बस एक क्लिक में पढ़े दिनभर की खबर और रहें अपडेट

shyamendra parihar

Publish: Sep, 16 2017 06:16:47 (IST)

Gwalior, Madhya Pradesh, India
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जहां आपके मतलब की हर खबर है। साथ ही खबरें वो जो आज पूरे दिन छाई रहीं। खबरें वो भी जो आपको जानना बहुत जरूरी है।

ग्वालियर। दिन के बिजी शेड्यूल में अगर आप किसी छोटी-बड़ी खबर को मिस कर गए हैं। तो टेंशन की बात नहीं है। हम आपकी सहूलियत के लिए आपको खबरों का पूरा पैकेज उपलब्ध करवा रहे हैं। जहां आपके मतलब की हर खबर है। साथ ही खबरें वो जो आज पूरे दिन छाई रहीं। खबरें वो भी जो आपको जानना बहुत जरूरी है।

 

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स्कूल में पढ़ते हैं 124 बच्चे और टीचर कोई भी नहीं, इस स्कूल के हाल सुनकर आप भी चौंक जाएंगे

स्कूल में पढऩे के लिए यूं तो 124 बच्चे अध्ययनरत हैं। लेकिन उनको पढ़ाने के लिए स्कूल में कोई शिक्षक नहीं है। कुछ ऐसी ही स्थिति है श्योपुर विकासखंड क्षेत्र के ग्राम उतनवाड़ स्थित शासकीय माध्यमिक स्कूल की। जहां पदस्थ दो शिक्षकों में से एक शिक्षक बीमार होने से स्कूल नहीं पहुंच रहा है।
वहीं दूसरे शिक्षक को दूसरे गांव के स्कूल में पदस्थ कर दिया गया है। हालांकि स्कूल में एक अतिथि शिक्षक पढ़ाने पहुंच गया है। लेकिन उसके द्वारा सभी बच्चों को एक साथ पढ़ाना संभव नहीं है। खास बात यह है कि ऐसी स्थितियां पिछले दो तीन दिन से बन रही है। लेकिन इसके बाद भी शिक्षा विभाग के जिम्मेदार कोईध्यान नहीं दे रहे है।


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फोटो में दिख रहे बच्चों की दर्द भरी कहानी सुनकर आप भी रो देंगे, दुखों के बीच बसर हो रही है जिंदगी

बिना मां-बाप के बच्चों के जीवन की कल्पना से लोग सिहर उठते हैं, जब हांसिलपुर के खैरघटा की द्विवेती ने इस पीड़ा को तीन साल से झेला है। लेकिन जिले में अकेली द्विवेती ही ऐसी नहीं है, जो आज कष्टों भरा जीवन जी रही है। विजयपुर विकासखण्ड के किशनपुरा पंचायत में संजय (11) साल और रामकेश (13) साल भी हैं, जो मां बाप के गुजर जाने के बाद बिना सरकारी मदद के अपने छोटे भाई बहनों का भरण पोषण कर रहा है।


हालांकि यह बताने की जरूरत नहीं है कि ऐसा यह कष्टों के बीच कर पा रहे हैं। क्योंकि नाबालिग बालकों को मजदूरी भी ठीक से नहीं मिलती है। इसदौरान कई बार पडोसियों से भी रोटी मांगना पड़ती है तो कई बार भूखा भी सोना पड़ता है। संजय पुत्र कमलेश आदिवासी उम्र 11 साल छह भाई बहन हैं। जिसके पिता और मां दोनों ही छह माह पूर्व चल बसे। तब से यह लोग गांव वालों के सहारे और संजय द्वारा मजदूरी कर लाए जाने वाले रुपयों के सहारे जीवन जी रहे हैं।

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