खदानों में भरा है बारिश का पानी, सुरक्षा के नहीं हैं इंतजाम, बढ़ सकते हैं हादसे

 

बिलौआ में प्रशासनिक टीमों ने जो कमियां बताईं वे अभी तक नहीं हुई पूरीं

By: prashant sharma

Published: 27 Jul 2020, 06:26 PM IST

ग्वालियर. लॉकडाउन खुलने से पहले शर्तों के साथ शुरू हुए क्रेशरों पर अभी तक इंतजाम पूरे नहीं किए गए हैं। अब बारिश के सीजन में असुरक्षित खदानों के गड्ढों में पानी भरने से जनहानि हो सकती है। इस बीच लॉकडाउन के समय करीब 72 दिन तक बंद रहने के समय भी किसी क्रेशर संचालक ने कमियों को दूर करने की कोशिश नहीं की। इससे ग्रामीणों को लगातार खतरा बना हुआ है, यहां तक कि माइनिंग एरिया के आसपास की कृषि भूमि भी भी पथरीली होने लगी है। सरकारी नियमों की उपेक्षा के साथ राजनीतिक रसूख के साथ संचालित हो रहे क्रेशरों की स्थिति देखने के लिए बीते कुछ दिनों में भी अधिकारियों ने निरीक्षण किए हैं, लेकिन निर्देशों का पालन नही करा पाए हैं। बीते दिवस अपर कलेक्टर टीएन सिंह, माइनिंग ऑफिसर गोविंद शर्मा सहित प्रदूषण विभाग के अधिकारियों ने बिलौआ में लोक सुनवाई कर समस्याओं को जानने के साथ 3 क्रेशरों के पर्यावरण एनओसी की औपचारिक प्रक्रिया की थी।

मंत्री ने जताई थी लिखित आपत्ति
बीते वर्ष कांग्रेस सरकार में महिला बाल विकास मंत्री और वर्तमान में भाजपा सरकार में भी महिला बाल विकास मंत्रालय संभाल रहीं तत्कालीन डबरा विधायक इमरती देवी सुमन ने बिलौआ में संचालित क्रेशरों से आम जन के स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव का खतरा बताया था। इसके साथ ही आसपास की खेती और पर्यावरण के लिए भी क्रेशरों के संचालन से हो रही हानि का उल्लेख किया गया था। इसके बाद तत्कालीन कलेक्टर अनुराग चौधरी ने अपर कलेक्टर, डबरा एसडीएम, माइनिंग ऑफिसर और प्रदूषण बोर्ड के अधिकारियों की टीम को बिलौआ निरीक्षण के लिए भेजा था। इस निरीक्षण की रिपोर्ट में अधिकारियों ने माइनिंग एरिया मेंं लगभग सभी क्रेशरों को पर्यावरण और आमजन के लिहाज से असुरक्षित बताया था।

एनजीटी के निर्देश भी दरकिनार
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में क्षेत्रीय रहवासी द्वारा याचिका दायर करने के बाद एनजीटी ने विशेषज्ञों के दल से क्षेत्र का निरीक्षण कराया था। इस निरीक्षण के बाद 16 बिंदुओं का पालन करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन इनका पालन अभी तक नहीं हुआ है।
-2015 में भी क्रेशर संचालकों को पर्यावरण संरक्षण के सभी नियमों का पालन करने के निर्देश दिए गए थे। इनका पालन करने में किसी भी क्रेशर संचालक ने रुचि नहीं दिखाई।
साल की शुरुआत में जिन शर्तों को दो महीने में पूरा करने के साथ क्रेशर संचालन की अनुमति दी गई थी, उसको भी चार महीने बीत चुके हैं, शर्तों अभी तक पूरी नहीं हुई हैं।

इन कमियोंं को नहीं किया जा रहा दूर
माइनिंग एरिया में लगभग सभी क्रेशरों पर मानक के अनुसार डस्ट कवर नहीं लगाए गए हैं।
कन्वेयर बेल्ट असुरक्षित तरीके से चलती हैं, जिसमें कभी भी किसी मजदूर को शारीरिक हानि हो सकती है।
हरियाली को बढ़ाने के लिए सही प्रयास नहीं किए गए हैं।
खदानों के गड्ढों के आसपास सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं।
क्रेशर क्षेत्र के आसपास की भूमि पर पथरीली धूल की परत लगातार जम रही है।
आसपास के बड़े पेड़ों की पत्तियों पर भी डस्ट जमा हो जाती है।
माइनिंग क्षेत्र के आसपास मौजूद बस्तियों में भी बच्चों को खतरा बना रहता है।

"बिलौआ माइनिंग एरिया को लेकर जो निर्देश जारी हुए थे, उनकी रिपोर्ट और प्रतिवेदन मंगवाकर पूरा परीक्षण करेंगे। इसके बाद समुचित कार्रवाई की जाएगी। *****
कौशलेन्द्र विक्रम सिंह, कलेक्टर

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