14 महीने से योजनाएं बंद, कोरोना में नौकरी गई अब लोन भी नहीं मिल रहा बेरोजगारों को

- कोरोना साइड इफेक्ट : बगैर पूंजी कैसे शुरू करें रोजगार
- उद्योग विभाग मार्च अंत में तय करता है रोजगार योजनाओं का कोटा
- योजनाओं का पोर्टल भी पड़ा है बंद, स्वरोजगार और उद्यमी योजना के लक्ष्य तय नहीं हुए
- जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र के चक्कर लगा रहे हैं युवा

By: Narendra Kuiya

Published: 03 Jul 2021, 09:24 AM IST

ग्वालियर. कोरोना संक्रमण काल के कई चीजों पर साइड इफेक्ट हुए हैं। कुछ ऐसा ही साइड इफेेक्ट देखने को मिल रहा है बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार के माध्यम से रोजगार के मौके मुहैया कराने के उद्धेश्य से प्रदेश सरकार की ओर से संचालित हो रही योजनाओं पर। बेरोजगारों को लोन देने वाली ये योजनाएं अप्रैल-2020 से ही बंद हैं। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना और मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना का लाभ लेने के लिए शहर के बेरोजगार युवा काफी समय से जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र (डीआइसी) के चक्कर लगा रहे हैं, पर उनके हाथ निराशा ही लग रही है। यहां तक कि एमपी ऑनलाइन के जरिए इन योजनाओं में आवेदन के लिए बनाया गया स्वरोजगार पोर्टल भी बंद है। हालांकि अधिकारी जुलाई माह में इनके शुरू होने की संभावना जता रहे हैं, सरकार जल्द से जल्द इनकी शुरूआत करे ताकि कोरोना की मार झेल रहे बेरोजगार अपने पैरों पर खड़े हो पाएं।

किस योजना में कितना मिलता है लोन
योजना का नाम राशि (रुपए में) योग्यता/उम्र
स्वरोजगार योजना 50 हजार-10 लाख पांचवी (18-45)
युवा उद्यमी योजना 10 लाख-2 करोड़ दसवीं (18-40)

2015 में शुरू की थीं योजनाएं
प्रदेश सरकार ने राज्य के बेरोजगार युवकों के लिए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना, मुख्यमंत्री आर्थिक कल्याण योजना और मुख्यमंत्री कृषक उद्यमी योजना शुरू की थी। ये सभी योजनाएं वर्ष 2015 में शुरू की गई थीं।

फंड की कमी, एनपीए का डर
जानकारों का मानना है कि कोरोना संक्रमण काल के बाद पिछले डेढ़ साल में हर जगह फंड की कमी हुई है। सरकार पर भी फंड की कमी हुई है, शायद यही कारण है कि सरकार युवाओं की इन योजनाओं को शुरू नहीं कर रही है। इसके साथ ही सरकार को ऐसे माहौल में एनपीए का डर भी सता रहा है, इसके चलते लोन देने की शुरूआत नहीं की गई है।

योजनाओं में टारगेट मुताबिक मिलता है लोन
उद्योग विभाग हर वित्तीय वर्ष में दोनों योजनाओं का लक्ष्य निर्धारित करता है। जिला उद्योग केंद्र योजनवार मिले टारगेट अनुसार विज्ञापन जारी करते हैं। फिर एमपी ऑनलाइन से लोन के लिए आवेदन मंगवाए जाते हैं, जिन्हें जिला उद्योग केंद्र बैंकों को भेजता है। बैंक आवेदक की प्रोजेक्ट फाइल, शैक्षणिक योग्यता और अन्य दस्तावेज के आधार पर लोन देने के बारे में निर्णय करते हैं। लोन मंजूर होने पर राशि आवेदक के बैंक खाते में आ जाती है।

बैंकों पर आवेदन नहीं आए
इन योजनाओं के लिए हर वर्ष लक्ष्य निर्धारित होते हैं। अभी किसी भी विभाग से ये लक्ष्य नहीं आए हैं। इसके चलते बैंकों के पास भी आवेदन नहीं आए हैं।
- सुशील कुमार, अग्रणी जिला प्रबंधक ग्वालियर

जुलाई में शुरू होने की संभावना
अप्रैल-2020 से सभी योजनाएं बंद हैं। प्रदेश सरकार की ओर से जब इन योजनाओं को फिर से शुरू किया जाएगा तो युवाओं को जानकारी दे दी जाएगी। वैसे जुलाई में इनके शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।
- अरविंद बोहरे, महाप्रबंधक, जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र, ग्वालियर

शुरू नहीं कर पा रहा बिजनेस
मुझ वेडिंग इवेंट मैनेजमेंट का काम शुरू करना है, इसके लिए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना से 5 लाख रुपए का लोन लेना चाहता था। पिछले 10 माह से डीआइसी के चक्कर लगा रहा हूं, पर हर बार वहां से योजना के बंद होने का पता लगता है।
- मोहित माहेश्वरी, निवासी लोहामंडी

Narendra Kuiya Reporting
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