MP में यहां सरकारी स्कूल में लैब की टेबल खा गईं दीमकें, सच्चाई सुनकर दंग रह जाएंगे

MP में यहां सरकारी स्कूल में लैब की टेबल खा गईं दीमकें, सच्चाई सुनकर दंग रह जाएंगे

shyamendra parihar | Publish: Jan, 13 2018 06:44:49 PM (IST) Gwalior, Madhya Pradesh, India

बोर्ड परीक्षाओं के लिए प्रायोगिक परीक्षाओं का कार्यक्रम जारी करने के बावजूद स्कूलों में अनुकूल माहौल नहीं बन पा रहा है।

ग्वालियर/मुरैना। बोर्ड परीक्षाओं के लिए प्रायोगिक परीक्षाओं का कार्यक्रम जारी करने के बावजूद स्कूलों में अनुकूल माहौल नहीं बन पा रहा है। जबकि सरकारी स्कूलों के लिए प्रायोगिक परीक्षाएं 12 फरवरी से और प्राइवेट स्कूलों के लिए सात मार्च से होना तय किया गया है। लेकिन दर्जनों सरकारी व निजी स्कूलों के पास अपनी प्रायोगिक लैब नहीं हैं। हाईस्कूल एवं हायर सेकंडरी बोर्ड परीक्षाओं में जिले भर में करीब ६० हजार परीक्षार्थी शामिल होते हैं।

 

National Highway पर वन विभाग और रेत माफिया के बीच हुई झड़प, पथराव कर ट्रैक्टर ट्रॉली भाग ले गए

 

इनमें से आधे परीक्षार्थियों को प्रायोगिक परीक्षाओं के दौर से भी गुजरना होता है। लेकिन प्रायोगिक परीक्षाएं महज औपचारिकता के लिए होती हैं। सरकारी स्कूलों में भी पर्याप्त सुविधायुक्त लैब नहीं हैं। प्राइवेट स्कूलों मेंं तो गिने-चुने पर ही लैब की सुविधा हैं। जिन स्कूलों के पास लैब नहीं है, वे जुगाड़ से काम निकालते हैं।

प्रायोगिक परीक्षाओं के अंकों के आधार पर ही कई निजी स्कूल अपना परिणाम सुधार लेते हैं। बोर्ड कक्षाएं संचालित करने की जिन निजी स्कूलों पर अनुमति है उनमेें से भी कइयों के पास पर्याप्त सुविधाएं नहीं है। बोर्ड परीक्षाओं में निजी स्कूलों में अकस्मात छात्र सं?या में वृद्धि का मामला हालांकि सरकार तक सुर्खियों में है। लेकिन हालात में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा है।

नहीं हो रहा भौतिक सत्यापन: निजी स्कूलों का विभागीय अधिकारी भौतिक सत्यापन नहीं कर रहे हैं। देहाती इलाकों में संचालित कई स्कूलों में नौवीं के बाद की कक्षाएं ही संचालित नहीं होती हैं। क्योंकि न तो उनके पास योग्य और पर्याप्त शैक्षणिक स्टाफ है और न ही स्थान व सुविधाएं। प्रयोगशालाएं तो गिने-चुने स्कूलों के पास ही हैं।

कई स्कूलों के पास बैठने को व्यवस्था नहीं है, लेकिन बच्चों की संख्या अधिक दर्ज है। १०वीं, ११वीं एवं १२वीं की कक्षाएं कई स्कूलों में लगती ही नहीं है। स्कूल में नाम दर्ज कराने के बाद बच्चे कोचिंग पर जाना शुरू कर देत हैं।

पढ़ाई का पूरा आधार ही कोचिंग होता है। इसीलिए कई निजी स्कूलों में स्टॉफ भी पर्याप्त योग्य नहीं होता है। प्रायोगिक परीक्षाओं के लिए समन्वय संस्था शासकीय उत्कृष्ट उमावि क्रमांक-एक को बनाया गया है। जबकि उसके प्राचार्य को समन्वय अधिकारी बनाया गया है। ***** संबंध में डिप्टी कलेक्टर व प्रभारी डीईओ ,एसके जाधव ने बताया कि निजी स्कूलों में निरीक्षण किए जा रहे हैं, जहां लैब की कमी है या अव्यवस्थित हैं, वहां निर्देश दिए जा रहे हैं।


"लैब तो काम कर रही है। टेबल को दीमक खा गई है। जो उपलब्ध व्यवस्थाएं हैं, उसी से काम चलाया जा रहा है। विद्यार्थियों से ली जाने वाली फीस से ही लैब संचालित हो रही हैं। बजट सरकार से मिलता नहीं।"
आरएल सिकरोडिय़ा, प्राचार्य शाउमावि क्रमांक-०२

फैक्ट फाइल
95 सरकारी हाईस्कूल संचालित हैं जिले में।
134 निजी हाईस्कूल संचालित हैं जिले में।
70 शास. हायर सेकंडरी स्कूल हैं जिले भर में।
117 निजी हायर सेकंडरी स्कूल हैं जिले में।
2366 शासकीय प्रामावि संचालित हैं जिले में।
1758 निजी प्रामावि संचालित हैं जिले में।

Ad Block is Banned