गजब: ड्राइविंग लाइसेंस इश्यू से पहले ही हो गया एक्सपायर

आरटीओ कार्यालय अधिकारी बना रहे बहाना कह रहे फाइनल कॉपी निकालने से पहले नहीं किया चेक।


ग्वालियर। रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस (आरटीओ) ग्वालियर में लापरवाही का बड़ा कारनामा सामने आया है। कर्मचारियों द्वारा की गई लापरवाही से विभाग के हाईटेक होने के ढर्रे की पोल खुल गई है। विभाग द्वारा हाईटेक पर करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी नतीजा ढाक के तीन पात वाला ही रहा है।


इश्यू डेट 2016 की वैलेडिटी 2008 तक


हाल ही में ग्वालियर आरटीओ ने अजीबो-गरीब ड्राइविंग लाइसेंस जारी किया है। इसे देख कार्ड बनवाने वाले डबरा निवासी भारत भूषण शर्मा के होश उड़ गए। ड्राइविंग लाइसेंस जारी होने से पहले ही एक्सपायर हो गया है। ड्राइविंग लाइसेंस के कार्ड पर इश्यू डेट 5 अप्रैल 2016 है, लेकिन वैलेडिटी डेट 5 सितंबर 2008 है। लाइसेंस बनने करीब 8 साल पहले ही एक्सपायर हो गया। कर्मचारियों ने लाइसेंस की फाइनल कॉपी निकालने से पहले ठीक ढंग से चेक नहीं किया।


इस तरह तय होती है वैद्यता
किसी भी ड्राइविंग लाइसेंस की वैद्यता तय होने की प्रक्रिया है। आवेदक की डेट ऑफ बर्थ और नाम इनपुट किया जाता है। उसके हिसाब से सॉफ्टवेयर कार्ड पर वैद्यता तिथि अंकित कर देता है।


सॉफ्टवेयर की गलती
अधिकारियों का कहना है कि सॉफ्टवेयर की गलती से गलत तिथि कार्ड पर अंकित हो गई। इस तरह की गलती नहीं होती है। हालांकि जिस कर्मचारी ने कार्ड जारी किया था। उसको भी देखना चाहिए था। ड्राइविंग लाइसेंस के कार्ड स्मार्ट चिप कंपनी बनाती है। उसकी लापरवाही सामने आई है। कार्ड को ठीक तरह से चेक के बाद ही जारी किया जाता है।


"यह बड़ी गलती है। लाइसेंस कार्ड निकालने से पहले कर्मचारी को ठीक तरह चेक करना चाहिए। इसमें स्मार्टचिप कंपनी की भी लापरवाही है। मैं मामले को दिखवाता हूं। आवेदक का कार्ड बिना किसी फीस के फिर से बनाया जाएगा।"
अशोक निगम, आरटीओ, ग्वालियर
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rishi jaiswal
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