पति को काम करता देख फक्र से ऊंचा होता है सिर

कोरोना को मात देगी हमारी ताकत

By: Mahesh Gupta

Published: 23 Apr 2020, 01:12 PM IST

ग्वालियर.
कोविड-19 वायरस की चपेट से लोगों को बचाने के लिए हमारे पति सेवा दे रहे हैं, लेकिन जब खबरें मिलती है कि जनरक्षा में लगे डॉक्टर, पुलिस भी कोरोना की चपेट में आ रहे हैं। तो मन यह सुनकर दहल उठता है, लेकिन अगले ही पल यह सोचकर भी गर्व होता है कि किसी न किसी माध्यम से मेरे पति को देश की सेवा के काम तो आ रहे हैं। विचलित मन से यह व्यथा व्यक्त की सेवानगर में रहने वाले सीएमओ डॉ. सतीश दुबे की वाइफ कल्पना दुबे ने। सतीश इस समय भितरवार में पोस्टेड हैं। वह अपने परिवार से मिलने ग्वालियर भी बहुत कम आ पाते हैं। उनके पास साफ-सफाई, बिजली, पानी सहित सभी जिम्मेदारियां हैं।

सुबह से ही निकल जाते हैं फील्ड में
कल्पना ने बताया कि सर सुबह से ही फील्ड में निकल जाते हैं। पहले वह साफ-सफाई की व्यवस्था देखते हैं। दोपहर में कभी लंच के लिए आते हैं, तो कभी नहीं। रात में ही उनका आना होता है। ऐसे में मैं उनका सही तरीके से खाने-पीने का ध्यान भी नहीं रख पाती। चिंता हर वक्त रहती है, लेकिन शहरवासियों के बारे में सोचती हूं, तो चिंता काफू र हो जाती है।

कर्मचारियों की छुट्टी से बढ़ गया वर्कलोड
सर के आते ही मैं उनका पूरा समान सेनेटाइज करती हूं। वह सीधा बाथरूम में जाकर फ्रेश होते हैं। इसके बाद रूम में आते हैं। उनके खाने-पीने के बर्तन अलग हैं। दिन भर में मैं बार-बार उन्हें फोन करके सेनेटाइज रहने की याद दिलाती हूं। इस समय मैंने सभी कर्मचारियों की छुट्टी कर दी है। ऐसे में मेरे पास काम का बोझ बहुत बढ़ गया है। स्वास्थ्य से जुड़े काम के लिए सर का जेएएच जाना भी रहता है।

मेरे लिए बड़ा चैलेंज, लेकिन नामुमकिन नहीं
आयुर्वेद कॉलेज में सेवाएं दे रही डॉ. शिवानी चौरसिया उज्जैन से हैं। इस समय उनके पैरेंट्स को बहुत चिंता है। शिवानी बताती हैं कि दिन में कई बार पापा-मम्मी का फोन आते हैं। हमारा वर्क इम्युनिटी पॉवर बढ़ाने के लिए आयुष मंत्रालय द्वारा सजेस्ट की गई मेडिसिन की पैकिंग और डिस्ट्रीब्यूशन का है। गल्र्स हॉस्टल में रहने के कारण मुझे बहुत परेशानी हुई, लेकिन मेरा सपोर्ट मेरी मेम जानवी रोहिरा और फ्रेंड कविता पांडे ने किया। उन्होंने मेरे खाने से लेकर सोने तक की व्यवस्था अपनी देखरेख में की। इससे मुझे इन विषम परिस्थितियों में पैरेंट्स की कमी नहीं खली। मुझे इस बात की खुशी है कि मैं बॉर्डर पर न सही लेकिन देश के अंदर अपना कर्तव्य निभा रही हूं। मेरी ड्यूटी मुरार में है। ऐसे में मैं किसी की मदद से वहां तक पहुंचती हूं और मेडिसिन डिस्ट्रीब्यूट करती हूं। यह मेरे लिए बड़ा चैलेंज है, लेकिन नामुमकिन नहीं।

Mahesh Gupta
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