आत्म कल्याण के लिए पवित्र मन है सशक्त माध्यम

- हरिशंकरपुरम में धर्मसभा में बोले मुनि विहर्ष सागर

By: Narendra Kuiya

Published: 16 Mar 2020, 11:32 PM IST

ग्वालियर. ओम श्री शांतिनाथाय नम: मंत्र का उच्चारण करें तो कोरोना तो क्या कोई भी रोग नहीं होगा। जैन शाकाहारी हैं उन्हें कोरोना से भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है। आहार शुद्ध हो तो साधना शुद्ध होती है, साधना पवित्र हो तो मन पवित्र होता है। पवित्र मन आत्म कल्याण के लिए सशक्त माध्यम होता है। संसार के प्रत्येक धर्म में शुद्ध आहार को महत्वपूर्ण बताया है। उक्त उद्गार जैन मुनि विहर्श सागर महाराज ने सोमवार को हरिशंकरपुरम में धर्मसभा में व्यक्त किए। इस मौके पर मुनि विजयेश सागर एवं क्षुल्लक विश्वोत्तर महाराज मौजूद थे।
मुनि विहर्ष सागर ने कहा कि कोरोना वायरस का मूल अशुद्ध आहार ही है। आयंबिल से विकार दूर होता है, विकृति और आलस नहीं आता है। आत्म शुद्धि के लिए कम और गम खाना चाहिए। क्रोध आने पर झुकना स्वस्थ जीवन का प्रमुख आधार है। ब्लड प्रेशर एवं शुगर वाले भी संयम के साथ आराधना कर सकते हैं, ईश्वर रक्षा करता है। जिनशासन में आहार चर्या सूक्ष्म है। इस राह पर चले तो कभी भी डॉक्टर के पास नहीं जाना पड़ेगा। पवित्र ईमानदारी का धन ही आत्मा का कल्याण करता है। सात प्रकार की शुद्धि बिना पूजा सार्थक नहीं होती है। मन, अंग, शुद्धि आवश्यक है। सामयिक प्रतिक्रमण से मानव में समता नहीं आ रही है, यह चिन्तन का विषय है। मुनि विहर्ष सागर के प्रवचन 17 मार्च को सुबह 9 बजे से हरिशंकरपुरम में होंगे।

Narendra Kuiya Reporting
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