Rakhi ke shubhmuhurat : खबर पढ़ कर जानिए भाई को राखी बांधने के सर्वश्रेष्ठ मुहुर्त, देश की आजादी के साथ लें पावन पर्व का आनन्द

Rakhi ke shubhmuhurat : खबर पढ़ कर जानिए भाई को राखी बांधने के सर्वश्रेष्ठ मुहुर्त, देश की आजादी के साथ लें पावन पर्व का आनन्द

Gaurav Sen | Publish: Aug, 14 2019 08:08:29 PM (IST) Gwalior, Gwalior, Madhya Pradesh, India

लक्ष्मी नारायण योग में भाई की कलाई पर बहने बांधेगी रक्षा सूत्र

ग्वालियर। इस बार रक्षाबंधन 15 अगस्त के दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर bhadegi रक्षा सूत्र बांधकर भाई की लंबी उम्र की कामना करेंगी। वही भाई भी उसे रक्षा का वचन देगा इस बार राखी बांधने के लिए बहुत ही शुभ मुहूर्त रहेंगे। क्योंकि काफी लंबे अरसे के बाद राखी पर भद्रा का साया भी नहीं होगा। इस बार लंबे समय बाद सावन के महीने में 15 अगस्त के दिन चंद्रप्रधान श्रवण नक्षत्र में स्वतंत्रता दिवस रक्षाबंधन का संयोग एक साथ बना है।

ज्योतिषाचार्य पंडित सतीश सोनी के अनुसार श्रावणी पूर्णिमा नारियल पूर्णिमा रक्षाबंधन पर 7 साल बाद लक्ष्मी नारायण योग, सूर्य बुध आदित्य योग और 4 दिन पहले गुरु के मार्गी होने से इसकी शुभता और अधिक बढ़ गई है। रक्षाबंधन के दिन श्रवण नक्षत्र सौभाग्य योग बब करण तथा मकर राशि के चंद्रमा के साथ में रक्षाबंधन का त्यौहार धूमधाम से मनाया जाएगा।

रक्षाबंधन का पर्व इस बार भद्रा के दोष से मुक्त भी रहेगा खास यह है कि गुरुवार के दिन श्रवण नक्षत्र सौभाग्य योग संयोग बहुत ही कम बनता है। इस दिन है, हय ग्रीब जयंती भी है साथ ही रात में 9:40 से पंचक की शुरुआत हो रही है। शुक्र व बुध के संयोग से लक्ष्मी नारायण योग वही सूर्य बुध से बुधादित्य योग भी है।

  • राखी बांधने का शुभ मुहूर्त इस प्रकार रहेंगे सुबह 5:49 से शुरू होगा और शाम 5:58 तक रहेगा पूरे दिन चलने वाले शुभ मुहूर्त पर बहने अपने भाई को इस समय में राखी बांध सकती हैं। वैसे सुबह 6:00 से 7:30 बजे तक और सुबह 10:30 से दोपहर 3:00 बजे तक राखी बांधने का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त है।

सावन के पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 14 अगस्त दोपहर बाद 3:45 से ही हो जाएगी और इसका समापन 15 अगस्त शाम 5:58 पर होगा।


रक्षा सूत्र विजय श्री का प्रतीक भी है
रक्षाबंधन के दिन देवराज इंद्र को देवासुर संग्राम के लिए विदा करते समय उनकी पत्नी शची ने उनकी भुजा पर रक्षा सूत्र बांधा था यह सूत्र एक विश्वास और आस्था का प्रतीक था विश्वास फलित हुआ और इंद्र विजय होकर लौटे प्राचीन काल में योद्धाओं की पत्नियां रक्षा सूत्र बांधकर उन्हें युद्ध भूमि में भेजती थी ताकि वह विजय होकर लौटे वैदिक युग से प्रचलित रक्षाबंधन का पर्व शिक्षा स्वास्थ्य सौंदर्य तथा संस्कृत मूल्यों की स्थापना एवं पुनः स्मरण कराता है। जिसे प्रायश्चित एवं जीवन मूल्यों की रक्षा के लिए संकल्प पर्व के रूप में मनाया जाता है। यही जीवन की सुख एवं समृद्धि का आधार है रक्षाबंधन अर्थ है रक्षा के लिए जाना है सूत्र का प्रतीक है पवित्र प्रेम की पहचान का भाई और बहन के अटूट विश्वास का

कुछ इस तरह हुई थी रक्षाबंधन की शुरुआत
रक्षाबंधन के बारे में अनेक कथाएं प्रचलित हैं कहा जाता है कि देवासुर संग्राम में जब देवता निरंतर पराजित होने लगे तब देवराज इंद्र ने अपने गुरु बृहस्पति से विजय प्राप्त की इच्छा प्रकट की एवं इसके लिए उपाय सुलझाने के लिए प्रार्थना भी की देवगुरु बृहस्पति ने श्रावण पूर्णिमा के दिनआक के रेशों से राखी बनाकर इंद्र की कलाई पर बांधी दी। यह रक्षा कवच इंद्र के लिए वरदान साबित हुआ। इस प्रकार मानव संस्कृति में प्रथम रक्षा सूत्र बांधने वाले बृहस्पति देव गुरु के पद पर प्रतिष्ठित हुए तभी से रक्षा सूत्र बांधने का प्रचलन प्रारंभ हुआ।

कहीं नारियल पूर्णिमा तो कहीं कजरी पूनम के रूप में मनाया जाता रक्षाबंधन
भारत के अन्य राज्यों में रक्षाबंधन कई और नामों से भी मनाया जाता है उत्तर भारत में रक्षा बंधन को श्रावण पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है तो वहीं मध्य भारत में रक्षा बंधन के नाम से जाना जाता है तथा महाराष्ट्र में राखी का त्यौहार नारियल पूर्णिमा के नाम से मनाया जाता है इसके अलावा दक्षिण भारत तमिलनाडु और केरला के साथ इस पर्व को अवनी अवित्तम कहते हैं। रक्षा सूत्र बांधने से मिलती है ब्रह्मा विष्णु और महेश की कृपा होता है सभी दुर्गुणों का नाश होता है।

रक्षा सूत्र बांधना सेहत के लिए होता है अच्छा
आयुर्वेद के अनुसार कलाई पर रक्षा सूत्र बांधने से त्रिदोष वात, पित्त और कफ का नाश होता है क्योंकि आयुर्वेद के अनुसार शरीर की सभी नशे कलाई से होकर गुजरती हैं।

आध्यात्मिक के अनुसार कलाई पर रक्षा सूत्र राखी बंधवाने से ब्रह्मा विष्णु और महेश तथा लक्ष्मी सरस्वती और दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है ब्रह्मा की कृपा से कीर्ति विष्णु की कृपा से सुरक्षा और महेश की कृपा से सभी धर्मों का नाश होता है।

मनोवैज्ञानिक के अनुसार रक्षा सूत्र बंधवाने से व्यक्ति को मानसिक शक्ति मिलती है इसके साथ ही व्यक्ति कभी गलत रास्ता पर नहीं जाता उसके मन में शांति व पवित्रता बनी रहती है।

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