सोनिया गांधी के निजी सचिव से पंगा लेना पड़ा महंगा, बड़े डॉक्टर को सरकार ने किया बर्बाद!

सोनिया गांधी के निर्देश पर सरकार ने डॉ भल्ला को निपटा दिया

ग्वालियर/ सोनिया गांधी के निजी सचिव से एक बड़े डॉक्टर को पंगा लेना महंगा पड़ा गया। हालांकि ये विवाद पुराना है। मगर ये कार्रवाई उसी से जोड़कर देखा जा रहा है। खामियाजा यह भुगतना पड़ा कि डॉक्टर को सरकार ने पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है। ग्वालियर शहर में उनके विशाल अस्पताल को तोड़ दिया गया है। सरकार से निर्देश मिलते ही शहर के बड़े अफसरों ने भी इस आड़ में डॉक्टर भल्ला से अपनी दुश्मनी साध ली है। हाईकोर्ट से स्टे हटते ही निगम के अमला ने सहारा अस्पताल को ध्वस्त कर दिया।

हालांकि प्रशासन ने इस कार्रवाई को अवैध निर्माण से जुड़ा बता रही है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद यह कार्रवाई की गई है। लेकिन इस विवाद के पीछे की इनसाइड स्टोरी कुछ और है। अगर अवैध था तो फिर इतने सालों में अस्पताल पर सरकार, निगम और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने कार्रवाई क्यों नहीं की। डॉ एएस भल्ला मध्यप्रदेश के बड़े डॉक्टर हैं। ग्वालियर में वह डॉक्टरों की मुखर आवाज हैं।

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सोनिया गांधी के निजी सचिव से था विवाद
डॉ भल्ला के साथ सोनिया गांधी की निजी सचिव अर्चना डालमिया का विवाद था। विवाद ग्वालियर डीपीएस के टाइटल को लेकर था। अर्चना डालमिया डीपीएस की वाइस प्रेसिडेंट हैं। अर्चना डालमिया कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की निजी सचिव हैं। अर्चना डालमिया के साथ डॉ भल्ला का इसी स्कूल के टाइटल को लेकर विवाद चल रहा था। इसे लेकर डॉ भल्ला से अर्चना डालमिया का विवाद था। डॉ भल्ला ने 9 अक्टूबर 2018 को पुरानी छावनी थाने में अर्चना डालमिया समेत कई लोगों पर केस दर्ज करवाई थी।

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बाद में केस खत्म
जब डॉ भल्ला और डालमिया के बीच यह विवाद चल रहा था, तब मध्य प्रदेश में बीजेपी की सरकार थी। दिसंबर 2018 में मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार बन गई। सरकार बनते ही मार्च 2019 में ग्वालियर पुलिस ने इस केस में खात्मा रिपोर्ट लगा दी। उसके बाद से डालमिया डॉ भल्ला पर हावी होती गईं। और नहीं तो उन्होंने कोर्ट से डॉ एएस भल्ला को मानहानि का नोटिस भिजवा दिया।

सोनिया गांधी ने दिए विवाद सुलझाने के निर्देश
अर्चना डालमिया अब डॉ भल्ला से आरपार की मूड में थी। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनते ही उनकी चांदी आ गई। इस बीच कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को इस मामले में इंटरफेयर करना पड़ा। उन्होंने अर्चना डालमिया के कहने पर प्रदेश की सरकार को फोन कर इस विवाद को सुलझाने को कहा। आलाकमान का ऑर्डर मिलते ही सरकार ने विवाद सुलझाने के बजाए, डॉक्टर को निपटाने में जुट गई।

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कई विभागों ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी
ग्वालियर पुलिस ने अर्चना डालिमिया के खिलाफ केस तो बंद कर दिया। उल्टे भल्ला के खिलाफ कई विभागों ने जांच शुरू कर दी। इस दौरान यह पाया गया कि उनका सहारा अस्पताल अवैध बना है। निगम अमले ने अस्पताल तोड़ने की कार्रवाई छह दिसंबर को शुरू की। लेकिन हाईकोर्ट ने स्टे लगा दिया तो कार्रवाई रुक गई। सोमवार को हाईकोर्ट ने जैसे ही स्टे हटाया। प्रशासन अमले ने अस्पताल को तहस-नहस कर दिया।

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अफसरों ने उठाया फायदा
दरअसल, पिछले दिनों डॉ भल्ला और ग्वालियर के प्रशासनिक अधिकारियों में भिड़ंत हुई थी। इसके अगुआ डॉ एएस भल्ला ही थे। शहर के डॉक्टरों ने कह दिया था कि जिले के कमिश्नर और कलेक्टर या फिर अन्य अधिकारियों को अब सर नहीं कहेंगे। इससे जिले के अफसर चिढ़ गए थे। आनन-फानन में अफसरों ने शहर के पचास से ज्यादा अस्पतालों में कमियां निकालकर नोटिस जारी कर दिया था। लेकिन डॉक्टर झुकने को तैयार नहीं थे।

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कहा जा रहा है कि उस समय डॉक्टरों को लीड डॉ एएस भल्ला ही कर रहे थे। ऐसे में सरकार से निर्देश मिलते ही अफसरों ने भी अपने खुनश निकाले। यहीं नहीं डॉ भल्ला की पत्नी मनजीत भल्ला ग्वालियर में ही सोफिया होमियोपैथिक मेडिकल कॉलेज चलाती हैं। उसके कुछ हिस्से भी तोड़े गए हैं। अस्पताल पर जब कार्रवाई चल रही थी, तब वहां कई मरीज भर्ती थे।

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बीजेपी ने की निंदा
वहीं, डॉ भल्ला के खिलाफ कार्रवाई की भाजपा नेताओं ने निंदा की है। ग्वालियर भाजपा के जिला अध्यक्ष देवेश शर्मा ने कहा कि जिला प्रशासन जिस प्रकार बदले की भावना से कार्रवाई कर रहा है यह घोर आपत्तिजनक है। एक ही अस्पताल और उनसे जुड़ी अन्य संपत्तियों को निशाने पर लेकर की गई कार्रवाई प्रशासन की पारदर्शित और इरादों पर प्रश्नचिह्न लगा रही है। मुख्यमंत्री सचिवालय से कार्रवाई की मॉनिटरिंग यह साबित करती है कि इसके पीछे बड़े हाथ हैं, जिन कारणों को सामने रखकर यह सब किया जा रहा है उन कारणों की जद में तो आधा शहर आता है।

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Muneshwar Kumar
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