भी जोड़ी। अब आगे ई-नोट बुक्स लेकर आ रहा हूं। मेरा बिजनेस ग्वालियर, भोपाल, शहडोल तक पहुंच चुका है। आज मेरे २०० से अधिक क्लाइंट हैं। मेरी प्लानिंग आने वाले समय में हर शहर में ५००० क्लाइंट बनाने की और देशभर में पहुंचने की है। इसके लिए मेरी टीम काम कर रही है। आज मेरा मंथली टर्नोवर ५ लाख तक पहुंच चुका है।
सुशांत सांघी, फाउंडर, क्रॉस्टबस्र्ट ग्वालियर

कपल ने छोड़ी हाईपेड जॉब, अब ऑर्गेनिक प्रोडक्ट को कर रहे प्रमोट
कुछ नया करने और लोगों को प्रकृति से जोडऩे की चाह में हमने अपनी हाईपेड जॉब छोड़ दी। पिछले साल लॉकडाउन में अपने घर आए। इस बीच गाय के गोबर को उपयोगी बनाने और पैसा कमाने का तरीका निकाला। गोबर से दिया, गमले और लकड़ी बनाने वाली मशीनें बनाई और उन्हें गौ पालकों व रोजगार शुरू करने वालों को कम कीमतों पर उपलब्ध कराईं। परिणामस्वरूप सैकड़ों की संख्या में आज लोग हमसे जुडक़र गौ संवर्धन में सहयोग कर पैसा भी कमा रहे हैं। वहीं ऑर्गेनिक खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिए किसानों को प्रेरित किया। उनसे फसल खरीदकर ऑनलाइन व ऑफलाइन बड़ा बाजार उपलब्ध कराया, जिससे किसानों को बड़ा लाभ होने लगा है। हम प्राकृतिक भारत के कॉन्सेप्ट पर काम कर रहे हैं, जिसमें गौ संरक्षण संवर्धन और रसायन रहित अनाज, फल आदि को बढ़ावा देना है।
राम चौकसे, नमिता चौकसे, आइटी एक्सपर्ट, जबलपुर

लंदन की नौकरी छोड़ गांव से शुरू किया नया कॅरियर
अमिताभ ने किसानों के लिए एक प्लेटफॉर्म तैयार किया। जहां वे फसल से लेकर खेती से जुड़ी चीजें खरीद और बेच सकते हैं। इस प्लेटफॉर्म के कारण बिचौलियों की भूमिका खत्म हो गई। इससे पहले वे लंदन में थे। 2014 में नौकरी छोडक़र भारत आए और रूरल इकोनॉमी को बेहतर करने के काम शुरू किया। इनके साथ कई किसान और युवा जुड़े हैं। यह एक रोल मॉडल के रूप में सामने आए। इसे अभिदय नाम दिया है।
अमिताभ सोनी, फाउंडर, अभिदय भोपाल

Mahesh Gupta
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